तंदरुस्ती के लिए कीजिए डॉग लाफ, मिर्ची लाफ व्यायाम!

भोपाल, 4 मई (आईएएनएस)। भाग-दौड़ की जिंदगी में हंसी तो दूर लोगों के चेहरे पर मुस्कुराहट तक नजर नहीं आती है। अब ठहाके कम ही सुनाई पड़ते हैं। बीमार जिंदगी की यह एक बड़ी वजह है लेकिन जिंदगी को खुशहाल बनाने के लिए हंसने और हंसाने का फंडा भोपाल में कई लोगों ने इजाद कर रखा है। तंदरुस्ती के लिए यहां डॉग लाफ, पिल्ला लाफ, मिर्ची लाफ जैसे 125 तरह के हास्य व्यायाम हैं।

मध्य प्रदेश के भोपाल शहर में ढाई हजार लोगों ने इस फंडे के जरिए अपनी जिंदगी ही बदल ली है। यहां की हर सुबह इन लोगों के ठहाकों से गूंज उठती है। वर्तमान समाज में तनाव और निराशा सबसे बड़ी बीमारी बन गई है। यही वजह है कि कई लोग तो दुनिया ही छोड़ने का कदम उठा लेते हैं।

भोपाल के सेवा निवृत्त आवकारी अधिकारी सी़ बी़ चंसौरिया भी कोई दस साल पहले ऐसा ही करने वाले थे लेकिन आज वे ठहाकों और हास्य योग की बदौलत न केवल तन्दुरुस्त हैं बल्कि कई और बीमारों को सेहतमंद बनाने में लगे हैं।

भोपाल में 27 हास्य योग केन्द्र चल रहे हैं और इनके पंजीकृत सदस्यों की संख्या ढाई हजार है। यह केन्द्र कहीं पार्क तो कहीं मैदानों में चल रहे हैं। शहर के जिन-जिन इलाकों में केन्द्र चल रहे हैं वहां सुबह का नजारा ही निराला होता है। नौकरी से अवकाश प्राप्त कर चुके अथवा बीमार लोगों के लिए यह योग केन्द्र संजीवनी साबित हो रहे हैं।

इन केन्द्रों के अध्यक्ष चंसौरिया बताते हैं कि हंसी से पूरे शरीर का व्यायाम हो जाता है और हंसी भाईचारा और दोस्ती बनाने में सहायक होता है। साथ ही सामाजिक माहौल पैदा करता है।

यहां 104 वर्ष की एक दादी मां हैं, उनका नाम है कस्तूरी सिंघई। उन्हें तो हास्य योग केन्द्र ने नई जिंदगी दी है। पांच वर्ष पहले उनकी हालत ऐसी थी कि वह बगैर सहारे के नहीं चल पाती थीं। आज खुलकर नाचती हैं। वह अपनी सेहत में आए इस बदलाव की वजह हंसी और ठहाके को मानती हैं।

यहां डॉग लाफ, पिल्ला लाफ, मिर्ची लाफ जैसे 125 तरह के हास्य व्यायाम हैं जो पूरे शरीर के अंगों का व्यायाम करा देते हैं। इसका सीधा लाभ शरीर को मिलता है, जिससे काया का तन्दुरुस्त रहना सम्भव हो पाता है। क्लब के सदस्य बताते हैं कि हास्य योग केन्द्र का सदस्य बनने के बाद उनकी जिन्दगी ही बदल गई है।

हास्य योग केन्द्र के अध्यक्ष चंसौरिया का मानना हैं कि अहम, डर और संकोच लोगों को हंसने से रोकता है। हास्य के प्रति लोगों में जागृति लाना जरूरी है। ऐसा होने पर ही लोग खुलकर हंसेंगे और उन्हें बुढ़ापे में किसी सहारे की जरूरत नहीं पड़ेगी। बाल रोग विशेषज्ञ डा. एस़ एऩ श्रीवास्तव भी मानते हैं कि तन्दुरुस्त रहने के लिए हंसना जरूरी है। जिन लोगों ने इस योग को अपनाया है उन्हें दवाइयां कम लेने की जरूरत पड़ती है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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