IAS Success Story: नरेगा मजदूर के बेटे ने क्रैक की UPSC, 240 रुपए लेकर दिल्‍ली तैयारी करने आया हेमंत

Hemant Pareek AIR 884 UPSC CSE 2023: सोचो! अगर आप IAS बनने का ख्‍वाब लेकर दिल्‍ली आओ और आपकी जेब में महज 240 रुपए हो। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की प्री-मेंस निकाल लो और फिर आपके पास इंटरव्‍यू में पहनने लायक शूट-बूट तक नहीं हो। ऐसी सक्‍सेस स्‍टोरी हेमंत पारीक की है, जिसमें बेइंतेहा मुफलिसी है। पहाड़ सा हौसला और कभी हार नहीं मानने वाली जिद भी है।

हेमंत पारीक राजस्‍थान के हनुमानगढ़ जिले की भादरा तहसील के गांव बीरन के रहने वाले हैं। इन्‍होंने यूपीएससी सीएसई 2023 में अखिल भारतीय स्‍तर पर 884वीं रैंक हासिल की है। पहले प्रयास में यूपीएससी क्रैक करने वाले हेमंत पारीक की मां मनरेगा मजदूर व पिता पंडिताई करते हैं। हेमंत को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की बजाय IRS (IT) सिर्विस कैडर अलॉट हुआ है।

Success Story of Hemant Pareek

मनरेगा मां मजदूर मां से मिली प्रेरणा

अपनी सक्‍सेस स्‍टोरी शेयर करते हुए हेमंत पारीक ने बताया कि मां के संघर्ष से आईएएस बनकर कलेक्‍टर जाने की प्रेरणा मिली थी। एक दिन मेरी मां मनरेगा में मजदूरी करके घर आई तो रोने लगी। वजह बताई कि सरकार हम मनरेगा मजदूरों को दिहाड़ी के प्रतिदिन 200 रुपए देती है, मगर 70 रुपए ही मिलते हैं।

मां की पूरी दिहाड़ी के लिए हेमंत पारीक सरकारी कार्यालय गए तो जवाब मिला कि 'ज्‍यादा कलेक्‍टर मत बन यहां' तब 12वीं पास कर लेने के बाद तक तो यह पता ही नहीं था कि कलेक्‍टर व कंडेक्‍टर में क्‍या फर्क होता है?

कॉलेज में प्रथम वर्ष में सर रवि शर्मा सबको पूछ रहे थे कि भविष्‍य में कौन-क्‍या बनना चाहेगा? हेमंत पारीक को उन्‍होंने ताना मारा कि तुम तो आईएएस बन जाओगे?

Hemant Pareek UPSC Success Story

सुमंत भाई ने भेजे वीडियो

हेमंत पारीक ने कॉलेज बने मजाक के बारे दिल्‍ली में रह रहे सुमंत भाई को बताया तो उन्‍होंने कुछ टॉपर्स के इंटरव्‍यू वीडियो भेज दिए, जो यूट्यूब चैनलों पर अपलोड थे। वीडियो देखकर तो हेमंत पारीक ने भी ठान लिया कि अब यूपीएससी क्रैक करके आईएएस बनना है।

कॉलेज शिक्षिकों ने की मदद

कॉलेज में सोनू सर यूपीएससी का इंटरव्‍यू दे चुके थे। हेमंत ने उनसे मिलकर यूपीएससी की तैयारी के बारे में जाना था। तब हेमंत के पास यूपीएससी की तैयारी के लिए लक्ष्‍मीकांत की किताबें खरीदने तक के पैसे नहीं थे। कुछ किताबें सोनू सर, चिरंजीवी सर से ली और बाकी यूट्यूब चैनल देखकर जाना। पूरा पैटर्न समझा। उसी दौरान कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर ली थी।

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240 रुपए लेकर पहुंचे दिल्‍ली

हेमंत पारीक ने बताया कि मैं कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद आईएएस बनने का ख्‍वाब लेकर दिल्‍ली आ गया था। यहां आकर अपने एक दोस्‍त जोगेंद्र सिहाग को फोन किया और बोला कि यार, कुछ दिन तेरे पास रुकना है। फिर मैं अपने आप मैनेज कर लूंगा। जब मैं दोस्‍त के रूम में पहुंचा तब मैंने देखा था कि मेरी जेब में मात्र 240 रुपए थे।

पहले प्रयास में प्री निकाली

हेमंत पारीक ने बताया कि दोस्‍त जोगेंद्र सिहाग व अन्‍य जान-पहचान वालों की मदद से दिल्‍ली में यूपीएससी की तैयारी की और प्री पास की। इतने पैसे थे नहीं कि कहीं कोचिंग कर सकें।

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प्री पास करने के बाद रजत सर का साथ मिला। रजत सर दो बार मेंस दे चुके थे। 3 माह तक रूम पर आकर खूब सपोर्ट किया। जीरो से हीरो बना दिया। नतीजा यह रहा कि मुख्‍य परीक्षा भी पास हो गई।

साक्षात्‍कार के अरविंद सर ने दिलाए कपड़े

यूपीएससी की मुख्‍य परीक्षा पास करने के बाद हेमंत पारीक के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि इंटरव्‍यू में पहनकर जाने को शूट-बूट नहीं थे। ना इतने पैसे थे कि नए खरीद सकें।

हेमंत ने अपनी यह समस्‍या अरविंद सर से शेयर की, उन्‍होंने बड़ा दिल दिखाया और अपने घर पर कॉल किया। झूठ बोला कि उसे पैसे भेजो। नए कोट-पेंट लाना है।

अरविंद सर के घर से पैसे आने के बाद वे हेमंत पारीक को दर्जी के पास लेकर गए और बोले कि 'पैसे की चिंता मत कर। अपने शूट का नाप दो'। फिर उन्‍होंने ही नए जूते दिलवाए।

यूपीएससी क्रैक करके लौटा तो मां-बाप रोने लगे

हेमंत पारीक ने बताया कि उन्‍हें यूपीएससी का इंटरव्‍यू दिलाने के लिए ताऊजी, बुआजी, मम्‍मी-पापा भी दिल्‍ली साथ आए थे। 30-32 मिनट इंटरव्‍यू चला, जो शानदार रहा। 16 तारीख की शाम को अतुल भैया ने बताया कि यूपीएससी की रिजल्‍ट आ चुका है। उन्‍होंने ही बताया कि 884वीं रैंक आई है। अगले दिन दिल्‍ली से घर गया तो मेरे स्‍वागत में पूरा गांव उमड़ा। भीड़ में से मम्‍मी-पापा निकल आए, जो गले लगकर खूब रोए।

ज्‍यादा कलेक्‍टर मत बन...

हेमंत पारीक बताते हैं कि मनरेगा मजदूर मां की दिहाड़ी के लिए सुनने को मिला था कि 'ज्‍यादा कलेक्‍टर ना बन' वो ही लाइनें हेमंत ने कमरे की दीवार पर लिख दी थी और उन पर मां व दादी की फोटो लगा रखी थी। ये लाइनें रोजाना मोटिवेट करती थी।

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