Success Story: 10वीं में फेल, 12वीं में फेल लेकिन UPSC को पहले प्रयास में किया क्रैक, गजब है ये महिला ऑफिसर
Success Story: 12वीं फेल आईपीएस (Indian Police Service) मनोज शर्मा की कहानी तो आज हर कोई जनता हैं लेकिन देश में उनके जैसे और भी कई लोग हैं, जिन्होंने बहुत संघर्ष के बाद सफलता अर्जित की, जानते हैं इसकी क्या वजह है?
इसके पीछे सिर्फ और सिर्फ एक ही कारण है और वो है इन लोगों की सच्ची लगन, मेहनत और धैर्य। जिसके चलते इन लोगों ने अपनी कमजोरी को ताकत बनाकर सफलता का नया इतिहास लिख दिया।

हमारे देश में यूपीएससी ( UPSC) की परीक्षा सबसे कठिन परिक्षाओं में गिनी जाती है, जिसे पास करना बहुत मुश्किल है, लोग कई बार इस परीक्षा को देते हैं, कुछ तो इंटरव्यू तक पहुंचने के बाद भी रिजेक्ट कर दिए जाते हैं। आज हम सक्सेस स्टोरी की इस कड़ी में उस खूबसूरत महिला का जिक्र करेंगे, जो केवल 10वीं में फेल नहीं हुई बल्कि 12वीं में भी उनके रिपोर्ट कार्ड पर लाल स्याही छपी थी।
ना तो वो निराश हुईं और ना ही अपने आत्मविश्वास को खोया (Success Story)
लेकिन इसके बावजूद ना तो वो निराश हुईं और ना ही अपने आत्मविश्वास को खोया, बल्कि उन्होंने पूरी मेहनत के साथ अपनी पढ़ाई पूरी की और पहले प्रयास में ही UPSC की परीक्षा क्रैक करके सफलता की नई दास्तां लिख दी।
10वीं में फेल, 12वीं में फेल लेकिन UPSC को पहले प्रयास में किया क्रैक (UPSC Success Story)
जी हां, हम बात कर रहे हैं राजस्थान के जयपुर की रहने वाली अंजू शर्मा की, जो कि दसवीं के प्री-बोर्ड एग्जाम में कमेस्ट्री के विषय में और 12वीं में अर्धशास्त्र के पेपर में फेल हो गई थीं।
अपने सपने को पूरा करने के लिए अंजू ने किया दिन-रात एक ( Meet officer Anju Sharma)
सोचकर देखिए जो छात्र या छात्रा 10-12वीं में फेल होते है, वो क्या कभी अधिकारी बनने का सपना देखते हैं? आप में से आधे से ज्यादा लोगों का उत्तर होगा' नहीं', लेकिन मूल रूप से जयपुर की रहने वाली अंजू शर्मा ने वो सपना देखा और पूरा किया।
MBA करने के बाद अंजू ने नहीं की नौकरी बल्कि दिया UPSC का एग्जाम
अंजू ने राजस्थान विवि से पहले विज्ञान में स्नातक किया और उसके बाद Duke University, USA से Marketing & Finance में MBA किया लेकिन अंजू ने एमबीए के बाद नौकरी नहीं की बल्कि यूपीएसएसी की परीक्षा दी और पहले प्रयास में ही इसे क्लीयर कर लिया।
रोजाना 7 से 8 घंटे पढ़ाई करती थीं अंजू शर्मा
दरअसल अंजू शर्मा ने एमबीए के दौरान ही यूपीएसएसी की तैयारी शुरू कर दी थी और वो रोजाना 7 से 8 घंटे पढ़ाई करती थीं। चाहे जाड़ा हो, गर्मी हो या फिर बरसात वो कभी भी अपना टाइम टेबल मिस नहीं करती थीं और इसका नतीजा ये हुआ कि अंजू ने अपने पहले अटेंप्ट में ही यूपीएसएसी को क्रैक करके सफलता का नया इतिहास लिखा और साल 1991 में राजकोट में असिस्टेंट कलेक्टर के पद पर नियुक्त हुईं।
ईमानदारी और मेहनत के साथ अपनी हर डयूटी निभाती हैं अंजू शर्मा
आज वो गुजरात सरकार के श्रम, कौशल विकास और रोजगार (एलएसडी एंड ईडी) कार्यालय में अतिरिक्त मुख्य सचिव हैं, अपने प्रशासनिक करियर में वो स्वास्थ्य, राजस्व, पर्यावरण, वन और शिक्षा जैसे विभिन्न विभागों में काम कर चुकी हैं। उन्हें काम करते हुए 33 साल हो गए हैं लेकिन आज भी वो पूरी ईमानदारी और मेहनत के साथ अपनी हर डयूटी निभाती हैं। वो एक मोटिवेशनल स्पीकर के तौर पर भी जानी जाती हैं।
'अपनी कमजोरी को ताकत बनाओ और प्रयास करते रहो' (Anju Sharma)
अंजू आज लोगों के लिए मिसाल हैं, वो हमेशा कहती हैं 'किसी राह पर अगर कोई चलता है तो उसको मुश्किलों का सामना करना ही पड़ता है लेकिन हमें उससे घबराकर पीछे नहीं भागना है बल्कि उनका सामना पूरी हिम्मत से करना है, डर तभी तक आपको डरा सकता है जब तक आप उससे डरते हैं, जिस दिन आप डरना छोड़ देंगे उस दिन आप अपनी जंग आधी जीत लेंगे, अपनी कमजोरी को ताकत बनाओ और प्रयास करते रहो, सफलता जरूर मिलेगी।'
एक नजर अंजू शर्मा के जीवन परिचय पर
- नाम- अंजू शर्मा
- मूल निवासी- जयपुर, राजस्थान
- शिक्षा- बीएसएसी, एमबीए, दीनदयाल विवि से डॉक्टेरट
- कार्य- श्रम, कौशल विकास और रोजगार (एलएसडी एंड ईडी) कार्यालय में अतिरिक्त मुख्य सचिव
- दो किताबें लिखीं- "I of the Storm - Discover your true self", "Corporate Monk - A Journey from Wealth to Wisdom".
पुरस्कार-
- प्रधानमंत्री पुरस्कार (2011)
- सर्वश्रेष्ठ राज्य स्टार्टअप रैंकिंग पुरस्कार 2011
- स्वास्थ्य बीमा योजना-राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसबीवाई) के लिए व्यक्तिगत योगदान पुरस्कार (2011)
- नैसकॉम सोशल इनोवेशन लीडर्स अवार्ड
- राष्ट्रीय ई गवर्नेंस पुरस्कार
- ई-ममता-एमसीटीएस परियोजना के लिए ई वर्ल्ड पुरस्कार (2012)
- ई-ममता-एमसीटीएस परियोजना के लिए इंडिया टेक पुरस्कार (2012)












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