Savita Pradhan: बाल विवाह का दंश झेला, पूरे परिवार को खत्म करने का प्लाना बनाया, फिर अफसर बन की लव मैरिज
Savita Pradhan Success Story: 'घायल तो यहाँ हर एक परिंदा है, मगर जो फिर से उड़ सका, वहीं ज़िन्दा है...।' संघर्ष, मेहनत और कामयाबी को खुद में समेटे ये लाइनें सविता प्रधान पर सटीक बैठती हैं। मध्य प्रदेश प्रशासनिक सेवा में सविता प्रधान वो अफसर हैं, जिनको जिंदगी ने खूब तोड़ा। बार-बार सब्र का इम्तिहान लिया। फिर भी इन्होंने अपने आप को कभी टूटकर बिखरने नहीं दिया। तरक्की के ख्वाब बुने। दर्द को ही ताकत बनाया। खूब मेहनत की और सक्सेस हासिल करके ही मानीं। इसके बाद अपनी पसंद के लड़के से प्रेम विवाह किया।
मध्य प्रदेश प्रशासनिक सेवा की अफसर सविता प्रधान वर्तमान में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, ग्वालियर में संयुक्त निदेशक पद पर पोस्टेड हैं। सविता प्रधान की कहानी मध्य प्रदेश के मंडी जिले के एक छोटे से गांव के आदिवासी परिवार से शुरू होती है। बचपन अभावों में बीता। माता-पिता धान कटाई, बीड़ी पत्ते तोड़ने व महुआ बीनने का काम करके जीवन यापन कर रहे थे।

गांव में 10वीं पास करने वाली लड़की
सविता प्रधान के माता-पिता पढ़े-लिखे नहीं थे, मगर अपनी बेटी सविता के स्कूल-कॉलेज की ओर बढ़ते कदम कभी नहीं रोके। गांव के ही सरकारी स्कूल से दसवीं तक की पढ़ाई की। दसवीं पास करने वाली पहली लड़की बनीं। सविता प्रधान ने 7 किलोमीटर दूर स्थित गांव के स्कूल में 11वीं में दाखिल लिया। वहां 12वीं तक पढ़ाई की। इस बीच सविता के लिए अमीर घर से रिश्ता आया। चट मंगनी पट ब्याह की तर्ज पर सविता की महज 16 साल की उम्र में शादी कर दी गई।

11 साल बड़े शख्स से शादी
बाली उमर में सविता की शादी 11 साल बड़े शख्स से हुई। भोपाल में शानदार रिसेप्शन हुआ। पहले तो बाल विवाह का दंश झेला फिर ससुराल वालों की प्रताड़ना। पति ही नहीं बल्कि सास, ससुर व ननद तक हर किसी ने सविता पर कहर बरपाया। उन दिनों को याद करते आज भी सविता की आंखें नम हो जाती हैं। गला रुंध जाता है। बहते आंसू सविता की पूरी दर्दभरी कहानी बयां कर देते हैं।

जब आने लगे सुसाइड के ख्याल
मीडिया में अपनी स्टोरी शेयर करते सविता प्रधान ने बताया कि ससुराल वालों ने हैवानियत की सारी हदें पार कर दी थी तब उसे आत्महत्या के ख्याल आने लगे थे। सोचा करती थीं कि ससुराल में सारे लोगों को एक साथ खत्म कर दूं। उनके शवों को कहीं ठिकाने लगा दूं। इस बीच सविता प्रधान के दो बेटे हो चुके थे। अथर्व व यजूस। आखिर सविता ने ससुराल छोड़ दिया।

सविता प्रधान पॉर्लर में काम करने लगीं
पति का घर छोड़ने के बाद सविता अपने रिश्तेदार के यहां रही। पॉर्लर का काम करके दोनों बच्चों को पालने लगी। इसी दौरान फिर से किताबों से दोस्ती की। कचन की मदद से शेष पढ़ाई पूरी की। फिर मध्य प्रदेश प्रशासनिक सेवा की तैयारियों में जुट गई। साल 2005 में पहले ही प्रयास में एमपीएससी पास कर लिया। प्री, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू पास करने पर कुल 75 हजार छात्रवृत्ति मिली। सविता ने एमपीएससी की परीक्षा दो बार दी थी।

सविता प्रधान की पहली पोस्टिंग
सविता प्रधान मध्य प्रदेश प्रशासनिक सेवा की अफसर बनी तो पहली पोस्टिंग नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव मुंसिपल काउंसिल में मिली। इस अवधि तक सविता ने अपने पति से तलाक नहीं लिया था। वह उसके पास आता रहता था। पति की प्रताड़ना कभी कम नहीं हुई। अफसर बन जाने पर तो उसने सविता के नाम से पर्सनल लोन लिया और कार खरीदी। पति की हैवानियत फिर भी कम नहीं हुई तो सविता ने तलाक ले लिया।

हर्ष राय गौर से की दूसरी शादी
पहले पति से तलाक के बाद सविता प्रधान की जिंदगी में मध्य प्रदेश गुना के रहने वाले डॉ. हर्ष राय गौर की एंट्री हुई। दोनों की दोस्ती प्यार में बदल गई और अविवाहित हर्ष ने साल 2015 में सविता से गाजे-बाजे से सामाजिक रीति रिवाज से शादी की। दूसरी शादी से सविता के एक बच्चा हुआ। वर्तमान में सविता अपने परिवार के साथ खुशहाल जिंदगी जी रही हैं।
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