छिन गया था पिता का साया, सिलाई मशीन चलाकर की पढ़ाई, अब चला रही नमो भारत ट्रेन, पढ़िए शिवानी के संघर्ष की कहानी
मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है।
पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।।
Namo Bharat Train: सफलता हर किसी को इतनी आसानी से कहां मिलती है। सफलता के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है। कई कसौटियों को पार कर सफलता मिलती है। संघर्ष चाहे कितना भी बड़ा क्यों ना हो, लेकिन सफलता हाथ लग जाती है तो क्या ही कहना। ऐसी ही एक कहानी है शिवानी सिंह की।
शिवानी को भी कड़ी मेहनत और संघर्ष के बाद सफलता का स्वाद मिला है। गाजियाबाद के सिद्धार्थ विहार की रहने वाली शिवानी सिंह का बचपन काफी संघर्षों से भरा रहा है। बचपन में ही उनके सिर से पिता का साया हट गया। 5 भाई-बहनों की जिम्मेदारी अकेली मां पर आ गई।

इस संघर्ष के दौरान कई भाई-बहनों की पढ़ाई छूट गई। लेकिन शिवानी पढ़ाई करना चाहती थी और आगे बढ़ना चाहती थी। उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए सिलाई मशीन तक चलाई। इसके लिए उन्होंने पार्ट टाइम काम करने लगी। जिससे वह अपनी पढ़ाई जारी रख सके।
शिवानी को शुरू से ही ट्रेन चलाने का सपना था। वह ट्रेन में सफर के दौरान अक्सर सोचा करती थी एक दिन मैं भी ट्रेन चलाऊंगी। यह राह इतना आसान नहीं था। शिवानी को इसके लिए काफी मेहनत करनी पड़ी। ट्रेन चलाने के लिए उन्हें पहले बीटेक करना पड़ता है, लेकिन उनके पास पैसे नहीं थे।
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इतने संघर्ष के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने डिप्लोमा करने का फैसला किया। किस्मत के साथ-साथ शिवानी की मेहनत ने ऐसी रंग लाई कि आज वह नमो भारत की ट्रेन ऑपरेटर हैं। शिवानी को ट्रेन चलाते देख ना उसके परिवार बल्कि उनके रिश्तेदार बहुत खुश हैं। शिवानी ने अपनी मेहनत से परिवार को आर्थिक रूप से सक्षम बनाया है।
इतना ही संघर्ष और अभाव में बड़ी बहन की पढ़ाई छूट गई थी। शिवानी ने उनकी पढ़ाई फिर से शुरू करवाई है। घर में वह काफी मदद कर रही है। उन्होंने अपने संघर्ष और मेहनत से लोगों को पढ़ाई का महत्व समझाया है।
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