मालवीय नगर अग्निकांड के बाद चला बुलडोजर! CM रेखा गुप्ता की हाई-लेवल मीटिंग, हर अपडेट
दिल्ली के मालवीय नगर में हुए भीषण अग्निकांड के बाद राजधानी में अवैध निर्माण और नियमों की अनदेखी पर प्रशासन का शिकंजा कसना शुरू हो गया है। एक तरफ मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली सचिवालय में हाई-लेवल बैठक बुलाई है, वहीं दूसरी तरफ दक्षिणी दिल्ली के कई इलाकों में अवैध व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ सीलिंग और ध्वस्तीकरण अभियान शुरू कर दिया गया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह कार्रवाई और तेज हो सकती है।
पांच जून को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में एमसीडी, दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस, डीडीए और अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। बैठक का मुख्य फोकस राजधानी में चल रहे अवैध निर्माण, बिना अनुमति संचालित हो रहे होटल-गेस्ट हाउस और अग्नि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों पर रहेगा।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री पहले ही स्पष्ट कर चुकी हैं कि लोगों की जान से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे में यह बैठक सिर्फ समीक्षा तक सीमित नहीं रहने वाली, बल्कि आगे की सख्त कार्रवाई का रोडमैप भी तय कर सकती है।
साउथ दिल्ली में शुरू हुई सीलिंग कार्रवाई
मालवीय नगर हादसे के कुछ ही दिनों बाद एमसीडी ने दक्षिणी दिल्ली के कई व्यावसायिक इलाकों में सीलिंग अभियान शुरू कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार भवन नियमों और लाइसेंस शर्तों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों को निशाने पर लिया जा रहा है।
अब तक हौज खास विलेज में दो इमारतों को सील किया जा चुका है। सैदुलाजाब इलाके में छह अन्य इमारतों की पहचान की गई है, जिन पर कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा आसपास के अन्य क्षेत्रों में भी कई भवनों को सूचीबद्ध किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि कम से कम दस प्रतिष्ठानों, जिनमें कई रेस्तरां भी शामिल हैं, के खिलाफ कार्रवाई तय है।
हौज रानी और मालवीय नगर क्षेत्र पर खास नजर
अधिकारियों ने संकेत दिया है कि हौज रानी इलाके के आसपास मौजूद उन प्रतिष्ठानों को भी जल्द सील किया जाएगा, जिनके खिलाफ नियमों के उल्लंघन की शिकायतें मिली हैं। प्रशासन फिलहाल कुछ प्रतिष्ठानों के बेड एंड ब्रेकफास्ट लाइसेंस रद्द होने का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।
सीलिंग अभियान के लिए एमसीडी की चार अलग-अलग टीमें मैदान में उतारी गई हैं। इनमें जूनियर इंजीनियर और असिस्टेंट इंजीनियर स्तर के अधिकारी शामिल हैं, जो भवनों की जांच और सीलिंग प्रक्रिया को अंजाम दे रहे हैं।
21 मौतों ने खोल दी अवैध निर्माण की परतें
मालवीय नगर में जिस बेड एंड ब्रेकफास्ट सुविधा में आग लगी थी, उस हादसे में 21 लोगों की जान चली गई थी। शुरुआती जांच में सामने आया कि भवन निर्धारित क्षमता से अधिक इस्तेमाल किया जा रहा था। इसके अलावा भवन के नक्शे, उपयोग और सुरक्षा मानकों को लेकर भी गंभीर सवाल उठे।
इस घटना ने एक बार फिर उस समस्या को सामने ला दिया है, जिसमें कई जगहों पर लाइसेंस किसी एक गतिविधि के लिए लिया जाता है, लेकिन वास्तविक उपयोग उससे कहीं अधिक और अलग तरीके से किया जाता है। ऐसे मामलों में अक्सर अग्नि सुरक्षा, निकासी मार्ग और भवन सुरक्षा मानकों की अनदेखी देखने को मिलती है, जो किसी हादसे के समय जानलेवा साबित हो सकती है।
जिला स्तर पर बनी विशेष कमेटियां
दिल्ली सरकार ने चार जून को जिला और उपखंड स्तर पर विशेष समितियों का गठन किया है। इन समितियों में जिला मजिस्ट्रेट, एमसीडी के अधिकारी, पुलिस अधिकारी और फायर विभाग के प्रतिनिधि शामिल हैं।
इनका काम पूरे शहर में ऐसे भवनों और प्रतिष्ठानों की पहचान करना है जो अग्नि सुरक्षा नियमों और भवन उपनियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। विशेष तौर पर पांच मंजिल या उससे ऊंची इमारतों, बेसमेंट वाले व्यावसायिक भवनों, होटल, गेस्ट हाउस, बैंक्वेट हॉल, अस्पताल और नर्सिंग होम जैसी जगहों की जांच को प्राथमिकता दी जाएगी।
क्या दिल्ली में शुरू होने वाला है बड़ा क्लीन-अप अभियान?
जिस तरह मालवीय नगर हादसे के बाद प्रशासन लगातार सक्रिय दिखाई दे रहा है, उससे संकेत मिल रहे हैं कि दिल्ली में अवैध निर्माण और सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा सकता है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की हाई-लेवल बैठक और साथ-साथ चल रही सीलिंग कार्रवाई को इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
अब नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में यह अभियान सिर्फ कुछ इलाकों तक सीमित रहता है या फिर पूरी दिल्ली में अवैध होटलों, गेस्ट हाउसों और गैरकानूनी निर्माणों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई देखने को मिलती है।














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