Mossad मोसाद को ‘किलिंग मशीन’ बनाने वाला चीफ! कौन हैं David Barnea जिससे कांपते थे दुश्मन, क्यों छोड़ी एजेंसी?

Mossad Chief: इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद (Mossad) को दुनिया की सबसे खतरनाक और सबसे गुप्त तरीके से काम करने वाली जासूसी एजेंसियों में गिना जाता है। लेकिन हाल ही में रिटायर हुए इसके प्रमुख डेविड बार्निया (David Barnea) के पांच साल के कार्यकाल को कई लोग मोसाद के इतिहास का सबसे आक्रामक और असरदार दौर मानते हैं। रिपोर्टों और अलग-अलग दावों के मुताबिक, बार्निया के लीडरशिप में मोसाद ने सिर्फ खुफिया जानकारी जुटाने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि मिडिल ईस्ट की राजनीति, युद्ध और सुरक्षा को प्रभावित करने वाली एक बड़ी ताकत के रूप में काम किया। कुछ लोग उन पर मोसाद को किलिंग मशीन बनाने के आरोप भी लगाते हैं। ऐसे में बार्निया के बारे में जानना बेहद अहम हो जाता है।

डेविड बार्निया के दौर में कैसे बदली मोसाद?

बार्निया के कार्यकाल के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने मोसाद को पारंपरिक जासूसी मॉडल से आगे बढ़ाकर एक ऐसे नेटवर्क में बदल दिया, जो दुश्मन देशों के अंदर गहराई तक पहुंच सकता था। उनके लीडरशिप में ईरान के न्युक्लियर प्रोग्राम, हिजबुल्लाह की सैन्य मूवमेंट्स और दुनिया भर में यहूदी समुदाय की सुरक्षा से जुड़े कई बड़े ऑपरेशन चलाए गए। इसी वजह से उनका कार्यकाल आज भी चर्चा में बना हुआ है।

हसन नसरल्लाह के खिलाफ 10 साल की तैयारी

रिपोर्टों के मुताबिक 27 सितंबर 2024 को इजराइली एयरफोर्स के F-15I फाइटर जेट्स ने बेरूत के दहिया इलाके में मौजूद हिजबुल्लाह के अंडरग्राउंड हेडक्वार्टर पर हमला किया। दावा किया गया कि इस हमले में 85 बम गिराए गए और हिजबुल्लाह प्रमुख हसन नसरल्लाह समेत लगभग 20 सीनियर कमांडर मारे गए। इनमें अली कराकी का नाम भी शामिल बताया गया। बताया जाता है कि इस ऑपरेशन के लिए इजराइली सेना (IDF) और मोसाद ने लगभग 10 वर्षों तक खुफिया जानकारी जुटाई थी। रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि इमारत के अंदर पहले से ऐसे इक्विपमेंट लगाए गए थे जो लक्ष्य की सटीक लोकेशन बताने में मदद कर सकते थे।

लेबनान के स्थानीय एजेंटों ने निभाई बड़ी भूमिका

इस ऑपरेशन का सबसे दिलचस्प पहलू यह बताया जाता है कि इसमें सिर्फ इजराइली एजेंट ही नहीं, बल्कि लेबनान के स्थानीय लोगों का भी इस्तेमाल किया गया। दावा है कि ये एजेंट बमबारी के तुरंत बाद इन इलाकों में पहुंच जाते थे और नुकसान का आकलन करने के साथ-साथ जरूरी इक्विपमेंट भी स्थापित करते थे। कहा जाता है कि कई बार वे धुएं, आग और मलबे के बीच अपनी जान जोखिम में डालकर काम करते थे। इसी नेटवर्क के जरिए नसरल्लाह की मूवमेंट्स पर लगातार नजर रखी गई। रिपोर्टों के मुताबिक, इन एजेंटों को बाद में इजराइल प्राइज से भी सम्मानित किया गया, हालांकि उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई।

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ईरान की सरकार के खिलाफ कथित बड़ा प्लान

बार्निया के करीबी सूत्रों के हवाले से यरुशलेम पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि ईरान की मौजूदा व्यवस्था को कमजोर करने के लिए कुर्द लड़ाकों (Kurds) का इस्तेमाल करने की योजना पर विचार किया गया था। यह मॉडल कथित तौर पर उस रणनीति से प्रेरित बताया गया, जिसका इस्तेमाल अमेरिका ने 2003 में इराक में सद्दाम हुसैन के खिलाफ किया था। रिपोर्टों में कहा गया कि इस योजना के तहत कुर्द लड़ाकों को एयर सपोर्ट, नो-फ्लाई जोन और अन्य सहायता देने की तैयारी थी। साथ ही गाजा और लेबनान से जब्त हथियारों को बेहतर कर उनके इस्तेमाल की भी बात सामने आई।

आखिरी समय में क्यों रुका ऑपरेशन?

दावों के मुताबिक, यह योजना पूरी तरह लागू नहीं हो सकी क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आखिरी समय में इसे मंजूरी नहीं दी। कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि अमेरिकी अधिकारियों या तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगान की सलाह के बाद यह फैसला लिया गया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि मुहैया नहीं हो सकी। फिर भी यह कहानी बताती है कि मिडिल ईस्ट में सेना से जुड़े और राजनीतिक फैसले किस तरह कई देशों के हितों से प्रभावित होते हैं।

ईरान को लेकर बार्निया का आकलन

बताया जाता है कि फरवरी में ट्रंप के साथ हुई एक वीडियो कॉल के दौरान बार्निया ने कहा था कि ईरान की सरकार को कमजोर करना एक दिन का काम नहीं है। उनके मुताबिक इसमें कम से कम एक साल का समय लग सकता है। उन्होंने कथित तौर पर यह भी माना कि यदि आर्थिक प्रतिबंध और सैन्य दबाव जारी रहा, तो ईरान की स्थिति कमजोर हो सकती है। वहीं अगर प्रतिबंध हटाए गए, तो देश दोबारा आर्थिक रूप से मजबूत हो सकता है।

ईरान की सत्ता किसके हाथ में?

रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि फरवरी 2025 में एक हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी। हालांकि इस दावे की पुष्टि विश्वसनीय इंटरनेशनल सोर्स से नहीं हुई है। कुछ इजराइली सूत्रों ने दावा किया कि इसके बाद मोजताबा खामेनेई वास्तविक सत्ता संभाल रहे हैं। हालांकि इस विषय पर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग-अलग बातें कही गई हैं और स्थिति स्पष्ट नहीं मानी जाती।

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पिकैक्स माउंटेन: नया न्यूक्लियर सिरदर्द?

रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान ने एक अत्यधिक सुरक्षित अंडरग्राउंड न्यूक्लियर फेसिलिटी बनााई की है जिसे "पिकैक्स माउंटेन" कहा जा रहा है। दावा है कि यह इतना गहरा और सुरक्षित है कि इसे बंकर-बस्टर बमों से भी नष्ट करना बेहद मुश्किल होगा। इजराइल और अमेरिका के लिए यह चिंता का विषय माना जा रहा है क्योंकि कहा जाता है कि यहां हाई लेवल एनरिच्ड यूरेनियम रखा जा सकता है। हालांकि इस फेसिलिटी की वास्तविक क्षमता और स्थिति को लेकर सार्वजनिक जानकारी सीमित है।

मोसाद का कथित ग्राउंड ऑपरेशन क्यों नहीं हुआ?

रिपोर्टों के मुताबिक, 2024 में कई गुप्त बैठकों के दौरान मोसाद ने ईरान के न्युक्लियर प्रोग्राम के खिलाफ एक बड़े जमीनी ऑपरेशन का प्रस्ताव रखा था। लेकिन इजराइली सैन्य और राजनीतिक लीडरशिप ने इसे अत्यधिक जोखिम भरा माना। बताया गया कि इस योजना को रोकने के पीछे तीन मुख्य कारण थे। पहला, इतने बड़े ऑपरेशन के लीक होने का खतरा। दूसरा, इसकी सफलता को लेकर सैन्य लीडरशिप की शंकाएं। और तीसरा, 7 अक्टूबर 2023 के बाद गाजा में चल रही लड़ाई के कारण संसाधनों की कमी।

हिजबुल्लाह को लेकर ट्रंप के फैसले पर नाराजगी

कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि अमेरिका और इजराइल हिजबुल्लाह को पूरी तरह कमजोर करने की दिशा में आगे बढ़ रहे थे। लेकिन एक चरण पर अमेरिकी दखल के कारण कुछ योजनाएं रोक दी गईं। इजराइल के कुछ अधिकारियों का मानना था कि इससे हिजबुल्लाह को रणनीतिक फायदा मिला। वहीं बार्निया का नजरिया अलग बताया जाता है। उनका मानना था कि दक्षिणी लेबनान पर स्थायी कब्जा कोई प्रैक्टिकल सॉल्युशन नहीं है।

नए मोसाद चीफ को लेकर विवाद

डेविड बार्निया ने कथित तौर पर रोमन गोफमैन को नया मोसाद प्रमुख बनाए जाने पर आपत्ति जताई थी। हालांकि जब अदालत ने नियुक्ति को मंजूरी दे दी, तो उन्होंने एजेंसी के अधिकारियों से नए प्रमुख का पूरा सहयोग करने को कहा। यह कदम उनके पेशेवर रवैये का उदाहरण माना गया। रिपोर्टों के मुताबिक, बार्निया ने व्यक्तिगत मतभेदों को संस्था के हितों से ऊपर नहीं रखा।

रिटायरमेंट के बाद क्या करेंगे बार्निया?

पांच साल तक दुनिया की सबसे चर्चित खुफिया एजेंसियों में से एक का लीडरशिप करने के बाद डेविड बार्निया अब सार्वजनिक जीवन से कुछ दूरी बनाना चाहते हैं। रिपोर्टों के मुताबिक वे अपनी पत्नी के साथ दुनिया घूमने की योजना बना रहे हैं, हालांकि पारिवारिक प्राथमिकताओं के कारण अंतिम फैसला अभी स्पष्ट नहीं है।

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क्यों याद रखा जाएगा बार्निया का दौर?

चाहे उनके कार्यकाल से जुड़े सभी दावे फुल प्रूफ हों या नहीं, इतना जरूर है कि डेविड बार्निया का नाम मोसाद के सबसे प्रभावशाली प्रमुखों में लिया जाता है। उनके दौर में एजेंसी ने कई बड़े और साहसिक ऑपरेशन किए, जिनकी चर्चा आज भी सुरक्षा और खुफिया जगत में होती है। यही वजह है कि उनके समर्थक उन्हें वह व्यक्ति मानते हैं जिसने मोसाद को सिर्फ एक जासूसी एजेंसी नहीं, बल्कि मिडिल ईस्ट की शक्ति राजनीति का एक अहम खिलाड़ी बना दिया।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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