गर्मियों की धूप में पकती थीं यादें! आम से लेकर करौंदे तक, ये 5 अचार सिर्फ स्वाद नहीं बल्कि बचपन की विरासत हैं

Summer Pickles: गर्मियों की दोपहरों का अपना एक अलग ही रंग हुआ करता था। बाहर तपती धूप, घर के भीतर कूलर की आवाज और आंगन में कतार से रखी कांच की बरनियां। उन बरनियों में सिर्फ मसाले और फल नहीं होते थे बल्कि पूरे परिवार की यादें, परंपराएं और सालभर का स्वाद सहेजा जाता था।

अचार ने रसोई के साथ दिल पर भी किया कब्जा
भारतीय घरों में गर्मी का मौसम हमेशा से अचार बनाने के मौसम के रूप में जाना जाता रहा है। ये वो समय होता था जब मां, दादी और नानी रसोई को एक छोटे-से स्वाद के कारखाने में बदल देती थीं। धूप की गर्मी और मसालों की खुशबू मिलकर ऐसा जादू रचती थी, जिसका स्वाद महीनों तक भोजन का हिस्सा बना रहता था।

summer pickles

गर्मियों में घर पर बनाएं ये 5 टेस्टी अचार

1. आम का अचार

-अगर गर्मियों और अचार का जिक्र हो तो सबसे पहले कच्चे आम का नाम ही सामने आता है। भारतीय घरों में आम का अचार केवल एक खाद्य पदार्थ नहीं बल्कि एक परंपरा माना जाता है। सुबह-सुबह कच्ची कैरियों को काटना, उन पर हल्दी और नमक लगाकर धूप में सुखाना और फिर मसालों के साथ उन्हें तेल में डालना एक खास प्रक्रिया हुआ करती थी।

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-सरसों का तेल, मेथी, राई, सौंफ और कलौंजी की खुशबू से तैयार ये अचार सालभर खाने की थाली का सबसे प्रिय साथी बना रहता था। आज भी घर से दूर रहने वाले छात्रों और नौकरीपेशा लोगों के लिए आम का अचार घर की यादों से जुड़ा सबसे खास स्वाद है।

2. कटहल का अचार

कटहल को अक्सर सब्जी के रूप में देखा जाता है लेकिन ये गर्मियों का एक अहम फल भी है। कई राज्यों में कटहल का अचार बेहद पसंद किया जाता है। मसालों और सरसों के तेल में तैयार किया गया कटहल का अचार अपने अनोखे स्वाद के लिए जाना जाता है। इसकी हर फांक मसालों की गहराई और पारंपरिक भारतीय रसोई की समृद्धि का एहसास कराती है। पराठे या सादी दाल-चावल के साथ इसका स्वाद खाने को एक अलग स्तर पर पहुंचा देता है।

3. नींबू का अचार

गर्मियों में मिलने वाले ताजे और रसीले नींबू का अचार लगभग हर घर में तैयार किया जाता रहा है। खास बात ये है कि कई परिवारों में इसे कम मसालों और बिना तेल के भी बनाया जाता है जिससे ये स्वाद के साथ-साथ पाचन के लिए भी फायदेमंद माना जाता है।

4. आलूबुखारे का अचार

वहीं कुछ क्षेत्रों में आलूबुखारे का खट्टा-मीठा अचार भी बेहद लोकप्रिय है। गुड़ और मसालों के साथ तैयार होने वाला यह अचार स्वाद में इतना संतुलित होता है कि बच्चे और बड़े दोनों इसे पसंद करते हैं। आधुनिक जैम और सॉस के दौर में भी इसका देसी स्वाद अपनी अलग पहचान बनाए हुए है।

5. करौंदे का अचार: छोटे फल में बड़ा स्वाद

गर्मियों में बाजारों में दिखाई देने वाला करौंदा अपने तीखे और खट्टे स्वाद के लिए जाना जाता है। करौंदे और हरी मिर्च से तैयार होने वाला अचार कई घरों की खास रेसिपी रहा है। इसकी चटपटी खटास भोजन का स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ गर्मियों में कम हो जाने वाली भूख को भी वापस ले आती है। यही वजह है कि करौंदे का अचार आज भी पारंपरिक भारतीय रसोई का अहम हिस्सा माना जाता है।

अचार के साथ जुड़ी थी धूप, धैर्य और परिवार की कहानी

-अचार बनाना केवल एक रेसिपी नहीं था बल्कि पूरे परिवार को जोड़ने वाली एक प्रक्रिया थी। किसी के जिम्मे फल काटना होता था, कोई मसाले तैयार करता था और कोई बरनियों को धूप दिखाने का काम संभालता था।

-हर सुबह अचार की बरनी को धूप में रखना और शाम को उसे सावधानी से अंदर लाना एक दैनिक रस्म की तरह होता था। यही धूप अचार को लंबे समय तक सुरक्षित रखने का काम करती थी। ये भारतीय पारंपरिक ज्ञान और प्राकृतिक संरक्षण तकनीक का एक शानदार उदाहरण था।

बदलती लाइफस्टाइल में खोती जा रही है अचार की परंपरा

-आज के समय में बाजार में तरह-तरह के रेडीमेड अचार आसानी से उपलब्ध हैं। व्यस्त जीवनशैली के कारण बहुत कम लोग घर पर अचार बनाने का समय निकाल पाते हैं। हालांकि सुविधा के इस दौर में कहीं न कहीं वह अपनापन और धैर्य भी पीछे छूट गया है, जो घर के बने अचार में महसूस होता था। दादी-नानी के हाथों से तैयार होने वाले अचार सिर्फ खाने का हिस्सा नहीं था बल्कि परिवार, परंपरा और भावनाओं का स्वाद भी अपने साथ लेकर आते थे।

-गर्मियों का मौसम केवल फलों का मौसम नहीं बल्कि यादों को सहेजने का भी मौसम है। आम, कटहल, नींबू, आलूबुखारा और करौंदे जैसे फल जब अचार की शक्ल लेते हैं तो वह सिर्फ स्वाद नहीं देते बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही एक सांस्कृतिक विरासत को भी आगे बढ़ाते हैं।

-शायद इस बार गर्मियों में कुछ समय निकालकर एक छोटी-सी बरनी में अचार डालना सिर्फ एक रेसिपी बनाने जैसा नहीं होगा बल्कि उन खूबसूरत बचपन की यादों को फिर से जीने जैसा होगा, जिनकी खुशबू आज भी भारतीय घरों में कहीं न कहीं मौजूद है।

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