Kale Gehun Ki Kheti: शिक्षक से किसान बनकर बीमार पत्नी के लिए उगाया काला गेहूं, किन बीमारियों में मिला फायदा?
Kale gehun ki kheti: इसे बीमार पत्नी के लिए चिंता कहें या नवाचार की सोच। वजह चाहे कुछ भी हो, मगर शिवप्रसाद तिवाड़ी ने वह कर दिखाया जो किसानों की आमदनी का नया जरिया बन सकता है। जहां लोग काले गेहूं के नाम तक से अनजान हैं, वहां शिवप्रसाद तिवाड़ी ने इसकी खेती कर मिसाल कायम कर दी है।
राजस्थान के अलवर जिले के कठूमर उपखड में गांव सौंखरी निवासी शिवप्रसाद तिवाड़ी ने काले गेहूं की खेती शुरू की। साल 2017 में रिटायरमेंट से पहले वे गांव सौंखरी के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में प्रिंसिपल थे और अब उन्हें प्रगतिशील किसान के तौर पर जाना जाने लगा है।

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Black wheat farming: नवाचार मान रहा कृषि विभाग
वनइंडिया हिंदी से बातचीत में अलवर कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक पीसी मीना बताते हैं कि गांव सौंखरी के शिवप्रसाद तिवाड़ी काले गेहूं की खेती कर रहे हैं। हालांकि यह इलाका इस फसल के लिए बहुत अनुकूल नहीं है, फिर भी जो किसान यह प्रयोग कर रहे हैं, वे प्रेरणादायी हैं। उनका यह नवाचार अन्य किसानों के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है।

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Shivprasad Tiwari Farmer Rajasthan: शिवप्रसाद तिवाड़ी की पत्नी को थी यह बीमारी
वनइंडिया हिंदी से बातचीत में शिवप्रसाद तिवाड़ी बोले कि 'आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है। काले गेहूं की खेती मैंने इसी सोच से की थी। दरअसल,''मेरी पत्नी कमला देवी को 10 साल पहले 57-58 साल की उम्र में, 400-450 रेंज का डायबिटीज हो गया था। कई नामी डॉक्टरों से इलाज करवाया लेकिन डायबिटीज की रेंज कभी भी 350 से कम नहीं हुई। उनका शुगर लेवल कंट्रोल में नहीं आ रहा था। इसी दौरान किसी ने बताया कि काला गेहूं इस बीमारी में कारगर हो सकता है।"
बाजार में नहीं मिला तो खुद उगाया काला गेहूं
पत्नी के इलाज के लिए शिवप्रसाद तिवाड़ी ने बाजार से काला गेहूं खरीदने की कोशिश की, लेकिन काला गेहूं कहीं उपलब्ध नहीं था। जब स्थानीय स्तर पर भी काला गेहूं नहीं मिला तो उन्होंने फैसला किया कि वे खुद इसकी खेती करेंगे। इसके लिए उन्होंने ऑनलाइन जानकारी जुटाई।

पंजाब से मंगवाया बीज, खुद की खेती
शिवप्रसाद ने पंजाब के किसानों से संपर्क साधा और वहां से 8000 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से 65 किलोग्राम काले गेहूं के बीज मंगवाए। एक बीघा खेत तैयार किया और 40 किलोग्राम बीज बो दिए। पहली ही बार में उन्हें लगभग 20-25 मन प्रति बीघा काले गेहूं का उत्पादन मिला। हालांकि मार्च में आंधी व बरसात ने पकती फसल को नुकसान पहुंचाया। वरना पैदावार और ज्यादा हो सकती थी।

Black Wheat Benefits: काला गेहूं की कीमत व औषधीय गुण
शिवप्रसाद के अनुसार काला गेहूं में औषधीय गुणों की भरमार होती है। इसके नियमित सेवन से डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और हड्डियों की समस्याओं में लाभ मिलता है। इसकी बाजार में भी काफी मांग है। यह सामान्य गेहूं की तुलना में तीन गुना ज्यादा कीमत में बिकता है।
अब शिवप्रसाद तिवाड़ी अन्य किसानों को काला गेहूं उगाने के लिए प्रेरित करते हैं। बीज उपलब्ध करवाते हैं। बुवाई व फसल कटाई तक की पूरी विधि भी बताते हैं।

Kale Gehun Ki Roti ke Fayde: पत्नी की सेहत में हुआ सुधार
अलवर के गांव सौंखरी में शिवप्रसाद तिवाड़ी के खेत में जब फसल तैयार हुई तो सबसे पहले इसका उपयोग उन्होंने अपने परिवार में किया। पत्नी को डेढ़ महीने तक नियमित रूप से काले गेहूं की रोटी खिलाई गई। नतीजा यह रहा कि उनकी डायबिटीज कंट्रोल में आ गई और ब्लड प्रेशर भी सामान्य हो गया।

काले गेहूं की खेती कैसे होती है?
शिवप्रसाद बताते हैं कि इसकी खेती की प्रक्रिया सामान्य गेहूं जैसी ही होती है, बस इसे थोड़ी ज्यादा नमी की आवश्यकता होती है। उन्होंने नवंबर के पहले सप्ताह में इसकी बुवाई की और फसल को तैयार होने तक पांच बार सिंचाई की। नमी बनाए रखने के लिए देसी उपाय अपनाए गए। इस दौरान किसी भी रासायनिक खाद या दवा का उपयोग नहीं किया गया। मार्च-अप्रैल तक फसल पककर तैयार हो गई थी।












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