Struggle Story: सिर्फ गंदे कपड़े धोकर IITian ने खड़ा किया अंपायर, आज 100 करोड़ का टर्नओवर
आईआईटीएन अरुणाभ सिन्हा ने कड़ी मेहनत और लगन के साथ अपने स्टार्टअप यूक्लीन को बुलंदियों तक पहुंचाया। समाज की तिरस्कार तो कभी भारी नुकसान झेलना भी पड़ा, लेकिन पैर नहीं डगमगाए।

'अपने सपनों और तमन्नाओं के पंख फैलाओ, चाहे लाख मुसीबतें रास्ता रोके, पर उम्मीदों के सहारे आगे बढ़ते जाओ।' एक कविता की यह पंक्तियां बिहार के अरुणाभ सिन्हा के लिए एकदम सटीक प्रतीत होती हैं। आईआईटीएन अरुणाभ सिन्हा ने कड़ी मेहनत और लगन के साथ अपने स्टार्टअप यूक्लीन को बुलंदियों तक पहुंचा दिया। इसमें साथ उनकी पत्नी व कंपनी की सह-संस्थापक गुंजन तनेजा ने दिया।
एक 10 से 6 की प्राइवेट नौकरी करने वाला इंजीनियर अचानक ही 93 शहरों में स्थित 323 स्टोर्स की चेन का संस्थापक बन गया। इस दौरान अरुणाभ को समाज की तिरस्कार तो कभी भारी नुकसान झेलना पड़ा। लेकिन, इसके बावजूद पैर नहीं डगमगाए। अपने बुलंद हौंसलों के बल पर आगे बढते रहे। आइए रूबरू कराते हैं आपको अरुणाभ सिन्हा से...
नौकरी छोड़ स्टार्टअप किया शुरू
मीडिया रिपोटस के मुताबिक, बिहार से मूल रूप से निवासी अरुणाभ सिन्हा झारखंड के जमशेदपुर के एक मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं। इन्होंने 2008 में IIT बॉम्बे से इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी की। इसके बाद एक निजी कंपनी में अच्छे पैकेज पर नौकरी की। लेकिन, कुछ कर दिखाने का उबाल नौकरी से दूर ले गया। साल 2011 में उन्होंने अपना पहला स्टार्टअप शुरू किया। परिस्थितियां कुछ असहज हुई तो 2015 में 4 साल पहले शुरू की गई कंपनी को बेच दिया। फिर, नौकरी की राह पकड़ ली। इस बार 1 करोड़ रुपए के सालाना पैकेज मिला।
साल 2016 में नौकरी छोड़ एक नए स्टार्टअप यूक्लीन कंपनी की नींव रखी। अरुणाभ सिन्हा बताते हैं कि एक होटल में नौकरी के दौरान उन्हें इस बात का इल्म हुआ कि लोगों के कपड़े ठीक से साफ नहीं होते हैं। ज्यादातर कपड़ों की धुलाई धोबी घाट में होती है। ऐसे में यूक्लीन ड्राई क्लीनिंग कंपनी की शुरुआत की।
स्टार्टअप खोलते ही हुआ 12 लाख का नुकसान
बताते हैं कि अरुणाभ सिन्हा के यूक्लीन ड्राई क्लीनिंग का आइडिया सभी को इंट्रेस्टिंग लगा। लेकिन, कोई भी इसमें निवेश करने को तैयार नहीं था। ऐसे में दिल्ली के एक ड्राई क्लीनिंग स्टोर के मालिक ने अरुणाभ के आइडिया पर भरोसा जताया और अपने 2 स्टोर्स उनके हवाले यूक्लीन में तब्दील करने को दे दिए। लेकिन, वसंत कुंज के स्टोर में अचानक आग लग गई। पहले ही महीने में अरुणाभ को 12 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।
फिर भी, अरुणाभ के हौंसलों को हिला नहीं सकी। इसके बाद अरुणाभ ने फ्रेंचाइजी मॉडल पर काम किया। जिसके तहत 5 लाख रुपए में फ्रेंचाइजी देनी शुरू की। जिसके बाद कारवां बढ़ता गया। वर्तमान में 93 शहरों में इसके 323 स्टोर हैं।
UClean प्रदान करता है ये सेवाएं
अरुणाभ सिन्हा बताते हैं कि इसके आउटलेट पूरी तरह से कपड़े धोने की मशीन, स्टीम आयरन टेबल और ड्राई-क्लीनिंग सेटअप से सुसज्जित हैं। एक पूरी तरह से प्रशिक्षित टीम दिन-प्रतिदिन के आधार पर स्टोर का संचालन और प्रबंधन करती है। किलो के हिसाब से लॉन्ड्री, ड्राई-क्लीनिंग, शू क्लीनिंग, बैग क्लीनिंग, सॉफ्ट टॉयज क्लीनिंग जैसी सफाई सेवाएं प्रदान करता है। कस्टमर घर से पिक-अप और डिलीवरी का लाभ उठा सकते हैं या वे अपना सामान छोड़ने के लिए स्टोर पर भी जा सकते हैं।
100 करोड़ रुपए का टर्नओवर
आपको बता दें कि यूक्लीन प्रति किलो कपड़े धोने के लिए 80-180 रुपए चार्ज करता है। महंगे कपड़ों पर 2000 रुपए। इसी तरह सिर्फ 6 साल में कंपनी ने 100 करोड़ रुपए का टर्नओवर बना लिया है।












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