OI Exclusive: सरपंच नीलेश देसाई ने 12वीं में 26 बार फेल होकर कैसे पूरी की PhD? इंटरव्यू में खुद किया खुलासा
यह अजब सरपंच की गजब कहानी है। बुलंद हौसलों की ऊंची उड़ान है। कभी हार नहीं मानने वाली जिद है। हम बात कर रहे हैं गुजरात के नवसारी जिले के गणदेवी तालुका की ग्राम पंचायत तलोध के नवनिर्वाचित सरपंच डॉ. नील सुमंत राय देसाई उर्फ नीलेश देसाई की, जिन्होंने 12वीं में 26 बार फेल होकर भी PhD की डिग्री हासिल कर ली। यह कमाल कैसे किया? इसका पूरा खुलासा उन्होंने हमारे साथ इंटरव्यू में किया है।
गुजरात के तलोध गांव के सरपंच नीलेश देसाई की प्रेरक कहानी से पहले तो यह जान लीजिए कि आज हम नीलेश देसाई के संघर्ष, मेहनत व कामयाबी की दिलचस्प कहानी का जिक्र क्यों कर रहे हैं? इसका जवाब गुजरात पंचायत चुनाव 2025 है। गुजरात की 8,326 ग्राम पंचायतों में 22 जून को मतदान हुआ और 25 जून को परिणाम आया है। 52 साल के नीलेश देसाई पहली बार सरपंच बने हैं।

सरपंच नीलेश देसाई का इंटरव्यू
वनइंडिया हिंदी से खास बातचीत में नीलेश देसाई ने बताया कि 7 हजार की आबादी वाली ग्राम पंचायत तलोध के 80 फीसदी मतदाताओं ने उनको वोट देकर सरपंच चुना है। नीलेश देसाई को कुल 2907 वोट मिले हैं। 2584 वोटों से जीते हैं। प्रतिद्वंदी प्रत्याशियों में शर्मा को 321 व कल्पेश को 78 वोट मिले। 300 वोट रद्द हुए हैं। रद्द हुए वोटों में से भी 270 नीलेश के पक्ष में थे।

सरपंच नीलेश देसाई की '5 एस' योजना
बतौर सरपंच नीलेश देसाई की प्राथमिकता '5 एस' योजना है, जिससे वे अपने गांव तलोध का कायाकल्प करेंगे। नीलेश देसाई की 'फाइव एस' योजना के मायने जानने से पहले इनके जीवन संघर्ष पर एक नजर जरूर डालनी चाहिए, क्योंकि नीलेश देसाई की गुजरात सरपंच सक्सेस स्टोरी उन लोगों के लिए प्रेरणादायी है, जो असफलताओं से हार मान जाते हैं और मेहनत करना छोड़ देते हैं।
नीलेश देसाई ने अभी तक नहीं की शादी
नीलेश देसाई का जन्म 23 दिसंबर 1973 को गांव तलोध में शिक्षक सुमंत राय देसाई व भारती बेन के घर हुआ। अभी तक शादी नहीं की है। नीलेश ने कक्षा 1 से 4 तक अपने गांव तलोध के राजकीय प्राथमिक स्कूल से पढ़ाई की। फिर पास के कस्बे बिलिमोरा स्थित एम एंड आर टाटा स्कूल में दाखिला लिया। वहां 12वीं तक की पढ़ाई की, मगर 12वीं अभी तक पास नहीं हुई।

ना मेंढ़क देख सका, ना 12वीं पास कर पाया
नीलेश देसाई कहते हैं कि "मैंने साल 1991 में 12वीं कक्षा में दाखिला लिया। उस वक्त बायोलॉजी या मैथ्स की पढ़ाई एक साथ होती थी। बायो में छात्रों को प्रैक्टिकल के दौरान जिंदा 'मेंढ़क' काटने पड़ते थे, जो मेरे बस की बात नहीं थी। मैं जीव हत्या के खिलाफ हूं। हिंसा जरा भी पसंद नहीं। इसी वजह से मैं बायो में फेल हो गया था।"
नीलेश देसाई अपनी 12वीं फेल की कहानी को आगे बढ़ाते हुए कहते हैं कि "एक साल बाद ही 1992 में पशु अधिकार कार्यकर्ता मेनका गांधी ने जानवरों के प्रति क्रूरता को रोकने के लिए पीपुल फॉर एनिमल्स की स्थापना की, जिसकी पहल पर सरकार ने साल 1994 में 12वीं में बायोलॉजी की पढ़ाई के दौरान जिंदा मेंढ़क काटने पर प्रतिबंध लगा दिया, लेकिन मैं 12वीं तब भी पास नहीं कर पाया।"
नीलेश देसाई एम एंड आर टाटा स्कूल से भर रहे 12वीं के फार्म
साल 1991 से लेकर 2025 तक नीलेश देसाई एम एंड आर टाटा स्कूल से ही कुल 26 बार 12वीं बोर्ड परीक्षा के फॉर्म भर चुके हैं। कभी बायो तो कभी अन्य विषय में फेल होते आ रहे हैं। साल 2026 में नीलेश देसाई 27वीं बार 12वीं की परीक्षा देंगे कि इस बार तो पास हो जाऊं। हालांकि नीलेश देसाई की जिंदगी में साल 1996 एक टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ।

दसवीं पास करने के बाद इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा
12वीं कक्षा पास करने की जद्दोजहद के बीच नीलेश देसाई ने 10वीं कक्षा उत्तीर्ण होने के आधार पर साल 1996 में राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज वलसाड में दाखिला लिया और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में 4 साल का डिप्लोमा किया। अगर 12वीं पास होते तो यह डिप्लोमा 4 की बजाय 3 साल में पूरा कर लेते। इसी डिप्लोमा ने नीलेश देसाई को न केवल रोजगार दिया, बल्कि पीएचडी की डिग्री तक की राह आसान की।
साल 2005 में डिप्लोमा के आधार पर कॉलेज की पढ़ाई
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा लेने के बाद नीलेश देसाई ने गुजरात विद्युत बोर्ड से सुपरवाइजर और वायर ठेकेदारी का लाइसेंस व एक्साइड इन्वर्टर बैटरी की डीलरशिप ली। अपना कामधंधा शुरू किया। साथ में 12वीं बोर्ड परीक्षा भी हर साल देते रहे, मगर कभी उत्तीर्ण नहीं हो सके। इस बीच साल 2005 में गुजरात की शिक्षानीति के उस नियम ने नीलेश की उच्च शिक्षा की राह खोल दी, जिसके तहत कोई डिप्लोमा धारक भी कॉलेज में दाखिला ले सकता है।
नीलेश कहते हैं कि, "मैंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग वाले डिप्लोमा के आधार पर साल 2005 में बिलिमोरा के वीएस पटेल कॉलेज के बीएससी केमेस्ट्री में प्रथम वर्ष में दाखिला लिया। 70 फीसदी के साथ बीएससी व 76 फीसदी अंक के साथ यहीं से साल 2010 में एमएससी केमेस्ट्री की डिग्री भी ली।"

नीलेश देसाई ने यू.के.ए. टारसडिया विश्वविद्यालय से पीएचडी की
इन्हीं के आधार पर यू.के.ए. टारसडिया विश्वविद्यालय बिलिमोरा नवसारी गुजरात में 2 जुलाई 2012 को केमेस्ट्री में पीएचडी के लिए दाखिला लिया। निदेशक किशोर आर देसाई के अंडर साल 2018 में PhD की डिग्री हासिल की, मगर 12वीं कक्षा तो अभी भी पास नहीं हो सकी है।
सरपंच नीलेश देसाई की 5 एस योजना के मायने
- स्वच्छता (साफ-सफाई)
- स्वास्थ्य (सभी के लिए बेहतर इलाज)
- शिक्षण (शिक्षा का विस्तार)
- सलील (जल संरक्षण)
- शिष्ट (सभ्य व्यवहार और सद्भाव)

5 एस योजना से कैसे बदलेगी तलोध की तकदीर?
नीलेश देसाई ने बताया कि वे सरपंच बनकर 5 एस योजना के तहत नया डिजाइन व ब्लू प्रिंट बनाकर नगर पालिका जाएंगे। अफसरों व जनप्रतिनिधियों से संवाद करके स्वच्छता की दिशा में उल्लेखनीय कार्य करेंगे। शिक्षा, शिष्टता व जल संरक्षण के लिए जागरूकता अभियान चलाएंगे।

सांसद-विधायक भी भाजपा से
नीलेश देसाई कहते हैं कि "हमारा गांव गणदेवी विधानसभा क्षेत्र में आता है। यहां से भाजपा के नरेश भाई पटेल हैं। वहीं, नवसारी से भाजपा के C. R. Patil (चंद्रकांत रघुनाथ पाटिल) सांसद हैं, जो केंद्र जलशक्ति मंत्री भी हैं। मैं खुद भी भाजपा की विचारधारा का शख्स हूं। ऐसे में कड़ी से कड़ी जोड़कर गांव तलोध का चहुंमुखी विकास करवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।"












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