UPSC Success Story: क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी के मामा ने MTech के बाद छोड़ी नौकरी, पहले ही प्रयास में जड़ा शतक!
Abhishek Chauhan UPSC Topper Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा सिविल सेवा परीक्षा (CSE) 2025 का अंतिम परिणाम घोषित होने के साथ बिहार के अभिषेक चौहान ने शानदार कमाल किया है। उन्होंने पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 102 हासिल कर परिवार और पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। खास बात यह कि अभिषेक चर्चित युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी के मामा हैं, जिनकी बल्लेबाजी ने हाल ही में सुर्खियां बटोरी हैं।
अभिषेक की यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत जीत है, बल्कि परिवार की शिक्षा और मेहनत की परंपरा का जीता-जागता प्रमाण है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है और लोगों की बधाइयों का सिलसिला लगातार जारी है। आइए आपको रूबर कराते हैं...

अभिषेक चौहान मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर जिले के महदीनगर प्रखंड स्थित राजा जान गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता प्रोफेसर अभय कुमार सिंह बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में प्राध्यापक हैं और फिलहाल नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी में रजिस्ट्रार के पद पर कार्यरत हैं। उनकी मां अनुराधा राजपूत गृहिणी हैं।
अभिषेक की शुरुआती पढ़ाई आरके मिशन स्कूल, पुरुलिया से हुई, जहां से उन्होंने दसवीं की परीक्षा पास की। इसके बाद उन्होंने हाजीपुर के गुरु वशिष्ठ स्कूल से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के दौरान ही वह हमेशा मेहनती और लक्ष्य के प्रति गंभीर छात्र के रूप में जाने जाते थे।
IIT से MTech के बाद नौकरी छोड़ी
स्कूल के बाद अभिषेक ने उच्च शिक्षा के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी IIT में दाखिला लिया। यहां से उन्होंने जियोलॉजी विषय में इंटीग्रेटेड MTech की डिग्री हासिल की।
पढ़ाई पूरी करने के बाद अभिषेक ने कुछ समय तक एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी भी की। हालांकि उनके मन में शुरू से ही सिविल सेवा में जाने का सपना था। इसी वजह से उन्होंने नौकरी छोड़कर पूरी तरह UPSC की तैयारी करने का फैसला लिया।
सेल्फ स्टडी से पहले प्रयास में क्रैक किया UPSC, AIR 102वीं रैंक
अभिषेक चौहान ने अपनी तैयारी मुख्य रूप से सेल्फ स्टडी के जरिए की। उन्होंने हाजीपुर में रहकर सीमित संसाधनों के बावजूद लगातार मेहनत की और अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखा। इंटरव्यू के समय उन्होंने कुछ विशेषज्ञों से मार्गदर्शन जरूर लिया, लेकिन तैयारी का बड़ा हिस्सा उन्होंने खुद ही किया।
उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में UPSC सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया 102वीं रैंक हासिल कर ली। इस उपलब्धि के बाद परिवार, रिश्तेदार और इलाके के लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं और उनकी सफलता पर गर्व महसूस कर रहे हैं।
अभिषेक चौहान की कहानी यह दिखाती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और उसके लिए लगातार मेहनत की जाए तो सफलता जरूर मिलती है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने जो मुकाम हासिल किया है, वह हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकता है।












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