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Relationship Tips: पार्टनर के धोखे ने तोड़ दिया है दिल? जख्म पर मरहम का काम करेंगे प्रेमानंद महाराज के ये बोल

Relationship Tips Premananda Maharaj: रिश्तों में या प्यार में कई बार अपेक्षाएं पूरी नहीं होती हैं। हम सबको जिंदगी में कभी न कभी लगता है कि हमें इस्तेमाल किया गया। बहुत से लोगों को प्रेम संबंध या कई बार तो शादी में भी अपने पार्टनर से धोखा मिलता है। बहुत से लोग धोखे से बुरी तरह से टूट जाते हैं। प्रेमानंद महाराज अपने प्रवचनों में कहते हैं कि इंसान को जन्मों से धोखा मिलता आया है। धोखा खाने के बाद धोखेबाज लोगों को हमें दिल से धन्यवाद देना चाहिए।

प्रेमानंद महाराज कहते हैं, सबसे बड़ा धोखेबाज हमारा मन होता है। वह बाहरी दुनिया को तो परखता है, लेकिन अपने मन का निरीक्षण कभी नहीं करता। हम ऑफिस के सहकर्मियों, परिवार वालों या समाज के लोगों पर संदेह कर लेते हैं। अपने मन की चालाकियों को पहचानना ही नहीं चाहते। आध्यात्मिक गुरु कहते हैं कि संबंधों में अपेक्षा या समान प्रेम की चाहत रखना भी मन का धोखा होता है।

Relationship Tips Premananda Maharaj

Premanand Maharaj की राय, 'मन को साधना सीखना चाहिए'

प्रेमानंद महाराज यह भी कहते हैं कि अगर जीवन में किसी ने हमें धोखा दिया है, तो उस घटना को दुख की तरह नहीं देखें। ऐसे धोखे को एक सीख की तरह स्वीकार करना चाहिए। जो व्यक्ति या परिस्थिति हमें छोड़कर चली गई, वह हमारे जीवन से इसलिए गई क्योंकि उसका समय पूरा हो चुका था। जो चला गया वह अच्छा ही हुआ। यह दृष्टिकोण अपनाने से मन हल्का होता है और जीवन में आगे बढ़ने की शक्ति मिलती है। यहां वह एक और बात पर जोर देते हैं कि संबंधों में अपेक्षाओं का दबाव नहीं होना चाहिए।

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दरअसल प्रेमानंद जी का मुख्य संदेश है कि अपनी अच्छाई का अभिमान कभी नहीं करना चाहिए। अच्छाई तब तक ही पवित्र है, जब तक उसमें अहंकार नहीं जुड़ा होता। जैसे ही कोई व्यक्ति अपनी अच्छाई का प्रदर्शन करने लगता है, अच्छाई गुण नहीं, बल्कि दिखावा बन जाती है।

Relationship Tips: धोके से सीख ले आगे बढ़ना चाहिए

- इसके साथ ही प्रेमानंद महाराज यह भी स्पष्ट करते हैं कि प्रेम कभी स्वार्थ बुद्धि से नहीं होना चाहिए। जहां स्वार्थ है, वहां प्रेम का अस्तित्व ही खत्म हो जाता है। प्रेम का अर्थ है त्याग और समर्पण।

- अगर हम किसी से केवल अपने लाभ के लिए प्रेम करें, तो वह संबंध धोखे और पीड़ा का कारण बनता है।

- जीवन की हर तकलीफ, हर धोखा और हर चोट हमें भीतर से मजबूत बनाने आती है। मन को समझकर और साधकर ही हम सच्चे अर्थों में शांत, संतुलित और प्रेमपूर्ण जीवन जी सकते हैं।

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