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Relationship Tips: कैसे पहचानें कि यह रिलेशन नहीं सिचुएशनशिप है? ये 3 संकेत बता देंगे रिश्ते का नेचर

Relationship Tips: आज के ज्यादातर युवाओं का कहना है कि वह अपने करियर और पर्सनल स्पेस पर फोकस करना चाहते हैं। सीरियस रिलेशनशिप से ज्यादातर युवा दूर भाग रहे हैं और शादी को भी नकार रहे हैं। पिछले कुछ सालों में कमिटेड रिलेशन के बजाय सिचुएशनशिप का ट्रेंड भी पहले से बढ़ा है। अब प्यार में बंधन की भूमिका कम होती जा रही है। सिचुएशनशिप रिश्ते का वह रूप होता है जिसमें साथ रहते हुए भी अपनी पर्सनल स्पेस को सुरक्षित रखा जा सकता है।

युवा पीढ़ी के लिए लिए प्यार सिर्फ़ किसी के साथ होना नहीं है, बल्कि अपनी स्पेस और निजता को सुरक्षित रखना भी है। इसी सोच से जन्म ली है एक नई रिलेशनशिप रियलिटी जिसे सिचुएशनशिप (Situationship) कहा जा रहा है। यह रिश्ते का ऐसा दौर होता है जहां न तो एक समर्पित रिश्ता है और न ही पूरी तरह से अकेलापन ही होता है। बस दो लोग एक भावनात्मक और कभी-कभी रोमांटिक कनेक्शन में होते हैं, लेकिन बिना किसी लेबल या कमिटमेंट के।

Relationship Tips

Situationship में होते हैं संबंध के कुछ दायरे

-कई बार कुछ युवा अपने ही रिश्ते को समझने में कनफ्यूज हो जाते हैं। उन्हें पता नहीं चलता है कि यह रिलेशनशिप है या सिचुएशनशिप? आइए समझते हैं कि दोनों के बीच दायरे में क्या फर्क होता है और कैसे इसकी पहचान कर सकते हैं।

-सिचुएशनशिप का मतलब होता है 'we vibe, but we don't define' हिंदी में कहें, तो इसका मतलब है कि वाइब्स मैच करती हैं, लेकिन हम किसी बंधन में नहीं रहना चाहते और न इसे नाम देना चाहते हैं।

यह भी पढ़ें: Relationship Tips: सगाई होने के बाद पार्टनर को इन बातों का रखना चाहिए ध्यान, वरना टूट सकता है रिश्ता

- Gen-Z के लिए ये रिश्ता आज़ादी का प्रतीक भी है और कभी-कभी भावनात्मक उलझन का कारण भी। कई युवाओं के मुताबिक, आज की तेज़-रफ्तार ज़िंदगी में किसी को पूरी तरह कमिट करना मुश्किल है।

-करियर, पर्सनल गोल्स और मेंटल हेल्थ सबके बीच अपेक्षाओं के दबाव से मुक्त रिलेशन एक आसान रास्ता लगता है। अगर आपका पार्टनर रिश्ते को इसी रूप में देखता है, तो इसका मतलब है कि यह सिचुएशनशिप है।

Relationship Tips: रिश्ते में जरूर तय करें अपने दायरे

इस तरह के रिश्तों का दूसरा पहलू भी है। जब भावनाएं गहरी हो जाती हैं और कई बार साथ रहते हुए एक-दूसरे से अपेक्षाएं भी होने लगती हैं। अगर एक रिश्ते में दोनों पार्टनर सेम पेज पर न हों, तो मुश्किल होने लगती है। असमंजस बढ़ने लगता है और फिर शिकायतों का दौर शुरू हो जाता है। इसलिए, बेहतर है कि पार्टनर आपस में संवाद करें और अपने रिश्ते के दायरे पहले ही समझ लें। तकरार की स्थिति में भी बातचीत के जरिए एक सही समाधान तक पहुंचने की कोशिश करनी चाहिए।

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