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Pitru Paksha 2025: पितृपक्ष में इन 6 चीजों को करने से बचें, जीवन में ऐसे लाए शांति और धैर्य

Pitru Paksha 2025: पितृपक्ष हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे पितृ अमावस्या से लेकर महालया तक मनाया जाता है। ये समय पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए माना जाता है। इस विशेष अवधि में पितरों की तर्पण (श्राद्ध), पिंडदान और दान पुण्य के जरिए उनके प्रति श्रद्धा अर्पित की जाती है।

पितृपक्ष में इन कार्यों को करने से करें परहेज
मान्यता है कि इस दौरान किए गए अच्छे कर्म पूर्वजों को मोक्ष दिलाने में सहायक होते हैं। लेकिन धार्मिक शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार पितृपक्ष में कुछ विशेष कार्यों से परहेज करना चाहिए, ताकि ये पुण्यवान शुद्ध और सफल बना रहे।

Pitru Paksha 2025

पितृपक्ष पर पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करें

-पितृपक्ष एक पवित्र पर्व है, जिसका उद्देश्य पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करना और उनकी आत्मा को शांति प्रदान करना है। इस समय किए जाने वाले कर्म विशेष महत्व रखते हैं। यदि हम इन परंपराओं का ध्यान रखें और अनुशासन से चलते हैं, तो ये पावन समय हमारे जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लेकर आता है।

-इससे पूर्वजों की आत्मा को सुकून मिलता है और हमारे जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है। आइए जानते हैं पितृपक्ष में किन-किन बातों से बचना चाहिए।

पितृपक्ष में गलती से भी न करें ये 6 काम

1. घर की सफाई न करें

पितृपक्ष में घर की सफाई करने की सलाह नहीं दी जाती। मान्यता के अनुसार इस समय घर में सफाई करने से घर की पॉजिटिव एनर्जी और पितृ शक्ति का ध्यान भटकता है। इसलिए शास्त्रों में कहा गया है कि इस समय घर को सामान्य रूप से व्यवस्थित रखें, लेकिन भारी साफ-सफाई, दीवारें रंगना, दीवार की पेंटिंग और जमीन को बड़े पैमाने पर धोने से बचें। ऐसा करना शुभ नहीं माना जाता है।

2. नए काम की शुरुआत न करें

पितृपक्ष में नए काम की शुरुआत जैसे व्यापार में नया अनुबंध करना, नए घर का निर्माण शुरू करना, नए वाहन की खरीदारी करना, शादी समारोह आयोजित करना उचित नहीं माना जाता। ये समय केवल अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए समर्पित होता है। नए कार्यों की शुरुआत से परिवार में अशांति और बाधाएं आ सकती हैं। इसलिए ये पर्व मानसिक शांति और आध्यात्मिक समर्पण का समय होता है।

3. यात्रा पर न जाएं

पितृपक्ष के दौरान लंबी यात्रा या तीर्थ यात्रा पर जाने से बचने की सलाह दी जाती है। खासतौर पर धार्मिक कर्मकांड से जुड़ी तीर्थ यात्राएं इस समय टाल देनी चाहिए। माना जाता है कि इस अवधि में यात्रा करने से पितृ दोष बढ़ता है। यदि कोई जरूरी कार्य न हो तो यात्रा करने से परहेज करें। इस समय अपने घर पर पितृ तर्पण और अन्य श्राद्ध कर्म करने पर ध्यान दें।

4. पार्टी करने से बचें

पितृपक्ष में सामाजिक आयोजनों, शादी, जन्मदिन या अन्य उत्सव आयोजित करने की परंपरा नहीं है। ये समय अधिकतर ध्यान, तर्पण, पिंडदान, दान पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों में व्यतीत करना चाहिए। भोग-विलास, पार्टी या बड़े सामाजिक समारोह इस समय वर्जित हैं। ये ध्यान रखें कि पितृपक्ष का उद्देश्य पितरों को संतुष्ट करना है, इसलिए अधिक आनंद-पर्यटन से बचें।

5. झगड़े और विवाद न करें

इस पवित्र समय में स्वभाव शांत और संयमित रखना अत्यंत आवश्यक होता है। किसी से झगड़ा करना, बुरा बोलना या मन-मुटाव रखना अनुचित माना जाता है। पितृपक्ष का मुख्य उद्देश्य पितरों के प्रति श्रद्धा अर्पित करना और उनके सुख-शांति के लिए प्रार्थना करना होता है। इसलिए इस दौरान गुस्सा, बुराई और नेगेटिविटी से दूर रहें। परिवार में सौहार्द बनाए रखें और सकारात्मक विचार रखें।

6. अनावश्यक शारीरिक क्रियाएं न करें

शास्त्रों में ये भी कहा गया है कि पितृपक्ष के दौरान अनावश्यक शारीरिक सुख-साधनों में लिप्त नहीं होना चाहिए। विशेष रूप से विवाह या अन्य कामुक क्रियाओं से बचना चाहिए। इस समय शरीर और मन को संयमित रखते हुए आध्यात्मिक क्रियाओं में लीन रहना चाहिए। ध्यान और पूजा पर ज्यादा फोकस करें, ताकि आत्मा को शांति प्राप्त हो।

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