Jitiya Vrat 2025: जितिया व्रत पर पांव में बनाएं आलता के ये डिजाइन, हर कोई देखकर करेगा दिल खोलकर तारीफ
Jitiya Vrat Alta Design: जितिया व्रत संतान के लिए रखा जाता है और इस दिन महिलाएं दिन भर निर्जला उपवास करती हैं और फिर अगले दिन पारन होता है। व्रत के दिन कथा पढ़ी जाती है और सुहागन महिलाएं श्रृंगार कर अपनी संतान की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती हैं। खास तौर पर यह व्रत बिहार और पूर्वांचल के इलाके में मनाया जाता है। इस दिन सुहागन महिलाएं अपने पैरों को आलता से रंगती हैं, तो अगर आप भी व्रत रख रही हैं तो अपने लिए सुंदर सा आलता का डिजाइन पहले ही तय कर लें।
जितिया व्रत को जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि माताएं पूरी श्रद्धा से यह व्रत रखें, तो उनकी संतान को लंबी उम्र मिलती है और दुख-दर्द दूर होते हैं। इस व्रत के दिन महिलाएं पैरों में महावर या आलता लगाती हैं। आपके लिए हम कई सुंदर आलता डिजाइन लेकर आए हैं जिनमें से अपनी पसंद के मुताबिक का डिजाइन चुन सकते हैं।

Jitiya Vrat Alta Design: सुंदर डिजाइन से सजाएं पैरों को
पैरों में आलता लगाने का विशेष महत्व है। सुहागन औरतों के लिए तय किए गए 16 श्रृंगार में आलता को भी प्रमुखता से रखा गया है। आम तौर पर आलता का प्रचलन बिहार, बंगाल, पूर्वी उत्तर प्रदेश में ज्यादा है, लेकिन अब यह देश के दूसरे राज्यों तक भी पहुंच गया है।

जितिया व्रत के दिन आप सिंपल डिजाइन का भी आलता लगा सकती हैं और अगर आपके पास समय और संसाधन है, तो अपनी पसंद का डिजाइन भी बनवा सकती हैं। आलता पैरों के लिए सिर्फ श्रृंगार भर नहीं है, यह सुहाग की निशानी भी है।
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Jitiya Vrat कब है और कैसे करें तैयारी
इस साल शनिवार 13 सितंबर को जितिया व्रत का नहाय खाए है। इसके अगले दिन महिलाएं अपनी संतान के लिए ये व्रत रखेंगी और उसके अगले दिन सुबह व्रत का पारन होगा। नहाए खाए वाले दिन अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग चीजें खाने की मान्यता है। कुछ महिलाएं इस दिन रागी का हलवा खाती हैं, तो कुछ रागी के आटे की बनी रोटी खाती हैं। कुछ जगहों पर इस दिन साग खाने की परंपरा है।
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