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Jitiya 2025 : 24 घंटे का निरजला व्रत प्रारंभ, जानिए महत्व और पूजा-विधि

Jitiya 2025 Aaj Hai : संतान की लंबी आयु के लिए रखे जाना वाला जितिया व्रत (जिउतिया) पूर्वी भारत में काफी लोकप्रिय है। ये उपवास कठिनतम व्रत में से एक है। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आने वाला ये व्रत विशेषकर बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है।

इस बार ये व्रत 13 सितंबर शनिवार को नहाय-खाय से प्रारंभ हुआ और आज से 24 घंटे का निरजला व्रत प्रारंभ हो गया है।

Jitiya 2025 Kab Hai
  • नहाय-खाय 13 सितंबर को
  • अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 14 सितंबर 8:51 AM से प्रारंभ
  • अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 15 सितबंर 5:36 AM पर खत्म
  • ओठगन रविवार को सूर्योदय से पहले
  • पारण 15 सितंबर को 6:27 AM

जितिया व्रत का महत्व ( Jitiya 2025)

  • यह व्रत माताएं निर्जला उपवास रखकर करती हैं।
  • इसका फल संतान को दीर्घायु, बल और ऐश्वर्य प्रदान करता है।
  • माताओं के लिए यह व्रत त्याग, श्रद्धा और तप का प्रतीक है।


Jitiya 2025 व्रत की पूजन विधि

  • व्रत की शुरुआत सप्तमी तिथि को नहाय-खाय से होती है।
  • इस दिन मडुआ की रोटी और नोनी की साग खाया जाता है।
  • इसके साथ ही दही और पोहा (चूड़ा) भी खाया जाता है।
  • अष्टमी तिथि पर व्रत निर्जला उपवास के रूप में रखा जाता है।
  • प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान जीमूतवाहन, भगवान विष्णु का ध्यान करें।
  • पूजा स्थल पर मिट्टी का छोटा-सा प्रतिमा स्वरूप या चित्र स्थापित कर उसका पूजन करें।
  • दीपक जलाएं और फल-फूल, पुष्प, धूप, अगरबत्ती अर्पित करें।
  • संतान की सुख-समृद्धि और दीर्घायु के लिए प्रार्थना करें।
  • व्रत का समापन नवमी तिथि को पारण के साथ किया जाता है।

जितिया व्रत में क्या करें (Do's)

  • व्रत के दिन सत्य, संयम और शुद्ध आचरण बनाए रखें।
  • पूजा करते समय संकल्प अवश्य लें कि यह व्रत संतान की रक्षा हेतु किया जा रहा है।
  • स्नान और पूजन गंगा जल या स्वच्छ जल से करें।
  • दिनभर भगवान का ध्यान करें और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें।
  • व्रत के पारण में सात्विक भोजन ग्रहण करें।

जितिया व्रत में क्या न करें (Don'ts)

  • व्रत के दौरान अशुद्ध या अपवित्र वस्त्र धारण न करें।
  • किसी भी प्रकार का मांसाहार, मदिरा या तामसिक भोजन न करें।
  • दिनभर में झगड़ा, क्रोध, चुगली, और अपशब्द बोलने से बचें।
  • व्रत के समय जल का भी सेवन वर्जित है, अतः नियम भंग न करें।

Disclaimer: इस आलेख का मतलब किसी भी तरह का अंधविश्वास पैदा करना नहीं है। यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार की राय जरूर लें।

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