जब संता ने दवाई के बारे में डॉक्टर के सामने खोला राज

महिला मरीज - डाक्टर साहब, मरने के बाद मैं

अपना दिमाग दान करना चाहती हूं।

डाक्टर - ठीक है, होगा तो ले लेंगे!
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पिंकी (रश्मि से) - जब भी मैं तुम्हारे घर खाना खाती हूं, तुम्हारा कुत्ता मेरे खाने

को घूर-घूर कर कर क्यों देखता है?

रश्मि (पिंकी से) - क्योंकि कुत्ता अपनी प्लेट पहचानता है।
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विजय (डाक्टर से)- डाक्टर साहब सुना है मरीज लाने वाले को कमीशन देते हैं।
डाक्टर (विजय से)- हां ये बात सही है, मरीज कहां है?
विजय (डाक्टर से)- जी मैं ही हूं।
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डॉक्टर (संता से)- तबीयत कैसे है अब?
संता (डॉक्टर से)- पहले से ज्यादा खराब है।
डॉक्टर- दवाई खा ली थी क्या?
संता - नही दवाई की शीशी तो भरी हुई थी।
डॉक्टर- मेरा मतलब है दवा ले ली थी?
संता - जी आपने दी तो मैंने ले ली थी।
डॉक्टर- बेवकूफ दवाई पी ली थी?
संता - नही जी दवाई तो लाल थी?
डॉक्टर- अबे गधे दवाई को पी लिया था?
संता - नही साहब पीलिया तो मुझे था।
डॉक्टर- अरे दवा को मुंह से लगाकर पेट में डाला था।
संता - नही
डॉक्टर- क्यूं
संता - आपने ही तो कहा था शीशी को ढक्कन लगाकर रखना।
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