संता ने पूछा हम आराम कब करेंगे
एक शिक्षक का प्रयोग
एक बार एक शिक्षक कक्षा में बच्चों को मनोविज्ञान का प्रयोग करके दिखा रहा होता है! प्रयोग की शुरुआत मैं वह एक चूहा लेता है और उसके एक तरफ केक और दूसरी तरफ एक चुहिया रख देता है, और बच्चों से कहता है;
शिक्षक: बच्चों अब ध्यान से देखिएगा की यह चूहा केक की तरफ जाता है या चुहिया की तरफ?
जैसे ही शिक्षक की बात ख़त्म होती है चूहा केक की तरफ जाता है और केक खा लेता है, उसके बाद शिक्षक फिर वही प्रयोग दोहराता है और केक की जगह रोटी रख देता है!
इस बार फिर चूहा चुहिया की तरफ ना जा कर रोटी की तरफ जाता है और रोटी खाने लगता है, यह देख शिक्षक बच्चों से कहता है;
शिक्षक: देखा बच्चों दोनों बार चूहा खाने की तरफ गया, तो इसका यह अभिप्राय है कि भूख ही सबसे बड़ी अभिप्रेरणा होती है!
शिक्षक की बात सुन कक्षा में बैठा हुआ एक बच्चा उठा और शिक्षक से बोला;
बच्चा: मास्टर जी आप ने दो बार खाने की चीजें बदली और दोनों ही बार चूहा खाने तरफ गया, एक बार ज़रा चुहिया भी बदल कर देख लेते!
संता की मां
फ़ौज की ट्रेनिंग के दौरान मेजर ने संता से पूछा;
मेजर: यह हाथ में क्या है?
संता: सर ये बंदूक है!
मेजर: ये बंदूक नहीं, हमारी इज्जत और शान है, तुम्हारी मां है!
उसके बाद ऑफिसर दूसरे सैनिक बंता के पास गया उससे भी वही सवाल पूछा;
मेजर: यह हाथ में क्या है?
बंता: सर ये संता की मां है, और हमारी आंटी है!
संता को मिला
एक बार संता और बंता बगीचे में बैठे हुए होते हैं, कि तभी संता बंता से कहता है;
संता: यार आखिर जिंदगी में हम आराम कब करेंगे?
बंता: क्यों क्या हुआ?
संता: होना क्या है, जब दसवीं में थे तो पापा कहते थे बेटा बस इस साल मेहनत कर ले, फिर सारी जिंदगी आराम करना, फिर 11वीं में कहते थे, बेटा दो साल ठीक से पढ़ ले, फिर आराम से रहना, फिर इंजीनियरिंग में कहते थे, बेटा, बस डिग्री अच्छी तरह पूरी कर ले, फिर आराम रहेगा और अब डिग्री लेने के बाद कहते हैं, नालायक, यहां पड़ा-पड़ा आराम कर रहा है, काम पर कौन जाएगा!












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