मिनमिन की शायरी
एक बार मिनमिन अपने दोस्तों के बीच बैठा था, तभी अचानक शायरियों का दौर छिड़ गया। एक-एक कर सभी ने शायरियां सुनायीं, जब मिनमिन का नंबर आया तो शायरियां कुछ इस प्रकार थीं-
आज कल की लड़कियों का हौंसला देखते हुए एक शेर अर्ज किया है
गौर फरमाइयेगा
वक्त कहता है मुझे गवा मत
दिल कहता है मुझे लगा मत
प्यार कहता है मुझे आज़मा मत
और आजकल की गर्लफ्रेंड कहती हैं
जो करना है कर ले जानम, घबरा मत।
# बात अगर गर्लफ्रेंड की चली है तो मैं सिर्फ इतना ही कहूंगा
सवाल लाख टके का है
दामन किसका थामा जाये?
जो खुशी दे
या फिर
खुशी-खुशी दे दे।
# शायरियों की इस महफिल में एक दोहा भी सुनाना चाहूंगा
चीमन दास चढ़ गये पेड़ पर
लिंग देई लटकाये
जीका-जीका जरूरत हो
काट-काट ले जाये।












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