मुन्नाभाई पास या फेल!

मुन्नाभाई- यार सर्किट ये कहां का इंसाफ है। एक तो साल भर पढ़ाई करुं, कॉलेज की फीस दूं, आने जाने पर खर्च करूं और जब पास हो जाऊं तो मिठाई भी बांटू...
सर्किट- भाई इससे तो अच्छा तू फेल हो जा, मिठाई का पैसा बचेगा।
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पोस्टमैन (सर्किट से)- साहब मुन्नाभाई की चिठ्ठी देने मैं पांच मील दूर से चलकर आया हूं।
सर्किट- अरे भाई की चिठ्ठी देने इतनी दूर से! इससे अच्छा तो पोस्ट ही कर देते।
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मुकेश की पत्नी उसकी शराब पीने और जुआ खेलने की आदत से काफी परेशान थी। एक रोज दोनों बाजार से गुजर रहे थे कि तभी एक भिखारी उनके पास आया और एक रुपया मांगने लगा।
मुकेश- क्या तुम जुआ खेलते हो, शराब पीते हो?
भिखारी- जी नहीं साहब।
मुकेश- (अपनी पत्नी की ओर देखते हुए)- देखा जो लोग सिगरेट शराब नहीं पीते और जुआ नहीं खेलते हैं उनकी यही हालत होती है।












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