क्या कुत्तों पर सिगरेट का परीक्षण कर रही हैं कंपनियां, 8 घंटे लगातार सुंघाया जाता है जहरीला धुआं?
नई दिल्ली, 16 नवंबर। दशकों से वैज्ञानिक अपने शोध के लिए जानवरों पर परीक्षण करते आ रहे हैं, हालांकि अब इसमें काफी कमी आई है। बेजुबान जानवरों पर किए जा रहे परीक्षण को लेकर अब लोग जागरूक हैं और इसका विरोध करते हैं। हालांकि कई बार ऐसे दावे भी सामने आते रहे हैं जहां मासूम जानवरों पर दर्दनाक परीक्षण किए जाने की बात कही जाती है। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसा ही पोस्ट वायरल हो रहा है।

सिगरेट पीना सेहत के लिए हानिकारक
सिगरेट पीना (स्मोकिंग) सेहत की हानिकारक है ये तो हम सभी जानते हैं। इससे फेफड़े खराब होना, आंखों की रोशनी कम होना, पुरुषों में नपुंसकता, बांझपन के अलावा कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी होने का भी खतरा होता है। ये सब जानते हुए भी वर्तमान में कंपनियां इस जहर को बना रही हैं और सरकारें इसकी इजाजत देती है। हाल में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट सामने आई है जो सिगरेट परीक्षण से जुड़ी है।

सिगरेट कंपनियां कर रही कुत्तों पर परीक्षण
पोस्ट में दावा किया गया है कि सिगरेट निर्माता कंपनियां आज भी परीक्षण के लिए कुत्तों समेत अन्य मासूम जानवरों को धूम्रपान करने के लिए मजबूर करती हैं। 'कर्मगावा' नाम के इंस्टाग्राम आईडी के एक पोस्ट में दावा किया गया कि लगभग सभी ब्रांडों के तंबाकू का जानवरों पर परीक्षण किया जाता है। इनमें बिल्लियाँ, कुत्ते, हम्सटर, भारतीय सूअर, खरगोश और बंदर शामिल है। इन जानवरों को प्रति दिन 6 से 10 घंटे के बीच धूम्रपान करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

5 से 7 दिन सुंघाया जाता है जहरीला धुआं
पोस्ट में आगे कहा गया है कि कभी-कभी प्रति सप्ताह 5 से 7 दिन इन्हें ये जगर सूंघना पड़ता है। इस तरह के प्रयोग के लिए कई तरह की विधि की जाती है। जानवरों के मुंह में ट्यूब लगाकर बांध दी जाती है और उसके जरिए लगातार सिगरेट का धुआं सुंघाया जाता है। इसके अलावा त्वचा के ट्यूमर के परीक्षण के लिए उनके शरीर पर सिगरेट की राख लगाई जाती है। वहीं, तंबाकू के प्रभावों का अध्ययन करने के लिए जानवरों के सिर में उपकरण लगाए जाते हैं।

जानवरों के साथ अत्याचार
पोस्ट के मुताबिक बड़ी मात्रा में सिगरेट के धुएं में सांस लेने के लिए एक पाइप को उनके गले में छेद कर के फिट कर दिया जाता है। जानवरों पर यह अत्याचार दर्दनाक और घिनौना है इसलिए रोकने के लिए हम सभी को मिलकर काम करना चाहिए। लोगों से अपील की गई है कि वह ज्यादा से ज्यादा इस पोस्ट को अपने अनुयायियों, दोस्तों और परिवार, मशहूर हस्तियों और समाचार मीडिया के साथ शेयर करें, जिससे इस क्रूरता को रोका जा सके।

पोस्ट में लोगों से की गई ये अपील
इसके अलावा पोस्ट में यह भी कहा गया है कि इसे उन लोगों के साथ भी साझा करें जो धूम्रपान करता हो या छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी इस आदत की वजह से जानवरों के साथ इस क्रूरता को अंजाम दिया जाता है। पोस्ट में कहा गया है, आप यूएस एफडीए को [email protected] पर ईमेल भी कर सकते हैं और अनुरोध कर सकते हैं कि वे जानवरों पर तंबाकू उत्पाद और संघटक परीक्षणों पर प्रतिबंध लगा दें।

2016 में भी सामने आई थी ऐसी तस्वीर
सोशल मीडिया पर इस पोस्ट के अलावा पशु-अधिकार संगठन 'पेटा' की वेबसाइट पर भी उसी फोटो के साथ एक आर्टिकल शेयर किया गया है। हालांकि वनइंडिया 'फैक्ट चेक' ने जब पोस्ट की जांच की तो फोटो कुत्तों पर परीक्षण से संबंधित निकली। फोटो की सच्चाई की तलाश में हम एक जर्मन वेबसाइट 'मिमिकामा' पर पहुंचे जहां इसे लेकर साल 2016 में एक आर्टिकल छापा गया था। उसके मुताबिक 2016 में भी ऐसे ही दावों के साथ फेसबुक पर पोस्ट किया गया था।

70 के दशक में हुआ था ऐसे परीक्षण का खुलासा
दरअसल, यह सच है कि सिगरेट कंपनियां कुत्तों पर परीक्षण करती थीं लेकिन यह 1970 के दशक में होता था। उस समय पत्रकार मैरी बेथ ने कर्मचारी बन सिगरेट निर्माता कंपनी 'इंपीरियल केमिकल इंडस्ट्रीज' में छानबीन की थी और मास्क पहने कुत्तों की तस्वीर ली थी। उन्होंने अपने आर्टिकल में बताया कि कंपनी में कुछ कुत्तों को एक दिन में 30 सिगरेट तक धूम्रपान करना पड़ता था। एनिमल वेलफेयर एक्ट (टियरस्चजी) के अनुसार तंबाकू उत्पादों बनाने के काम में पशुओं को शामिल करने अपराध है।

निष्कर्ष
एक वेबसाइट 'डॉक्टर्स अगेंस्ट एनिमल एक्सपेरिमेंट्स' के मुताबिक तंबाकू उत्पादों को विकसित करने के इन प्रयासों को लंबे समय से कानून द्वारा प्रतिबंधित किया गया है। हालांकि, कथित रूप से 'मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा' के लिए जानवरों को सिगरेट के धुएं के संपर्क में लाया जाता है। चाहे वह कुत्तों के बारे में हो या अन्य जानवरों के बारे में, यह सच है कि कई जगह जानवरों पर परीक्षण किया जा रहा है। हलांकि ऐसे प्रयास किए गए हैं कि जानवरों पर अत्याचार और उनकी जान को खतरा ना हो। वर्तमान में सिर्फ चूहों या सूअर पर ही वैज्ञानिक परीक्षण किया जाता है।
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Fact Check
दावा
कुत्तों पर सिगरेट का परीक्षण कर रही हैं कंपनियां।
नतीजा
1970 के दशक में होता था ऐसा, आज भी कहीं-कहीं जानवरों पर होते हैं अलग-अलग परीक्षण।












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