Success Story: ट्विंकल और विरेंद्र की सिगरेट के फ़िल्टर से बदल गई ज़िंदगी, इस तरह हो रही लाखों की कमाई

सिगरेट के फेंके गए टुकड़े को रिसाइकल कर ट्विंकल और उनके पार्टनर विरेंद्र कुमार ने नए उद्योग की स्थापना की है। उन्होंने यूट्यूब से यह तकनीक सीखी और फिर ट्राइसिटी में अपना काम शुरू कर दिया।

चंडीगढ़, सितंबर 20, 2021। सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है ये सभी लोग जानते हैं लेकिन वैधानिक चेतावनी लिखे होने के बावजूद स्मोकर सिगरेट पीना नहीं छोड़ते हैं। इसी को देखते हुए पंजाब मोहाली के रहने वाले ट्विंकल ने आपदा को अवसर में बदलने की शानदार मिसाल पेश की है। सिगरेट के फेंके गए टुकड़े को रिसाइकल कर ट्विंकल और उनके पार्टनर विरेंद्र कुमार ने नए उद्योग की स्थापना की है। उन्होंने यूट्यूब से यह तकनीक सीखी और फिर ट्राइसिटी में अपना काम शुरू कर दिया। उन्होंने क़रीब 30 लोगों को इस उद्योग के ज़रिए रोज़गार दिया है। इससे ट्विंकल और विरेंद्र अच्छी खासी कमाई कर रहे हैं।

शुरुआत में दोस्तों ने उड़ाया मज़ाक

शुरुआत में दोस्तों ने उड़ाया मज़ाक

वन इंडिया हिंदी से बात करते हुए ट्विंकल ने बताया कि उनकी फिल्म बनाने की कंपनी भी है। मार्च में लॉकडाउन लगने की वजह से उनका काम बंद हो गया, आमदनी का कोई ज़रिया नहीं था। एक दिन उन्होंने यूट्यूब पर सिगरेट को रिसाइकल करने का वीडियो देखा जिससे उन्हें प्रेरणा मिली और अपने दोस्तों से यह बात शेयर की। दोस्तों ने उनका मज़ाक उड़ाते हुए उनकी बात गंभीरता से नहीं सुनी। इसके बाद उन्होंने अपने पिता और जीजा से मदद मांगी और काम शुरू कर दिया। इस काम को शुरू करने से पहले उन्होंने पूरी जानकारी इकट्ठा की और फिर क़दम आगे बढाया। सबसे पहले उन्होंने सिगरेट, तंबाकू की दुकान पर अपने बॉक्स लगाए, जिसमें लोग सिगरेट पीकर बचा हुआ हिस्सा डालने लगे। पहले तो काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा बाद में काम आसान होता चला गया

सिगरेट के फ़िल्टर को करते हैं रिसाइकल

सिगरेट के फ़िल्टर को करते हैं रिसाइकल

ट्विंकल ने अपने दोस्त वीरेंद्र कुमार को बिज़नेस पार्टनर बनाया और डेराबस्सी में अपने गोदाम में बॉक्स बनाने और सिगरेट के फ़िल्टर को रिसाइकलिंग का काम करना शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि उत्तर भारत में एक ही व्यक्ति इस काम को करता है। उसकी में छोटी सी फैक्टरी नोएडा में है। ट्विंकल ने उनसे मुलाक़ात कर सिगरेट के फिल्टर से काग़ज़ से अलग करने और प्लास्टिक नुमा रूई निकालने की ट्रेनिंग ली। इस बिज़नेस को शुरू करने के लिए उन्होंने अपनी सारी बचत पूंजी लगाते हुए पंचकूला से बिजनेस की शुरुआत की और धीरे-धीरे चंडीगढ़ और मोहाली की छोटी बड़ी सभी सिगरेट बेचने वाली दुकानों में अपने बॉक्स लगाए। लोग सिगरेट पीकर बचा हुआ हिस्सा इसमें फेंकने लगे। बॉक्स से सिगरेट बड को इकट्ठा करने के लिए दो लड़कों को रखा। सिगरेट के बड्स को साफ करने का काम महिलाओं को दिया। ये महिलाएं आज इनसे तीन से चार हजार रुपये महीना कमा रही हैं। ट्विंकल ने बताया कि उन्हें इस काम को करते डेढ़ साल से ज्यादा का वक्त बीत चुका है।

800 बॉक्स ट्राइसिटी में लगे हैं

800 बॉक्स ट्राइसिटी में लगे हैं

ट्विंकल ने बताया कि सिगरेट के पिछले हिस्से में प्लास्टिक की रूई होती है। इसे चार हिस्सों में अलग करते हैं। सिगरेट बड के पिछले हिस्से के केमिकल को साफ करने में पंद्रह दिन का समय लगता है। इसे नोएडा भेजा जाता है। फिल्टर होने के बाद इसमें से 98 प्रतिशत केमिकल निकाल दिया जाता है और साफ हुई रूई को तकिये, टेडी बियर, सोफे के गद्दे, जूडो बॉक्स आदि में इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने बताया कि एक आधी जली सिगरेट से काग़ज़, राख और तंबाकू हमारे पास बच जाता है। जिसके क़ागज़ को मच्छर भगाने के लिए जलाए जाने वाले पेपर में इस्तेमाल किया जाता है। जबकि राख और तंबाकू खाद बनाने के काम में इस्तेमाल किया जात है। ट्विंकल ने बताया कि आज की तारीख़ में ट्राइसिटी में उनके 800 बॉक्स लगे हुए हैं। हर रोज़ अलग-अलग क्षेत्र में जाकर बॉक्स से फिल्टर इकट्ठा करने के लिए कुछ लोगों को काम पर रखा हुआ है। वह फ़िल्टर कलेक्ट कर के लाते हैं जिन्हें महिलाओं द्वारा रिसाइकल किया जाता है।

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