AIIMS के निदेशक रणदीप गुलेरिया बोले- कच्चे भोजन के सेवन से ब्लैक फंगस होने की खबर गलत
नई दिल्ली, 21 मई। कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बीच अब ब्लैक फंगस (म्यूकोरमाइसिस) को लेकर भी लोग आतंकित हैं। सोशल मीडिया पर ब्लैक फंगस के लक्षण और वजह को लेकर कई तरह के पोस्ट शेयर किए जा रहे हैं जिनमें से कुछ भ्रमित करने वाले पोस्ट भी लोगों को बीच सर्कुलेट हो रहे हैं। विभिन्न मीडिया प्लेटफार्मों पर प्रसारित कुछ रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि कच्चा भोजन के सेवन से लोगों में ब्लैक फंगस का संक्रमण हो रहा है। हालांकि यह दावा पूरी तरह झूठा है, दिल्ली एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने खुद इन रिपोर्ट्स को खारिज किया है।
Recommended Video

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान - एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने शुक्रवार को कहा कि ब्लैक फंगस को लेकर कई गलत संदेश चल रहे हैं कि यह कच्चा खाना खाने के कारण हो सकता है, लेकिन अभी तक इसका पुख्ता प्रमाण नहीं मिला है। इस संक्रमण का ऑक्सीजन के प्रकार से भी कोई लेना-देना नहीं है। ब्लैक फंगस उन कोरोना मरीजों में भी पाया गया है जो होम आइसोलेशन में रह रहे थे। रणदीप गुलेरिया ने कहा कि ब्लैक फंगस होने के पीछे कच्चा खाना खाने और ऑक्सीजन जैसी अटकलें निराधार हैं।
यह भी पढ़ें: ब्लैक फंगस की दवा की होने लगी किल्लत, अस्पतालों को गुजरना पड़ रहा है लंबी कागजी प्रक्रिया से
एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने आगे कहा, 'रोगियों को दी जाने वाली चिकित्सा ऑक्सीजन की गुणवत्ता से ब्लैक फंगस का कोई लिंक नहीं है। जिन्हें मेडिकल ऑक्सीजन नहीं दी गई उनमें भी इस तरह के मामले सामने आए हैं'। ब्लैक फंगस के रोगियों की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. गुलेरिया ने इसकी रोकथाम रणनीतियों को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने आगे कहा, ब्लैक फंगस पर नियंत्रण का सबसे अच्छा उपाय ब्लड शुगर पर नियंत्रण रखना, विशेष रूप से उन लोगों के द्वारा जो स्टेरॉयड का इस्तेमाल करते हैं। इसके बढ़ने की एक वजह स्टेरॉयड के अंधाधुंध उपयोग पाया गया है।

Fact Check
दावा
कच्चे भोजन के सेवन से ब्लैक फंगस होता है।
नतीजा
इसका कोई प्रमाण नहीं, स्टेरॉयड से होता है ब्लैक फंगस का खतरा।












Click it and Unblock the Notifications