जींस कैसे बनीं महिलाओं की फेवरेट!

Jeans
ग्लोबलाइजेशन के दौर में ऐसी कौन सी ड्रेस है जो पूरी दुनिया में छा गई है, तो बिना देर किए आप नाम लेंगे जींस का। भारत में तो जींस का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है। जैसा कि आपको पता है कि जींस का सफर शुरू हुआ था अमेरिका से। वहां पर काऊब्वाय, रेल कर्मचारी और किसान रोजमर्रा के जीवन में इसे इस्तेमाल कर करते थे।

भारत में जींस का दखल तो वर्षों से रहा है मगर बीते कुछ सालों से भारतीय महिलाओं की यह मनपसंद पोशाक बन चुका है। आज महानगरों और अन्य उपनगरों कों छोड दिया जाए तों छोटे शहरों की महिलाए भी इसे अरामदायक पहनावे के रूप में स्वीकार कर चुकी है। अगर इसे सिर्फ पहनावे के रूप में इसे देखा लाए तो यह भारतीय महिलाओं के लिए खासी सुविधाजनक साबित हुई है।

अब छोटे शहर की महिलाओं में भी पॉपुलर

एक दशक पहले तक छोटे शहरों में शादी के बाद किसी भारतीय महिला को जींस में देखने की कल्पना करना भी मुश्किल था। बहुत ही कम ऐसे सास-ससुर थे जिन्हें अपनी बहु को जींस में देखना पसंद था, मगर शायद आर्थिक स्वाबलंबन ने उनकी इस छवि को तोडा है और मध्यम वर्ग की शादीशुदा महिलाए भी जींस को तरजीह दे रही हैं।

हालांकि इतने खुलेपन के बावजूद बहुत से लोगों का आज भी मानना है कि जींस महिलाओं के शरीर की तरफ ध्यान खीचती है और इससे छेडछाड की घटनाओं में इजाफा होता है। शायद यही वजह है कि कभी छेड़खानी के नाम पर तो कभी विदेशी पहनावे के नाम पर गाहे-बगाहे इसके खिलाफ फतवा जारी होता रहता है।

आरामदायक पोशाक

जब से स्ट्रेचेबल जींस फैशन मार्केट में आयी तबसे इसने महिलाओं के लिए इसे और भी सुविधाजनक बना दिया। सलवार-सूट और साड़ी अब आकेज़नल और किसी खास फंक्शन में पहनने वाली ड्रेस बनती जा रही है। गौर करें तो आधुनिक महिलाओं की सभी जरूरतों को इस ड्रेस ने पूरा किया है। टूव्हीलर और फोरव्हीलर चलाने वाली महिलाए भी यह मानती है कि सूट-साड़ी के मुकाबले जींस ज्यादा अरामदायक है।

जहां तक फैशन की बात है तो यह उनके लुक्स को ज्यादा उभरती है। अगर माहौल और मौके के देखते हुए जींस पहनी जाये तो इसमें कोई बुराई नही। खास बात यह है कि अलग-अलग कंबिनेश के साथ इसे आप शालीन और ग्लैमरस बना सकती हैं। कामकाजी महिलाएं छोटे टॉप के स्थान पर लम्बी कुर्तीय और शर्ट के साथ जींस पहन सकती है। कामकाज के दौरान स्किन टाइट जींस के मुकाबले फ्लैट और पैरलल जींस आपको ज्यादा आराम देगी।

रखरखाव आसान और सदाबहार

अब बारी आती है रख-रखाव की। अगर जींस के रखरखाव की बात करे तो एक बार धुलाई के बाद इसे दो बार तक इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आपको बहुत यात्राएं करनी पड़ती हों या आपका प्रोफेशन भागदौड़ भरा हो तो भला जींस से बेहतर क्या हो सकता है। कालेज जाने वाली गर्ल्स पहले ही इसे अपना ही चुकी हैं। वे इसमें काफी सुविधा महसुस करती है। इसकी धुलाई पर खर्च भी नाममात्र को होता है जितना खर्च एक साड़ी की ड्राईक्लीनिंग में होता है उतने में दस जींसों की धुलाई हो जाएगी।

जींस जैसे पहनावे के तौर पर सदाबहार है वैसे ही मौसम के लिहाज से भी। यह हर मौसम में पहनने कें लिए उपयुक्त है। बरसात या गर्मी में इसे घुटनों तक फोल्ड करके आप कैप्री का शेप दे सकते हैं। जींस के साथ कोट, शाल शर्ट, टॉप जैकेट सभी जंचता है। आपके व्यक्त्तिव और शरीर की बनावट के हिसाब से किया गया चुनाव आपको उबाऊ पारम्परिक परिधानो से छुटकारा दिला सकता है।

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