No Detention Policy Explained: कक्षा 5 और 8 में खत्म होगी 'नो-डिटेंशन पॉलिसी', छात्रों पर क्या होगा इसका असर?

No Detention Policy: केंद्र सरकार ने केंद्रीय स्कूलों, जैसे केंद्रीय विद्यालय और सैनिक स्कूलों, में कक्षा 5 और 8 के लिए 'नो-डिटेंशन पॉलिसी' को खत्म करने का फैसला किया है। इस नीति के खत्म होने का मतलब है कि अगर छात्र साल के अंत में होने वाली परीक्षा में फेल होते हैं, तो उन्हें अगली कक्षा में ऑटोमेटिक प्रमोट नहीं किया जाएगा।

छात्रों को 2 महीने के अंदर दोबारा परीक्षा देने का मौका दिया जाएगा, अगर छात्र उसमें पास होते हैं तो उन्हें अगली कक्षा में भेजा जाएगा वरना उन्हें एक साल और पिछली कक्षा में ही रहना होगा। इसके साथ ही केंद्र ने कहा है कि जब तक छात्रों की शिक्षा पूरी नहीं होती है उन्हें स्कूल से एक्स्पेल्ड नहीं किया जाएगा यानी कि उन्हें स्कूल से नहीं निकाला जाएगा।

No Detention Policy

क्या है 'नो-डिटेंशन पॉलिसी'? (What is No Detention Policy?)

इस नीति के तहत छात्रों को कक्षा 8 तक फेल नहीं किया जाता था, चाहे उनकी परीक्षा में कितनी भी खराब परफॉर्मेंस क्यों न हो। यह नियम 2009 में लागू हुए शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) का हिस्सा था।
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अब क्या होगा बदलाव?

अब अगर कोई छात्र कक्षा 5 या 8 में फेल होता है, तो उसे प्रमोट नहीं किया जाएगा। हालांकि, छात्रों को सुधार का एक और मौका दिया जाएगा।

1. पुनः परीक्षा का मौका

साल के अंत में परीक्षा देने के बाद, अगर कोई छात्र फेल होता है, तो उसे **दो महीने के अंदर री-एग्जाम** (पुनः परीक्षा) देने का अवसर मिलेगा।

2. फिर भी फेल होने पर

अगर छात्र री-एग्जाम में भी पास नहीं होता है, तो उसे उसी कक्षा में रोक लिया जाएगा।

शिक्षक करेंगे मदद

री-एग्जाम और फेल होने की स्थिति में, छात्रों को उनकी कमजोरियों को सुधारने में मदद मिलेगी।
- शिक्षक छात्रों की सीखने में हो रही दिक्कतों की पहचान करेंगे।
- छात्रों को अतिरिक्त निर्देश और मदद दी जाएगी।
- जरूरत पड़ने पर शिक्षक छात्रों के माता-पिता को भी मार्गदर्शन देंगे।

छात्रों को स्कूल से नहीं निकाला जाएगा

इस बदलाव के बावजूद, किसी भी छात्र को प्राथमिक शिक्षा पूरी करने से पहले स्कूल से नहीं निकाला जाएगा।

समझ पर होगी परीक्षा

परीक्षा का फोकस रट्टा मारने के बजाय छात्रों की समझ और उनके समग्र विकास पर होगा।

किन राज्यों में खत्म हो चुकी है ये नीति?

केंद्र के इस फैसले से पहले, 2019 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) में संशोधन किया गया था। इसके बाद से 18 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश, जैसे असम, बिहार, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल और दिल्ली आदि, पहले ही इस नीति को खत्म कर चुके हैं।

कितने स्कूल होंगे प्रभावित?

इस बदलाव का असर केंद्र सरकार के 3,000 से ज्यादा स्कूलों पर पड़ेगा। हालांकि, राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश अपने स्कूलों में इस नीति को लागू रखने या खत्म करने का फैसला खुद कर सकते हैं।

छात्रों और शिक्षा पर प्रभाव

यह बदलाव छात्रों को मेहनत करने के लिए प्रेरित करेगा। साथ ही, उनकी कमजोरियों को पहचानकर बेहतर सीखने का अवसर भी मिलेगा। इससे छात्रों के समग्र विकास पर ध्यान दिया जाएगा, जो लंबे समय में उनकी शिक्षा को और मजबूत करेगा।
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