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छोटे से गांव से ISRO के चेयरमैन तक का सफर! पढ़िए डॉ. नारायणन का सफरनामा, कौन-कौन सी डिग्री है इनके पास?

ISRO Chairman Dr. V. Narayanan Academic Profile: देश की अंतरिक्ष उपलब्धियों की बात हो और ISRO का नाम न आए, यह संभव नहीं। भारत के चंद्रयान, मंगलयान, सैटेलाइट्स और गगनयान जैसे मिशनों के पीछे जिन वैज्ञानिकों का योगदान है, उनमें से एक बड़ा नाम है डॉ. वी. नारायणन का। आज वे इसरो के चेयरमैन हैं, लेकिन उनका सफर बेहद साधारण परिस्थितियों से शुरू होकर असाधारण ऊंचाइयों तक पहुंचा है।

तमिलनाडु के एक छोटे से गांव से निकलकर भारत के सबसे बड़े वैज्ञानिक संस्थान का नेतृत्व करना किसी फिल्मी कहानी जैसा लगता है। पर यह डॉ. नारायणन की मेहनत, संकल्प और ज्ञान का ही नतीजा है कि उन्होंने यह मुकाम हासिल किया। जनवरी 2025 में उन्हें इसरो का नया प्रमुख नियुक्त किया गया और तभी से वे भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई दिशा देने में जुटे हैं।

ISRO Chairman Dr V Narayanan

पढ़ाई में शुरू से अव्वल

डॉ. नारायणन की उच्च शिक्षा सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज, नागरकोइल से शुरू हुई, जहां उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया और पहले स्थान पर रहे। इसके बाद उन्होंने 'इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स, इंडिया' से एएमआईई किया।
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1989 में उन्होंने आईआईटी खड़गपुर से क्रायोजेनिक इंजीनियरिंग में एमटेक किया और फिर से टॉप रैंक हासिल की। बाद में 2001 में उन्होंने वहीँ से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में PhD पूरी की।

ISRO से लंबे समय से जुड़े

डॉ. नारायणन ने इसरो में 1984 में अपनी सेवाएं शुरू कीं। उन्होंने सॉलिड और लिक्विड प्रपल्शन सिस्टम्स के विकास में अहम भूमिका निभाई। ASLV और PSLV जैसे लॉन्च व्हीकल्स के शुरुआती विकास में उनका योगदान रहा।

2018 से 2025 तक वह लिक्विड प्रपल्शन सिस्टम्स सेंटर (LPSC) के निदेशक रहे। इस दौरान उन्होंने क्रायोजेनिक और सेमी-क्रायोजेनिक तकनीक पर काम किया जो इसरो की भविष्य की उड़ानों के लिए बेहद जरूरी है।

ISRO चेयरमैन बनने के बाद की जिम्मेदारी

जनवरी 2025 में ISRO का नेतृत्व संभालने के बाद डॉ. नारायणन के सामने कई बड़ी चुनौतियां और प्रोजेक्ट हैं। गगनयान मानव मिशन, चंद्रयान-4 और भारत के पहले स्पेस स्टेशन की तैयारी में उनका रोल बेहद अहम है।

सम्मान और पुरस्कार

उनके बेहतरीन काम के लिए उन्हें कई पुरस्कार मिले हैं:

  • IIT खड़गपुर से एमटेक में प्रथम आने पर सिल्वर मेडल
  • एस्ट्रोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया से गोल्ड मेडल
  • 2019 में 'नेशनल डिजाइन अवॉर्ड'
  • 2019 में 'नेशनल एरोनॉटिकल प्राइज'
  • सत्यभामा यूनिवर्सिटी से डॉ. ऑफ साइंस की मानद उपाधि
  • 2018 में IIT खड़गपुर से 'डिस्टिंग्विश्ड एलुमनस अवॉर्ड'

वैज्ञानिक संस्थाओं से जुड़ाव

डॉ. नारायणन कई राष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्थाओं के सदस्य हैं। वे इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग, एरोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया और इंडियन क्रायोजेनिक काउंसिल के फेलो हैं। वे इंडियन सिस्टम्स सोसाइटी फॉर साइंस एंड इंजीनियरिंग के अध्यक्ष भी हैं।

देश के लिए एक प्रेरणा

डॉ. वी. नारायणन की कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो विज्ञान और अंतरिक्ष क्षेत्र में कुछ बड़ा करना चाहते हैं। उनका सफर यह साबित करता है कि लगन और मेहनत से किसी भी मुकाम तक पहुंचा जा सकता है।
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