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ISRO Missions Scorecard: इसरो के 101 लॉन्च मिशन में कितने पास-कितने फेल? किसने रचा इतिहास? यहां पूरी LIST

ISRO Missions Scorecard: तारीख 18 मई 2025, वक्त-सुबह 5:59 बजे। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने PSLV-C61 रॉकेट लॉन्च। EOS-09 सैटेलाइट को लेकर अंतरिक्ष की ओर बढ़ा, देश ने एक बार फिर उम्मीदों की सांसें थाम लीं। लेकिन उड़ान के ठीक 203 सेकंड बाद, कुछ ऐसा हुआ जिसने सभी को चौंका दिया - तीसरे चरण (PS3) में गड़बड़ी!

मिशन मैन्युअली खत्म करना पड़ा। लेकिन, ये कहानी सिर्फ एक नाकाम उड़ान की नहीं, बल्कि उस अंतरिक्ष एजेंसी की है, जिसने 101 लॉन्च मिशनों में से 91% में सफलता पाई है। आइए जानते हैं ISRO की कामयाबी (ISRO Success Missions List)और संघर्ष की पूरी कहानी...

ISRO Success Missions List

सबसे पहले, वो मिशन जो उम्मीदें तोड़ गए

1- SLV-3 (10 अगस्त 1979)

  • मिशन: भारत का पहला सैटेलाइट प्रक्षेपण वाहन।
  • गड़बड़ी: दूसरे चरण में तकनीकी खामी
  • रिजल्ट: रॉकेट समुद्र में गिरा, सैटेलाइट नहीं पहुंच सका
  • क्या सीख मिली: भारत को स्पेस लॉन्चिंग की ABCD पढ़ाई
  • मकसद: भारत को सैटेलाइटों को प्रक्षेपित करने की तकनीक विकसित करना था।
  • विस्तार:10 अगस्त 1979 को, भारत ने अपना पहला प्रायोगिक सैटेलाइट (SLV-3) लॉन्च किया, जो कि श्रीहरिकोटा से रोहिणी टेक्नोलॉजी पेलोड (RTP) के साथ सफल नहीं हो सका था। SLV-3 का पहला लॉन्च आंशिक रूप से सफल रहा था, लेकिन यह अपनी इच्छित कक्षा में नहीं पहुंच सका।

2- PSLV-D1 (20 सितंबर 1993)

  • मिशन: PSLV श्रृंखला की पहली उड़ान।
  • गड़बड़ी: सॉफ्टवेयर एरर, दूसरे स्टेज का अलगाव विफल
  • रिजल्ट: IRS-1E कक्षा में नहीं पहुंचा
  • क्या सीख मिली: PSLV को 'परफेक्ट' बनने से पहले गड़बड़ी पहचाननी थी
  • मकसद: भारतीय रिमोट सेंसिंग (IRS) सैटेलाइट को सूर्य-समकालिक कक्षा में स्थापित करना था।
  • विस्तार: 20 सितंबर 1993 को, ध्रुवीय सैटेलाइट प्रक्षेपण यान (PSLV) का पहला लॉन्च था, जो फेल रहा था। यह आईआरएस-1ई सैटेलाइट को कक्षा में स्थापित करने में विफल रहा था, क्योंकि रॉकेट के ऑनबोर्ड मार्गदर्शन और नियंत्रण प्रोसेसर में एक सॉफ्टवेयर की गलती थी।

3- GSLV-D3 / GSAT-4 (15 अप्रैल 2010)

  • मिशन: पहली बार स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन का उपयोग।
  • गड़बड़ी: स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन फेल, टर्बोपंप ने धोखा दिया
  • रिजल्ट: सैटेलाइट गायब!
  • क्या सीख मिली: क्रायो-तकनीक भारत के लिए अग्निपरीक्षा थी
  • मकसद: सैटेलाइट को भूस्थिर स्थानांतरण कक्षा में स्थापित करना था। इस मिशन को भारत की स्वदेशी क्रायोजेनिक तकनीक का परीक्षण करने के लिए भी महत्वपूर्ण माना गया था।
  • विस्तार: 15 अप्रैल 2010 को इसरो मिशन था। इसमें भारत के पहले स्वदेशी क्रायोजेनिक अपर स्टेज (सीयूएस) का उपयोग किया गया था। यह जीएसएलवी (भूस्थिर सैटेलाइट प्रक्षेपण यान) मार्क II रॉकेट की पहली उड़ान थी।

4- PSLV-C39 / IRNSS-1H (31 अगस्त 2017)

  • मिशन: IRNSS-1H नेविगेशन सैटेलाइट का प्रक्षेपण।
  • गड़बड़ी: हीट शील्ड अलग नहीं हुआ
  • रिजल्ट: सैटेलाइट चौथे स्टेज में ही फंसा रह गया
  • क्या सीख मिली: मशीनी ढाल जब ना हटे, सैटेलाइट भी बंधक बन जाता है।
  • मकसद: IRNSS-1H को उप-भूस्थिर (Sub-geoStationary ) ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित करना था, जो भारत और उसके आसपास के क्षेत्र में नेविगेशन और समय संबंधी डेटा प्रदान करने में मदद करता।
  • विस्तार: 31 अगस्त 2017 को पीएसएलवी-सी39 के माध्यम से आईआरएनएसएस-1एच का प्रक्षेपण असफल रहा। यह मिशन आईआरएनएसएस (भारतीय क्षेत्रीय नौवहन सैटेलाइट प्रणाली) के आठवें सैटेलाइट को कक्षा में स्थापित करने का था। मिशन का प्राथमिक कारण पेलोड फेयरिंग (हीट शील्ड) का अलग न होना था, जिसके कारण सैटेलाइट रॉकेट के चौथे चरण में फंस गया।

5- GSLV-F10 / EOS-03 (12 अगस्त 2021)

  • मिशन: EOS-03 पृथ्वी अवलोकन सैटेलाइट का प्रक्षेपण।
  • गड़बड़ी: क्रायोजेनिक चरण में खामी
  • रिजल्ट: सैटेलाइट गुम, मिशन फेल
  • क्या सीख मिली: क्रायो टेक्नोलॉजी अब भी भारत की सबसे बड़ी चुनौती
  • मकसद:GSLV-F10 रॉकेट का इस्तेमाल करके EOS-03 सैटेलाइट को भू-स्थिर (GeoStationary)ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित करना था। EOS-03 एक हाईटेक पृथ्वी निगरानी सैटेलाइट है।
  • विस्तार: मिशन 12 अगस्त 2021 को श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया गया था, लेकिन यह सफल नहीं हुआ। मिशन का उद्देश्य पृथ्वी अवलोकन सैटेलाइट EOS-03 को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित करना था, लेकिन रॉकेट के क्रायोजेनिक चरण में तकनीकी खराबी के कारण यह नहीं हो सका।

6- SSLV-D1 (7 अगस्त 2022)

  • मिशन: पहली बार SSLV का प्रक्षेपण।
  • गड़बड़ी: सेंसर फेल, सैटेलाइट गलत ऑर्बिट में
  • रिजल्ट: EOS-02 और आजादीसैट - दोनों निष्क्रिय
  • क्या सीख मिली: छोटा रॉकेट भी बड़ी मुसीबत बन सकता है।
  • मकसद: भारतीय लघु सैटेलाइट प्रक्षेपण यान (SSLV) की पहली उड़ान और इसके विभिन्न सिस्टम का प्रदर्शन करना।
  • विस्तार: 7 अगस्त 2022 को SSLV-D1 मिशन इसरो का पहला था, जिसे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया गया था। हालांकि, रॉकेट सैटेलाइटों को उनकी इच्छित कक्षा में स्थापित करने में विफल रहा।

7- PSLV-C61 / EOS-09 (18 मई 2025)

  • मिशन: EOS-09 (Earth Observation Satellite) पृथ्वी निगरानी सैटेलाइट का प्रक्षेपण।
  • गड़बड़ी: तीसरे चरण में गड़बड़ी, रॉकेट रास्ता भटका
  • रिजल्ट: मैन्युअल रूप से रॉकेट को उड़ाया गया
  • क्या सीख मिली: तकनीक पर भरोसा हो, पर बैकअप प्लान जरूरी है।

अब बात उन मिशनों की, जिन्होंने भारत को सितारों के करीब पहुंचा दिया....

  • चंद्रयान-3 (2023): चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग, जिससे भारत यह उपलब्धि हासिल करने वाला चौथा देश बना।
  • आदित्य-L1 (2023): सूर्य का अध्ययन करने वाला पहला भारतीय मिशन। 1.5 मिलियन किमी दूर Lagrange Point-1 (L1) पॉइंट पर पहुंचा।
  • PSLV-C37 (2017): एक ही मिशन में 104 सैटेलाइटों का सफल प्रक्षेपण, जो एक विश्व रिकॉर्ड है।
  • मार्स ऑर्बिटर मिशन (मंगलयान) (2013): 5 नवंबर, 2013 को श्रीहरिकोटा से PSLV-C25 रॉकेट द्वारा लॉन्च किया। भारत का पहला मंगल मिशन, जो पहले प्रयास में ही सफल रहा। 24 सितंबर, 2021 तक सात साल पूरे कर चुका है।
  • चंद्रयान-1 (2008): भारत का पहला चंद्र मिशन, जिसने चंद्रमा की सतह पर पानी की उपस्थिति की पुष्टि की। इसे 22 अक्टूबर, 2008 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था। चांद की सतह पर पानी के अणुओं का पता लगाकर एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक सफलता हासिल की।
  • INSAT श्रृंखला (1983): भारत की कम्युनिकेशन क्रांति की रीढ़ बनी। भारत के दूरसंचार क्षेत्र में क्रांति ला दी। भूस्थिर कक्षा में नौ परिचालन संचार सैटेलाइटों से युक्त, भारतीय राष्ट्रीय सैटेलाइट (इनसैट) प्रणाली एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे बड़ी घरेलू संचार सैटेलाइट प्रणालियों में से एक है।
  • आर्यभट्ट (1975): भारत का पहला सैटेलाइट, जिसने अंतरिक्ष में भारत की उपस्थिति की शुरुआत की।

ISRO की उपलब्धियां

  • लॉन्च मिशन: 101
  • स्पेसक्राफ्ट मिशन: 130+
  • विदेशी सैटेलाइट प्रक्षेपण: 433
  • निजी/छात्र सैटेलाइट: 18

नाकामी भी ISRO की ताकत बनी!

ISRO की कहानी किसी साइंस-थ्रिलर फिल्म से कम नहीं लगती, जहां हर फेलियर के पीछे एक सीख है, हर सफलता के पीछे वर्षों की मेहनत और इंजीनियरिंग का जुनून। इस एजेंसी ने साबित किया है कि रॉकेट सिर्फ ईंधन से नहीं, इरादों से भी उड़ते हैं।

सोर्स-

  • https://www.isro.gov.in/Timeline.html
  • https://www.sci-tech-today.com/stats/isro-statistics/
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