Interpreter Jobs: लाखों की सैलरी और पीएम के साथ देश-विदेश घुमने का मौका! देखें कोर्स से लेकर करियर तक की डिटेल
How to Become PM's Interpreter: जब भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या दुनिया के किसी भी देश के राष्ट्राध्यक्ष विदेश दौरे पर जाते हैं, तो मीडिया की नजरें उनके हर कदम पर होती हैं- कौन उनके साथ है, क्या बातचीत हो रही है, और किन समझौतों पर हस्ताक्षर हो रहे हैं। लेकिन इन सबके बीच एक ऐसा शख्स होता है जो कैमरे की नजरों से भले ही छिपा रहे, पर हर बातचीत का सबसे अहम हिस्सा होता है, वह है प्रधानमंत्री का दुभाषिया यानी की Interpreter। यह दुभाषिया सिर्फ दो भाषाओं को जोड़ने का माध्यम नहीं होता, बल्कि वह दो देशों की कूटनीति, समझ और रिश्तों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है।
Interpreter का यह रोल इतना खास होता है कि इसके लिए न केवल बेहतरीन भाषा कौशल चाहिए, बल्कि मानसिक सतर्कता, अंतरराष्ट्रीय मामलों की समझ और जबरदस्त प्रोफेशनलिज्म भी जरूरी होता है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह एक ऐसा प्रोफेशन है जिसमें आपको विदेशों में घूमने, बड़े नेताओं से मिलने और हर इंटरनेशनल इवेंट का हिस्सा बनने का मौका मिलता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस स्तर का दुभाषिया बनने के लिए कौन-से कोर्स करने होते हैं, कितना अनुभव चाहिए होता है और सैलरी कितनी मिलती है? आइए, समझते हैं इसके बारे में आसान भाषा में...

दुभाषिया बनने के लिए क्या योग्यता चाहिए?
प्रधानमंत्री का दुभाषिया बनने के लिए किसी खास विषय में ग्रेजुएशन जरूरी नहीं है, लेकिन अगर आपने भाषा, अंतरराष्ट्रीय संबंध या पॉलिटिकल साइंस जैसे विषय पढ़े हैं तो फायदा होता है। सबसे जरूरी बात ये है कि आपको कम से कम दो भाषाओं पर पूरी पकड़ होनी चाहिए-हिंदी या अंग्रेजी में से एक और दूसरी कोई विदेशी भाषा जैसे रूसी, फ्रेंच, चीनी, स्पैनिश, जर्मन या अरबी।
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कोर्स और ट्रेनिंग की भी जरूरत होती है
इस फील्ड में करियर बनाने के लिए कई प्रमुख संस्थान सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स कराते हैं। जैसे:
- JNU और दिल्ली विश्वविद्यालय में डिप्लोमा इन इंटरप्रेटिंग
- Alliance Française (फ्रेंच), Max Mueller Bhavan (जर्मन) और Instituto Cervantes (स्पैनिश) में विदेशी भाषा के कोर्स
- FSI (Foreign Service Institute) में IFS अफसरों को प्रोफेशनल इंटरप्रेटिंग की ट्रेनिंग दी जाती है
- UN इंटरप्रेटर बनने के लिए CEFR C2 लेवल की भाषा दक्षता जरूरी होती है
सेलेक्शन के दो मुख्य रास्ते
IFS (भारतीय विदेश सेवा) के जरिए
आप UPSC परीक्षा पास कर IFS अफसर बन सकते हैं। इसके बाद आपको लाल बहादुर शास्त्री अकादमी में ट्रेनिंग दी जाती है और फिर FSI में एक साल की विशेष ट्रेनिंग मिलती है। इसमें एक विदेशी भाषा भी सिखाई जाती है। अगर आपकी भाषा उस देश से मेल खाती है जहां पीएम जा रहे हैं, तो आपको उनके साथ दुभाषिया के तौर पर भेजा जा सकता है।
फ्रीलांस या कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर
अगर आप फुलटाइम सरकारी सेवा में नहीं आना चाहते, तो फ्रीलांस दुभाषिया बन सकते हैं। इसके लिए आपके पास बैचलर डिग्री के साथ-साथ इंटरप्रेटिंग का डिप्लोमा होना चाहिए। साथ ही 5 साल का अनुभव और सरकारी टेस्ट पास करना जरूरी होता है। विदेश मंत्रालय या एम्बेसीज समय-समय पर ऐसे प्रोफेशनल्स को कॉन्ट्रैक्ट पर हायर करती हैं।
सैलरी कितनी मिलती है?
- IFS अफसर के तौर पर शुरुआती सैलरी करीब ₹56,100 प्रति माह होती है। विदेश पोस्टिंग पर $2,000-$5,000 प्रति माह यानी ₹1,66,000 से ₹4,15,000 के बीच तक का फॉरेन अलाउंस भी मिलता है।
- सीनियर लेवल पर, सैलरी ₹1.44 लाख से ₹2.24 लाख प्रति माह तक हो सकती है, साथ ही कई सुविधाएं जैसे घर, गाड़ी, मेडिकल और बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी सरकार उठाती है।
- फ्रीलांस इंटरप्रेटर को प्रति दिन ₹6,000 से ₹15,000 तक मिल सकते हैं। पीएम के साथ काम करने पर ये ₹11,000 से ₹47,000 प्रति दिन हो सकता है। विदेश में प्रति घंटे ₹2,000 से ₹5,000 तक की कमाई होती है।
- UN इंटरप्रेटर की सैलरी सालाना $60,000 से $100,000 यानी करीब ₹50 से ₹80 लाख तक हो सकती है।
क्यों है ये प्रोफेशन खास?
यह न केवल एक प्रतिष्ठित नौकरी है, बल्कि आपको दुनिया घूमने, बड़े-बड़े नेताओं से मिलने और देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका भी मिलता है। यह करियर उन युवाओं के लिए बेहतरीन है जो भाषाओं में रुचि रखते हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करना चाहते हैं।
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