Gautam Adani: IIT खड़गपुर में गौतम अडानी का संदेश, कहा-छात्र हैं भारत के नए स्वतंत्रता सेनानी
Gautam Adani at IIT Kharagpur: भारत की आजादी को सात दशक से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब देश एक नई जंग के मोड़ पर खड़ा है। यह जंग बंदूक या तलवार से नहीं, बल्कि तकनीक, नवाचार और आत्मनिर्भरता से लड़ी जानी है। IIT खड़गपुर के प्लेटिनम जुबली सत्र को संबोधित करते हुए अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने इसी "नई स्वतंत्रता संग्राम" का आह्वान किया। उन्होंने छात्रों को "भारत के नए स्वतंत्रता सेनानी" बताते हुए कहा कि आने वाले समय में वही देश आगे बढ़ेगा जो विचार, कोड और बौद्धिक संपदा की ताकत से खुद को मजबूत बनाएगा।
हिजली जेल की याद और आज की निर्भरता
अडानी ने अपने भाषण की शुरुआत खड़गपुर की हिजली जेल का ज़िक्र करते हुए की, जहां 1930 के दशक में त्रिदीब कुमार चौधरी जैसे युवा स्वतंत्रता सेनानी कैद रहे थे। उन्होंने कहा कि 1947 में भारत ने औपनिवेशिक शासन से मुक्ति पाई, लेकिन आज भी देश सेमीकंडक्टर, विदेशी तेल, सीमा पार डेटा फ्लो और आयातित रक्षा प्रणालियों पर निर्भर है। अडानी ने कहा, "आज की जंगें अदृश्य हैं। ये सर्वर फार्म्स में लड़ी जाती हैं, न कि खाइयों में। इनके हथियार एल्गोरिदम हैं, बंदूकें नहीं। नए साम्राज्य जमीन पर नहीं, बल्कि डेटा सेंटरों में बनते हैं।"

छात्रों को बताया भारत के "नए स्वतंत्रता सेनानी"
अडानी ने छात्रों को "भारत के नए स्वतंत्रता सेनानी" बताते हुए कहा कि नवाचार, कोड और विचार ही आधुनिक हथियार हैं, जो तय करेंगे कि भारत आत्मनिर्भर बनेगा या फिर निर्भरता में रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि AI-आधारित दुनिया में लागत से मिलने वाला लाभ खत्म हो जाएगा और वही देश आगे बढ़ेगा जो बौद्धिक संपदा पर अधिकार रखेगा और बड़े पैमाने पर खोजों को आगे बढ़ाएगा। उन्होंने शिक्षा संस्थानों से केवल डिग्रीधारी बनाने की बजाय "उज्ज्वल देशभक्त" तैयार करने की अपील की, जो आविष्कार करें, बदलाव लाएं और सीधे भारत की प्रगति में योगदान दें।
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शिक्षा और उद्योग के बीच गहरी साझेदारी
अडानी ने स्वीकार किया कि भारतीय कॉरपोरेट्स अब तक इनोवेशन का पूरा बोझ नहीं उठा पाए हैं। उन्होंने विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बीच गहरी साझेदारी की जरूरत पर जोर दिया। उनके अनुसार, "विश्वविद्यालयों को ब्रेकथ्रू खोजों पर ध्यान देना चाहिए और कॉरपोरेट्स को उन्हें बड़े स्तर पर आगे ले जाना चाहिए। दोनों मिलकर ही असर पैदा कर सकते हैं।"
इसी दिशा में उन्होंने Adani-IIT Platinum Jubilee Change Makers Fellowship की घोषणा की। यह पहल IIT के सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं को नवीकरणीय ऊर्जा, पोर्ट और लॉजिस्टिक्स तथा स्मार्ट एयरपोर्ट्स जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में लगाने के लिए तैयार की गई है।
अपने जीवन सफर से साझा किए सबक
गौतम अडानी ने अपनी व्यक्तिगत यात्रा का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे वे 16 साल की उम्र में मुंबई में हीरे छांटने का काम करते थे और वहां से उनके उद्यमी जीवन की शुरुआत हुई। उन्होंने कहा कि जोखिम उठाना, तेज़ निर्णय लेना, पूरी प्रक्रिया को अपने नियंत्रण में रखना और वास्तविक संपत्तियों पर भरोसा करना उनकी सफलता के सूत्र रहे हैं।
उन्होंने बताया कि मुंद्रा पोर्ट से लेकर खवड़ा रिन्यूएबल पार्क और अडानी एयरपोर्ट्स तक हर परियोजना केवल उद्यमिता का परिणाम नहीं थी, बल्कि भारत की अजेय विकास गाथा पर उनके विश्वास का प्रतीक भी थी।
नई पीढ़ी के लिए चार सिद्धांत
अडानी ने छात्रों को एक मजबूत भारत बनाने के लिए चार सिद्धांत अपनाने की सलाह दी:
- विचार और नवाचार के जरिए नए स्वतंत्रता सेनानी बनना।
- सबसे पहले भारत के लिए निर्माण करना - मछुआरों, किसानों और नागरिकों के समाधान खोजना।
- देश की नींव मजबूत करना - बुनियादी ढांचे, तकनीक और बौद्धिक संपदा में।
- शिक्षा, उद्योग और सरकार को एकजुट होकर एक टीम की तरह आगे बढ़ाना।
आखिरी चुनौती
अपने संबोधन के अंत में अडानी ने छात्रों को एक चुनौती दी। उन्होंने कहा,"जल्द ही आपके हाथ में दो टिकट होंगे - एक आरामदायक वेतन की और दूसरा भारत निर्माण की विरासत की। केवल एक ट्रेन है जो राष्ट्र निर्माण का गर्व लेकर चलती है। सोचिए, आप कौन-सी ट्रेन पकड़ेंगे?"
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