Gautam Adani: 'भारत का डिजिटल मॉडल दुनिया में सबसे आगे', IIM लखनऊ में बोले अडानी-भारत बन रहा टेक्नोलॉजी लीडर
Gautam Adani: क्या आपने कभी सोचा है कि एक ऐसा देश जो कभी तकनीक के मामले में पीछे माना जाता था, आज दुनिया को डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का रास्ता दिखा रहा है? भारत, जो कभी विदेशी तकनीक पर निर्भर था, अब आधार, यूपीआई और ओएनडीसी जैसे अपने खुद के प्लेटफॉर्म्स के दम पर एक नई डिजिटल क्रांति का नेतृत्व कर रहा है।
इसी बदले हुए भारत की तस्वीर पेश की देश के मशहूर उद्योगपति गौतम अडानी ने, जब उन्होंने IIM लखनऊ में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया में कोई देश भारत जैसी डिजिटल संरचना इतनी तेजी और पैमाने पर नहीं बना पाया है। उन्होंने इसे सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि नए भारत की आत्मा बताया - एक ऐसा भारत जो समावेशी है, तेज़ है और कल्पना से परे सोचता है।

$25 ट्रिलियन की इकोनॉमी की ओर बढ़ता भारत
अडानी ने विश्वास जताया कि ये डिजिटल प्लेटफॉर्म भारत को 2050 तक 25 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा, "ये सिर्फ प्लेटफॉर्म नहीं हैं, ये उस भारत की नींव हैं जो डिज़ाइन से समावेशी है और सोच से तेज़ रफ्तार वाला है।"
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चार ताकतें जो भारत को बनाएंगी महाशक्ति
अडानी ने अपने भाषण में भारत की चार बड़ी ताकतों को भी गिनाया -
- युवा और महत्वाकांक्षी आबादी
- घरेलू मांग में तेजी
- मजबूत डिजिटल सार्वजनिक ढांचा
- भारतीय स्टार्टअप्स को मिल रहा तेज़ पूंजी समर्थन
डिजिटल प्लेटफॉर्म को बताया 'नई सोच का सिस्टम'
उन्होंने कहा कि आधार, UPI और ONDC सिर्फ प्रशासनिक सुधार नहीं हैं, बल्कि ये एक नया आर्थिक सिस्टम हैं जो भरोसे, स्केल और समावेशिता पर आधारित है।
भारत की डिजिटल ताकत बन रही ग्लोबल सॉफ्ट पावर
विश्व बैंक भी भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को "अनूठी सफलता" बता चुका है। कई विकासशील देश, खासकर अफ्रीका और लैटिन अमेरिका, अब भारत के मॉडल को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।
'जोखिम से मत डरो, संभावना को अपनाओ'
अडानी ने छात्रों से कहा, "यह आपका समय है। भारत एक कैनवास है। जो फ्रेमवर्क आप पढ़ते हैं, वो बीते समय के अनुभव पर बने हैं। लेकिन भविष्य उन लोगों का होगा जो रिस्क लेने से नहीं डरते।"
अपने जीवन के अनुभव भी किए साझा
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की कहानी भी सुनाई - 16 साल की उम्र में मुंबई में हीरों का व्यापार और फिर 'असंभव' कहे जाने वाले इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना। उन्होंने कहा, "मैप आपको वहां ले जाते हैं जहां कोई पहले जा चुका है। लेकिन कुछ नया बनाने के लिए आपको उस दिशा में देखना होगा जहां संभावना है।"
भारत की भूमिका विश्व मंच पर विशेष
अडानी ने कहा कि आज जब दुनिया युद्ध और वर्चस्व की होड़ से टूटी हुई है, भारत संयम के रास्ते पर चलकर मजबूती से खड़ा है। "जहां बाकी देश थोपते हैं, भारत उठाता है। जहां बाकी देश लेते हैं, भारत देता है - शांति से, निरंतर और गरिमा के साथ।"
उन्होंने छात्रों से कहा कि खुद को सिर्फ बाज़ार के प्रतियोगी नहीं, बल्कि सभ्यता के संरक्षक समझें। "भारत को ऐसे चित्रकारों की ज़रूरत नहीं जो खाली जगहों में रंग भरें, बल्कि ऐसे लोगों की ज़रूरत है जो ऐसे रंगों से पेंट करें जिनकी अभी कल्पना भी नहीं हुई।"
नया भारत, नई सोच, नया आत्मविश्वास
गौतम अडानी का यह भाषण सिर्फ कॉरपोरेट उपलब्धियों की बात नहीं थी, बल्कि एक राष्ट्रीय आत्मविश्वास का प्रतीक था - कि भारत के पास आज वो टूल्स हैं, वो सपने हैं, और अब सिर्फ एक सवाल बचा है - कौन इन टूल्स का इस्तेमाल करेगा, और कितनी हिम्मत के साथ।
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