असम में मुख्यमंत्री बनाने की फैक्ट्री, एक ही यूनिवर्सिटी से निकले 7 CM, हिमंता सरमा भी यहीं के स्टूडेंट
The Cotton University Assam: असम विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर राज्य की सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (CM Himanta Biswa Sarma) के नेतृत्व में बीजेपी ने न केवल जीत का परचम लहराया, बल्कि राज्य के विकास और राजनीतिक स्थिरता को एक नई दिशा दी है। लेकिन इस चुनावी शोर और जीत के बीच गुवाहाटी की एक शिक्षण संस्था फिर से सुर्खियों में है।
यह कोई साधारण संस्थान नहीं, बल्कि असम की राजनीति की नर्सरी कही जाने वाली कॉटन यूनिवर्सिटी है। इस विश्वविद्यालय का दबदबा ऐसा है कि असम के राजनीतिक इतिहास में अब तक कुल सात मुख्यमंत्री इसी कैंपस की उपज रहे हैं। राज्य की सत्ता का गलियारा इसी कॉलेज के रास्तों से होकर गुजरता है, जो इसकी अकादमिक और राजनीतिक विरासत को अद्वितीय बनाता है।

1901 से शुरू हुआ सफर, आजादी से पहले की विरासत
कॉटन यूनिवर्सिटी का इतिहास गौरवशाली रहा है। इसकी स्थापना साल 1901 में कॉटन कॉलेज के रूप में हुई थी। उस दौर में असम के युवाओं के पास उच्च शिक्षा के सीमित विकल्प थे और उन्हें पढ़ाई के लिए कोलकाता (तब कलकत्ता) जाना पड़ता था। छात्रों की इसी जरूरत को देखते हुए तत्कालीन ब्रिटिश प्रशासन ने इस कॉलेज की नींव रखी।
दशकों तक यह कॉलेज पूरे उत्तर-पूर्व भारत में शिक्षा का सबसे बड़ा केंद्र बना रहा। शिक्षा के साथ-साथ यहां के छात्रों में वैचारिक और राजनीतिक चेतना भी विकसित होने लगी। साल 2017 में असम सरकार ने इसे पूर्ण विश्वविद्यालय का दर्जा दिया, जिसके बाद इसे 'कॉटन यूनिवर्सिटी' के नाम से जाना जाने लगा।
इन 7 दिग्गजों ने संभाली असम की कमान
कॉटन यूनिवर्सिटी की सबसे बड़ी उपलब्धि इसके वे पूर्व छात्र हैं जिन्होंने असम के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की सेवा की। इस सूची में शामिल नाम असम के आधुनिक इतिहास के स्तंभ माने जाते हैं:
- गोपीनाथ बोरदोलोई: असम के पहले मुख्यमंत्री और 'लोकप्रिय' के नाम से विख्यात।
- महेंद्र मोहन चौधरी: जिन्होंने राज्य के प्रशासनिक ढांचे को मजबूती दी।
- सरत चंद्र सिन्हा: अपनी सादगी और जमीनी राजनीति के लिए जाने गए।
- जोगेंद्र नाथ हजारिका: असम के राजनीतिक घटनाक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- हितेश्वर सैकिया: राज्य के विकास और उग्रवाद की समस्याओं को सुलझाने में सक्रिय रहे।
- भूमिधर बर्मन: वरिष्ठ नेता जिन्होंने दो बार कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली।
- हिमंता बिस्वा सरमा: वर्तमान मुख्यमंत्री और उत्तर-पूर्व के सबसे प्रभावशाली राजनेताओं में से एक।
छात्र राजनीति से सत्ता के शिखर तक, हिमंता बिस्वा सरमा
मौजूदा मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का कॉटन यूनिवर्सिटी से बेहद गहरा और अटूट रिश्ता रहा है। उन्होंने इसी संस्थान से पॉलिटिकल साइंस (राजनीति विज्ञान) में स्नातक और स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। सरमा केवल एक मेधावी छात्र ही नहीं थे, बल्कि वे छात्र राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी भी थे।
उनके राजनीतिक कौशल का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 1988 से 1992 के बीच वे लगातार तीन बार कॉटन कॉलेज छात्र संघ (CCSU) के महासचिव चुने गए। यह वह दौर था जिसने उनके भीतर नेतृत्व क्षमता और जनसंपर्क की कला को तराशा। आज वे जिस राजनीतिक सूझबूझ के लिए जाने जाते हैं, उसकी नींव इसी कैंपस की बहसों और आंदोलनों में पड़ी थी।
क्यों खास है कॉटन यूनिवर्सिटी?
असम में यह धारणा आम है कि यदि आप राज्य की राजनीति को समझना चाहते हैं, तो आपको कॉटन यूनिवर्सिटी के मिजाज को समझना होगा। यहां का माहौल छात्रों को न केवल किताबी ज्ञान देता है, बल्कि उन्हें सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय रखने के लिए प्रेरित करता है। चुनाव दर चुनाव, यहां के पूर्व छात्र सत्ता की सीढ़ियां चढ़ते रहे हैं, जो यह साबित करता है कि यह संस्थान सिर्फ डिग्री बांटने वाली जगह नहीं, बल्कि असम के भविष्य को गढ़ने वाली एक वैचारिक प्रयोगशाला है।
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