Iran US Nuclear Deal: पाकिस्तान के अरमानों पर फिरा पानी! इस्लामाबाद नहीं इस देश में होगा ईरान-अमेरिका समझौता
Iran US Nuclear Deal Doha Meting: ईरान और अमेरिका के बीच चल रही परमाणु समझौता वार्ता अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। फाइनल ड्राफ्ट तैयार करने के लिए कतर की राजधानी दोहा में बड़ी बैठक होने जा रही है, जहां ईरान के वरिष्ठ नेता और वार्ता टीम पहुंच चुके हैं। पाकिस्तान को उम्मीद थी कि यह अहम बैठक इस्लामाबाद में होगी, लेकिन आखिरी समय में जगह बदलने से उसे बड़ा झटका माना जा रहा है।
पाकिस्तान खुद को इस बातचीत में "मैसेंजर" की भूमिका में देख रहा था। अब दोहा में होने वाली बैठक पर दुनिया की नजर है, क्योंकि यहीं से समझौते का अंतिम रास्ता निकल सकता है।

Hormuz Strait Deal: दोहा पहुंचे ईरानी नेता
रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान वार्ता दल के प्रमुख Mohammad Bagher Ghalibaf और विदेश मंत्री Abbas Araghchi सोमवार को दोहा पहुंच गए। उनके साथ ईरान के केंद्रीय बैंक के गवर्नर भी मौजूद हैं। यहां होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने, प्रतिबंधों में राहत और संवर्धित यूरेनियम जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। माना जा रहा है कि युद्धविराम और अंतरिम समझौते के मसौदे को यहीं अंतिम रूप दिया जा सकता है।
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Pakistan Diplomatic Setback: पाकिस्तान की उम्मीदों को लगा झटका
पाकिस्तान चाहता था कि यह ऐतिहासिक बैठक इस्लामाबाद में हो, ताकि वह खुद को क्षेत्रीय शांति प्रक्रिया का बड़ा खिलाड़ी दिखा सके। प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने हाल ही में "पीस टॉक-2" की बात भी कही थी। लेकिन बैठक दोहा शिफ्ट होने से पाकिस्तान की कूटनीतिक उम्मीदों को झटका लगा है। हालांकि पाकिस्तान अब भी अमेरिका और ईरान के बीच संदेश पहुंचाने का काम कर रहा है, लेकिन मुख्य बातचीत की कमान अब कतर और चीन के हाथों में दिख रही है।
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समझौते पर बन रही सैद्धांतिक सहमति
ईरान और अमेरिका के बीच कई मुद्दों पर शुरुआती सहमति बनती दिखाई दे रही है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने कहा कि कुछ अहम बिंदुओं पर सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है, लेकिन यह अभी तय नहीं है कि समझौता कब लागू होगा। दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी बातचीत में "अच्छी प्रगति" होने की बात कही है। दोनों पक्ष जल्द से जल्द अंतिम ड्राफ्ट तैयार करना चाहते हैं।
इजराइल की चिंता बढ़ी
रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका ने इस बातचीत में इजराइल को ज्यादा शामिल नहीं किया है। इससे इजराइली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu नाराज बताए जा रहे हैं। इजराइल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम का विरोध करता रहा है और किसी भी नरम समझौते के खिलाफ है। वहीं अमेरिका पर बढ़ते आर्थिक दबाव और वैश्विक तनाव कम करने की जरूरत ने ट्रंप प्रशासन को बातचीत की तरफ धकेला है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर कब होते हैं।












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