Vastu Tips : घर का मुख्य द्वार ऐसा हो जहां से आए सिर्फ सकारात्मक ऊर्जा
नई दिल्ली, 24 फरवरी। ईट-पत्थरों, सीमेंट का बना कोई भी मकान घर तब बनता है जब उसमें सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह हो। भारतीय वास्तुशास्त्र इसी बात पर जोर देता है कि मनुष्य जिस घर में रह रहा हो उसमें भीतर, बाहर, सब ओर सकारात्मक ऊर्जा सतत प्रवाहित होती रहे ताकिउसमें निवास करने वाले लोग सुखी, प्रसन्न और समृद्ध रह सकें। और सकारात्मक ऊर्जा का घर में प्रवेश करने का मुख्य स्थान वही होता है जिस स्थान से आप प्रवेश करते हैं। अर्थात् घर का मुख्य द्वार।

घर का मुख्य प्रवेश द्वार घर के भीतर सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश करने का सबसे प्रमुख और प्रथम स्थान होता है। इसलिए मुख्य प्रवेश द्वार बनाते समय उसकी दिशा, स्थिति, आकार-प्रकार आदि पर विशेषतौर पर ध्यान देना चाहिए। मुख्य प्रवेश द्वार कैसा हो इसके बारे में वास्तुशास्त्र में कुछ नियम बताए गए हैं, उनका पालन करना आवश्यक होता है।
मुख्य प्रवेश द्वार के कुछ नियम
सबसे पहली और प्रमुख बात, घर का मुख्य प्रवेश द्वार उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व में होना सबसे ज्यादा शुभ रहता है। इसका अर्थ यह हुआ किजब आप घर से बाहर जाएं तो आपका मुंह उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व की ओर होना चाहिए। इसके बाद उत्तर-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व दिशा वाले मुख्य प्रवेश द्वार भी ठीक कहे गए हैं।
- मुख्य प्रवेश द्वार लकड़ी से बना सबसे ज्यादा शुभ होता है। इस पर खुशनुमा और मन को प्रसन्न करने वाले रंग होने चाहिए।
- मुख्य प्रवेश द्वार पर काला रंग तो बिलकुल नहीं करना चाहिए।
- मुख्य प्रवेश द्वार के पास फव्वारा या कोई भी जल तत्व प्रधान वस्तु नहीं होनी चाहिए।
- मुख्य प्रवेश द्वार के पास या बाहर शू रैक या डस्टबिन बिलकुल न रखें।
- मुख्य प्रवेश द्वार के आसपास बाथरूम नहीं बनानी चाहिए।
- मुख्य प्रवेश द्वार को खूबसूरत चीजों से डेकोरेट करें। इस पर धार्मिक प्रतीक चिन्ह लगाना शुभ होता है।
- मुख्य प्रवेश द्वार पर जानवरों की प्रतिमाएं या चित्र नहीं लगाना चाहिए।
- मुख्य प्रवेश द्वार जब खोलें तो वह क्लाकवाइज दिशा में खुलना चाहिए।
- मुख्य प्रवेश द्वार पर कंटीले पौधे, कांटेदार फूल के पौधे भी नहीं लगाने चाहिए।












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