Vastu Tips: मल्टीस्टोरी बिल्डिंग में लेने जा रहे हैं फ्लैट तो भूलकर भी ना करें ये काम
Vastu Tips: आजकल बढ़ती जनसंख्या के कारण शहरों में जगह की कमी होने लगी है इसलिए मल्टीस्टोरी बिल्डिंग या कहें फ्लैट सिस्टम का चलन बढ़ गया है। जमीन की आसमान छूती कीमतों के कारण भी लोगों को मल्टी में फ्लैट लेना ज्यादा सुविधाजनक लगने लगा है।

लेकिन बिल्डिंग बनाते समय वास्तुशास्त्र के नियमों का अधिक ध्यान रखना पड़ता है। वास्तुशास्त्र में मल्टीस्टोरी भवन निर्माण के संबंध में कोई उल्लेख नहीं मिलता है किंतु भवन के प्रत्येक फ्लैट में वास्तु के नियम जमीन के मकान की तरह ही लागू होते हैं।
आइए जानते हैं फ्लैट वाली मल्टी के लिए कुछ नियमों के बारे में।
- भूमि चयन सावधानीपूर्वक करना चाहिए। भूमि चौकोर या आयताकार सर्वश्रेष्ठ होती है।
- इमारत का निर्माण भूमि के चारों दिशाओं में खाली स्थान छोड़कर किया जाना चाहिए। इसमें उत्तर व पूर्व की ओर अधिक तथा दक्षिण और पश्चिम की ओर कम खाली जगह छोड़नी चाहिए।
- भूखंड का ढलान उत्तर पूर्व की ओर होना शुभ रहता है।
- वास्तुशास्त्र के अनुसार बहुमंजिला इमारत में प्रथम तक की ऊंचाई अंतिम तल की ऊंचाई से कम होनी चाहिए।
- पूरी बिल्डिंग का प्रवेश द्वार पूर्व या उत्तर की होना शुभ रहता है।
- बहुमंजिला इमारतों में वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था पूर्व में होनी चाहिए। लॉन एवं पार्किंग ईशान में भी रखी जा सकती है।
- बहुमंजिला इमारतों में सीढ़ियां हमेशा घड़ी की सुई की दिशा में ऊपर जाती हुई होना चाहिए।
- पानी की टंकी भवन के सबसे ऊपर ईशान में बनाना चाहिए।
- बहुमंजिला इमारतों में नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम) कोण उठा हुआ होना चाहिए।
- इमारत के हर फ्लैट में सम संख्या में रोशनदान, खिड़की, दरवाजे होना चाहिए।
- किसी भी फ्लैट में टॉयलेट, स्नानगृह नैऋत्य य पश्चिम में ही होने चाहिए।
- रसोईघर हर फ्लैट के आग्नेय या दक्षिण दिशा में बनाना शुभ रहता है।
- फ्लैट के सभी कोण समकोण होना चाहिए, कोण वेध के कारण मल्टी किसी को फलीभूत नहीं होती है।
- किसी भी फ्लैट की लंबाई से चौड़ाई कम न हो।
- मल्टी का प्लेग्राउंड या गार्डन उत्तर या पूर्व में हो।
- बिल्डिंग को काला, नीला या लाल रंग नहीं करवाना चाहिए।












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