VASTU TIPS : कहीं गलत दिशा में भोजन करने से तो आप नहीं हो रहे हैं कंगाली के शिकार?
VASTU TIPS : घर का डायनिंग एरिया या जहां बैठकर आप भोजन करते हैं वह अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। क्योंकि भोजन ही आपको स्वस्थ रखने का सबसे बड़ा माध्यम है।

यदि भोजन करते समय या जिस जगह पर आप भोजन करते हैं उसका वास्तु ठीक नहीं है तो आप अस्वस्थ रहेंगे और भोजन का संपूर्ण लाभ आपको नहीं मिलेगी।
अस्वस्थ रहने से बीमारियों पर खर्च भी अधिक होगा और लगातार किसी न किसी परेशानी में घिरे रहेंगे, तो चलिए आज जानते हैं डायनिंग एरिया के वास्तु के बारे में।
- सबसे पहली बात डायनिंग रूम किस दिशा में होना चाहिए? इस सवाल का जवाब यह है कि घर में डायनिंग एरिया हमेशा पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में बनाना चाहिए। इस दिशा में बैठकर भोजन करने से रोग नहीं आते और घर के सदस्यों में आपसी प्रेम बना रहता है।
- डायनिंग रूम को बेडरूम के अंदर या घर के मध्य में नहीं होना चाहिए। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बाधित होती है और उस जगह बैठकर भोजन करने वालों को कोई न कोई पेट संबंधी रोग हमेशा बना ही रहता है।
- डायनिंग टेबल इस तरह लगाई जानी चाहिए कि भोजन करते समय घर के मुखिया का मुंह पूर्व या उत्तर की ओर होना चाहिए। इस तरह से भोजन करने से घर के सदस्यों में प्रेम बना रहता है और सभी की पाचन शक्ति भी अच्छी रहती है।
- डायनिंग रूम के रंग का भी बहुत महत्व होता है। डायनिंग रूम का रंग हमेशा खिला-खिला और सूदिंग होना चाहिए। पीला रंग डायनिंग रूम के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। डार्क और डल कलर लगाने से बचना चाहिए।
- डायनिंग रूम में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था होना चाहिए। प्राकृतिक रोशनी और हवा आदि आए तो सबसे बेहतर होता है, अन्यथा कृत्रिम रोशनी भी पर्याप्त और पूरी सफेद होनी चाहिए।
- डायनिंग एरिया को साफ-सुथरा रखना चाहिए। यहां टूटे फर्नीचर, टूटा शीशा या अन्य ऐसी वस्तुएं नहीं होना चाहिए जिनके नकारात्मक ऊर्जा उत्सर्जित होती हो। डायनिंग एरिया में जूते-चप्पल रखने का स्थान भी नहीं होना चाहिए।
- डायनिंग टेबल हमेशा लकड़ी की होनी चाहिए और इसका आकार चौकोर या आयाताकार होना चाहिए। अंडाकार, ओवल शेप की डायनिंग टेबल नहीं होनी चाहिए।
- डायनिंग रूम से टॉयलेट, बाथरूम, वॉशरूम आदि दूर होना चाहिए।












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