Surya Grahan 2019: सूर्य ग्रहण के समय खाने से शरीर पर पड़ता है क्या प्रभाव
Surya Grahan 2019: सूर्य ग्रहण के समय खाने से शरीर पर पड़ता है क्या प्रभाव
नई दिल्ली। 26 दिसंबर 2019 को साल का आखिरी सूर्य ग्रहण लग रहा है। इस सूर्य ग्रहण के समय दुर्लभ संयोग बन रहा है। ज्योतिष विद्वानों के मुताबिक 296 सालों के बाद आज सूर्य ग्रहण के दौरान दुर्लभ संयोग बन रहा है। सूर्य ग्रहण पौष अमावस्या पर गुरुवार को लग रहा है। यह अंगूठी जैसा सूर्य ग्रहण होगा जिसमें सूर्य एक आग की अंगूठी की तरह लगेगा। ज्योतिषज्ञाताओं के ऐसा दुर्लभ सूर्यग्रहण 296 साल पहले सात जनवरी 1723 को हुआ था। ग्रहण का मानव शरीर पर शक्तिशाली प्रभाव पड़ता है। ग्रहण को लेकर कई धारणाएं हैं जो वर्षों से चली आ रही है। लोगों को ग्रहण के समय घर से बाहर न निकलें, खाना न खाने की सलाह दी जाती है।

सूर्य ग्रहण के समय न खाएं खाना!
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक सूर्य ग्रहण या फिर चंद्र ग्रहण के दौरान खाना नहीं खाना चाहिए। ग्रहण के दौरान सालों से चली आ रही इन प्रथाओं का पालन किया जाता है। माना जाता है कि सूर्य ग्रहण के दौरान खाना खाने से शरीर पर दुष्प्रभाव पड़ते हैं। आर्यवेद के विद्वानों के मुताबिक सूर्य ग्रहण के दौरान हानिकारक किरणें निकलती है। वहीं सूर्य ग्रहण के दौरान जब चंद्रमा सूर्य को ढंक लेता है तो प्रकाश की अनुपस्थिति के कारण हो सकता है कि हानिकारक बैक्टीरिया और कीटाणु खाने को दूषित कर सकते हैं। ये खाना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होता है।

सूर्य ग्रहण के समय खाने से शरीर पर प्रभाव
सूर्य की रोशनी की अनुपस्थिति में खाने की दूषित होने की बात पहले का प्रचलन है जिसे लोग आज तक मानते आ रहे हैं। उस दौरान लोगों के घर कच्चे होते थे, जगहों में रहते थे, जिसकी वजह से खाने के दूषित होने की संभावना अधिक होती थी। इसका वैज्ञानिक सिद्धांतों से साबित करना अभी बाकी है। जानकारों का कहना है कि सूर्य ग्रहण या चंद्र ग्रहण के दौरान कोई सलाह नहीं दी जाती है कि खाना एकदम छोड़ दें, लोगों को हल्का खाना खाना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि ग्रहण के दौरान आपके शरीर में एक कूलिंग इफेक्ट होता है, जो पाचन तंत्र को धीमा कर देता है। हल्का खाना पचने में आसान होता है।
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सूर्य ग्रहण के समय बंद होते हैं मंदिरों के कपाट
शास्त्रों और पुराणों में कहा गया है कि ग्रहण काल में भगवान की मूर्ति को स्पर्श नहीं किया जाता है। सूतक काल लगुने के बाद ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि देवी-देवताओं को ग्रहण के समय पड़ने वाले बुरे प्रभावों से बचाया जा सके।












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