हृदय रेखा से जानें व्यक्ति क्रूर होगा या दयालु
हस्तरेखा विज्ञान में चार प्रमुख रेखाओं जीवन रेखा, मस्तिष्क रेखा, हृदय रेखा और भाग्य रेखा का अध्ययन किया जाता है।
नई दिल्ली। हस्तरेखा विज्ञान में चार प्रमुख रेखाओं जीवन रेखा, मस्तिष्क रेखा, हृदय रेखा और भाग्य रेखा का अध्ययन करके संपूर्ण जीवन के बारे में भविष्य कथन किया जाता है, लेकिन कई भविष्यवक्ता जीवन रेखा और भाग्य रेखा को ही मूल रेखाएं मानकर भविष्य कथन करते हैं। यह सही नहीं है। हृदय रेखा का महत्व भी अन्य तीनों रेखाओं के समान है और बल्कि उनसे भी कहीं अधिक है। इसलिए हस्तरेखा के विद्वानों को हृदय रेखा का भी गहराई से अध्ययन करना चाहिए।
हृदय रोग आदि के बारे में जानकारी हासिल की जाती है
हृदय रेखा मूलतः पिता की कारक होती है। इससे पिता, व्यक्ति के स्वभाव, आचरण, व्यक्तित्व, दयालुता, हृदय रोग आदि के बारे में जानकारी हासिल की जाती है। जिस व्यक्ति के हाथ में हृदय रेखा शुद्ध, स्पष्ट, निर्दोष और लालिमा लिए हुए होती है, वह व्यक्ति अपने जीवन में पूर्व सफल होता है और उसे परिवार, समाज में खास अहमियत प्राप्त होती है। इसके विपरीत यदि हृदय रेखा अस्पष्ट, कमजोर, टूटी हुई, जाली और अन्य रेखाओं से कट रही हो तो ऐसा व्यक्ति उपर से चाहे कितना भी उदार दिखने का प्रयास करे, भीतर से वह स्वार्थी, क्रूर, पापी, दूसरों के धन पर नजर रखने वाला होता है। ऐसा व्यक्ति किसी के विश्वास का पात्र नहीं हो सकता।
हृदय रेखा के प्रकार
हृदय रेखा हथेली में कनिष्ठिका अंगुली के नीचे बुध पर्वत के नीचे से निकलकर सूर्य तथा शनि के क्षेत्रों को पार करती हुई गुरु पर्वत तक जाती है, लेकिन सभी हाथों में यह स्थिति नहीं होती। हस्तरेखा विज्ञान में मोटे तौर पर हृदय रेखा को पांच प्रकार का बताया गया है:-
1. बुध पर्वत के नीचे से प्रारंभ होकर सूर्य और शनि पर्वत के नीचे से जाती हुई गुरु पर्वत पर जाकर समाप्त हो।
2. बुध पर्वत के नीचे से प्रारंभ होकर सूर्य, शनि, गुरु पर्वत को पार करके हथेली के पार तक पहुंचे।
3. बुध पर्वत के नीचे से निकलकर सूर्य पर्वत के नीचे समाप्त हो।
4. बुध पर्वत के नीचे से निकलकर शनि पर्वत के नीचे समाप्त हो।
5. बुध पर्वत के नीचे से निकलकर तर्जनी और मध्यमा के बीच में जाकर समाप्त हो।

पहला प्रकार
जिस व्यक्ति के हाथ में हृदय रेखा बुध पर्वत के नीचे से प्रारंभ होकर सूर्य और शनि पर्वत के नीचे से जाती हुई गुरु पर्वत पर जाकर समाप्त हो, तो वह सर्वश्रेष्ठ रेखा कहलाती है। ऐसा व्यक्ति दूसरों की भलाई करने वाले, निष्पक्ष, स्वतंत्र विचारों वाले तथा प्रेम के क्षेत्र में धैर्य से काम लेने वाले होते हैं। ऐसे व्यक्ति अपने जुबान के पक्के होते हैं। एक बार किसी से वादा कर लिया तो उसे हर हाल में निभाते हैं। ऐसा व्यक्ति अपनी पत्नी को सर्वाधिक महत्व देता है, लेकिन यह भी सच है कि इनके जीवन में प्रेमिकाएं भी बहुत होती हैं। ऐसा व्यक्ति अपने प्रयत्नों से यश, मान, पद, प्रतिष्ठा प्राप्त करता है।

दूसरा प्रकार
जिस व्यक्ति की हथेली में हृदय रेखा बुध पर्वत के नीचे से प्रारंभ होकर गुरु पर्वत के नीचे से होते हुए हथेली के पार निकल जाती हो, यह स्थिति बहुत कम लोगों के हाथ में देखने को मिलती है। जिन लोगों के हाथ में ऐसी रेखा हो वे जरूरत से ज्यादा महत्वाकांक्षी होते हैं और अपने प्रयासों से अपने जीवन को सुखमय बनाते हैं। कठोर परिश्रमी लोगों के हाथों में ऐसी ही हृदय रेखा होती है। इस रेखा के बारे में एक जरूरी तथ्य यह है कि यह जहां समाप्त होती है उस स्थान का बारीकी से अध्ययन करना जरूरी है। यदि अंत में यह रेखा नीचे की ओर झुक जाए तो व्यक्ति के जीवन की इच्छाएं अधूरी रह जाती है। और यदि यह रेखा अंत में उपर की ओर उठे तो वह व्यक्ति अपने लक्ष्य तक जरूर पहुंचता है। ऐसे व्यक्ति को पद, मान, प्रतिष्ठा, धन प्राप्त होता है।

तीसरा प्रकार
तीसरे तरह की हृदय रेखा बुध पर्वत के नीचे से प्रारंभ होकर सूर्य पर्वत के नीचे समाप्त हो जाती है। ऐसा व्यक्ति पूरा जीवन कुंठा में जीता रहता है। अदूरदर्शी होने के कारण हमेशा गलत निर्णय लेता है। ये दिल के कमजोर होते हैं। छोटी-छोटी बातों पर चिढ़ जाते हैं। दुखी मनुष्यों की सहायता करने की बजाय से उनका उपहास करते हैं। ऐसे व्यक्ति जीवन में कभी सफल नहीं होते। दूसरों की निंदा करना ये अपना सौभाग्य मानते हैं। ऐसे व्यक्ति हृदय रोगों से पीडि़त रहते हैं। इनकी मृत्यु हार्ट अटैक से होती है।

चौथा प्रकार
चौथी तरह की हृदय रेखा वह होती है जो बुध पर्वत के नीचे से प्रारंभ होकर शनि पर्वत के नीचे समाप्त होती है। ऐसे व्यक्ति कई स्त्रियों से प्रेम करते हैं और सभी को धोखा देते हैं। इनका सामना छल, कपट से होता रहता है। हस्तरेखा विद्वान ऐसे लोगों पर भरोसा नहीं करने की सलाह देते हैं। इनका प्रेम सात्विक न होकर वासना पूर्ति का एक साधन होता है। झूठा प्रचार, झूठी शान दिखाना, दिखावा करना इन्हें पसंद होता हैं। मतलबी और स्वार्थ किस्म के लोगों के हाथ में इसी तरह की हृदय रेखा होती है।

पांचवा प्रकार
जिन व्यक्तियों के हाथ में हृदय रेखा बुध पर्वत के नीचे से निकलकर तर्जनी और मध्यमा अंगुली के बीच में जाकर समाप्त होती है वे व्यक्ति आत्म केंद्रित होते हैं। ऐसे व्यक्ति परिश्रमी तथा अपने लक्ष्य को पाने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। कई बार इनको काफी प्रयत्नों के बाद भी सफलता नहीं मिलती। ऐसे व्यक्तियों का दिमाग तेज होता है और ये काम बड़े उत्साह से शुरू करते हैं और जल्दी ही उससे उब जाते हैं। ऐसे व्यक्ति प्रायः एकांत पसंद होते हैं। पारिवारिक आयोजनों में शामिल होने की ख्वाहिश जरूर मन में रखते हैं, लेकिन जब जाने का मौका आता है तो पीछे हट जाते हैं।
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