Surya Grahan-Chandra Grahan 2025: नए साल में लगेंगे 4 ग्रहण, क्या भारत में दिखाई देंगे?
Surya Grahan-Chandra Grahan 2025: हर वर्ष अनेक खगोलीय घटनाएं होती हैं, जिनमें से प्रमुख है ग्रहण। सूर्य और चंद्र ग्रहण हर साल होते हैं और साल 2025 में भी होने वाले हैं। साल 2025 में चार ग्रहण होने वाले हैं जिनमें दो चंद्र ग्रहण और दो सूर्य ग्रहण होंगे।
लेकिन इनमें से केवल एक ग्रहण ही भारत में दिखाई देगा बाकी ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होंगे। भारत में जो ग्रहण दिखाई देगा वह होगा खग्रास चंद्र ग्रहण जो 7-8 सितंबर की मध्यरात्रि में होगा।

2025 में लगने वाले ग्रहण
- खग्रास चंद्र ग्रहण : संवत 2081 फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा शुक्रवार दिनांक 14 मार्च 2025, यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।
- खंडग्रास सूर्य ग्रहण : संवत 2081 चैत्र कृष्ण अमावस्या शनिवार दिनांक 29 मार्च 2025, यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।
- खग्रास चंद्र ग्रहण : संवत 2082 भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा रविवार दिनांक 7-8 सितंबर 2025, यह भारत में दिखाई देगा।
- खग्रास सूर्य ग्रहण : संवत 2082 आश्विन कृष्ण अमावस्या रविवार दिनांक 21 सितंबर 2025, यह भारत में दिखाई नहीं देगा।
भारत में दृश्य (दिखाई देने वाले) चंद्र ग्रहण का विवरण इस प्रकार है -
खग्रास चंद्र ग्रहण विक्रम संवत 2082 भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा रविवार दिनांक 7-8 सितंबर 2025 को रात्रि में समस्त भारत में यह चंद्र ग्रहण (दृश्य) दिखाई देगा।
- ग्रहण स्पर्श (प्रारंभ) - 7 सितंबर- रात्रि 9 बजकर 58 मिनट
- ग्रहण सम्मीलन- 7 सितंबर- रात्रि 11 बजकर 01 मिनट
- ग्रहण मध्य- 7 सितंबर- रात्रि 11 बजकर 43 मिनट
- ग्रहण उन्मीलन- 8 सितंबर- रात्रि 12 बजकर 23 मिनट
- ग्रहण मोक्ष (समाप्त)- 8 सितंबर- रात्रि 1 बजकर 27 मिनट
- ग्रहण का कुल पर्व काल- 3 घंटा 29 मिनट
ग्रहण सूतक
इस खग्रास चंद्र ग्रहण का सूतक भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा रविवार दिनांक 7 सितंबर 2025 को ग्रहण प्रारंभ (स्पर्श) के तीन प्रहर (9 घंटा) पूर्व अर्थात मध्याह्न में 12 बजकर 58 मिनट से प्रारंभ होगा। सूतक आरंभ होने के पूर्व भागवत सप्ताह का समापन व प्रसाद वितरण आदि कार्य पूर्ण किया जा सकता है।
सूतककाल में भी पार्वण श्राद्ध कर सकते हैं
इस दिन पूर्णिमा का महालय श्राद्ध है। अतः सूतककाल में भी पार्वण श्राद्ध कर सकते हैं। केवल ब्राह्मण भोजन ही सूतककाल में निषेध है। पकवान्न वर्जित है, आमान्न (सीदा) दिया जा सकता है। इस सूतककाल के प्रारंभ होते ही आस्तिक जनों को भोजन, शयन तथा अन्य सांसारिक सुखों का त्याग करना चाहिए।
ग्रहणकालावधि में अपने इष्टदेवता की आराधना करनी चाहिए
बालक, वृद्ध, रोगी एवं आतुरजन सात्विक भोजन पदार्थ आवश्यक मात्रा मे ग्रहण आरंभ होने से पांच घंटे पूर्व तक आवश्यकता में ग्रहण कर सकते हैं। ग्रहणकालावधि में अपने इष्टदेवता की आराधना करनी चाहिए।
सात्त्विक भोजन का सेवन किया जा सकता है
मध्यरात्रि में 1 बजकर 27 मिनट बाद गंगा, यमुना, नर्मदा, क्षिप्रा आदि एवं अन्य समीपवर्ती नदियों-सरोवरों-जलाशयों के पवित्र जल से सचैल (ग्रहणकाल में जो वस्त्र धारण किए हैं, उन सभी वस्त्रों सहित) स्नान कंरे, शुद्ध चंद्र बिंब का दर्शन करें। तत्पश्चात् ग्रहण समाप्ति के बाद शुद्धता के साथ बनाए गए पवित्र सात्त्विक भोजन का सेवन किया जा सकता है।
कुंभ राशि में होगा यह ग्रहण
यह ग्रहण पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र कुंभ राशि में होगा। जिनका जन्म नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद, कुंभ राशि, कुंभ लग्न है उनके लिए विशेष अरिष्टप्रद है। मेष, वृषभ, कन्या व धनु राशि वालों के लिए श्रेष्ठ। मिथुन, सिंह, तुला, मकर राशि वालों को शुभाशुभ मध्यम फलप्रद तथा शेष राशि कर्क, वृश्चिक, कुंभ व मीन राशि वालों को अरिष्टप्रदायक है।
क्या उपाय करें
जिन राशि वाले जातकों को ग्रहण का अशुभ फल है वे चांदी का चंद्र व नाग बनाकर ग्रहण समाप्ति के बाद सविधि इनका दान करें, सुख-शान्ति प्रदायक होगा। कुंभ राशि में ग्रहण होने पर पश्चिमी देशों के पर्वतवासी पीड़ित होवे, हाथी व तस्करों से प्रजा भयभीत होवे, एरण्ड, मूंगफली, सरसों, तिल व तेल के मूल्यों में तेजी आएगी। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र से चना आदि धान्य में तेजी आएगी। भाद्रपद पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण होना प्रजा में सुभिक्ष व सौख्यप्रदायक है। रविवार को चंद्र ग्रहण होने से वर्ष मध्यम फलकारक होवे। लोहा, स्टील, तेल व घी में तेजी, कहीं अराजकता सत्तासंघर्ष (राजयुद्ध) की स्थिति बने। चंद्र ग्रहण पर बुध की पूर्ण दृष्टि होने पर शहद, पीला धान्य, सोयाबीन, मक्का आदि, सोना, पीतल, हल्दी इत्यादि में तेजी का वातावरण बनेगा।












Click it and Unblock the Notifications