Guru Chandal Yoga: कुंडली के जिस घर में बने उसी का नाश करे
नई दिल्ली, 15 जुलाई। वैदिक ज्योतिष में अनेक शुभ अशुभ योगों का वर्णन मिलता है। इन्हीं में से एक सर्वाधिक चर्चित और प्रभावी योग है गुरु चांडाल योग। आमजन में भी अक्सर इस योग की चर्चा होती है। गुरु चांडाल योग राहु और गुरु की युति से बनने वाला योग है। जिस कुंडली में गुरु और राहु किसी भी घर में एक साथ बैठे हों तो गुरु चांडाल योग बनता है। यह अत्यंत अशुभ योगों में से एक है। जिस कुंडली में यह योग होता है वह जातक शिक्षा, धन, व्यवहार, नैतिकता और चरित्र के मामले में बुरा होता है। कुंडली के जिस घर से यह योग बनता है उसका नाश करता है। अर्थात् उस घर से संबंधित सुखों में कमी होती है।

कितना होता है प्रभाव
गुरु चांडाल योग का व्यापक प्रभाव होता है। गुरु चांडाल योग कितना प्रभावी है यह गुरु और राहु के अंश देखकर पता किया जाता है। कुंडली में यदि राहु के अंश अर्थात डिग्री से गुरु का अंश अधिक हो तो यह कमजोर गुरु चांडाल योग होता है। यदि राहु के अंश अधिक हैं तो यह अत्यंत प्रभावी योग होगा। यदि गुरु की राशि धनु और मीन में गुरु चांडाल योग बने तो भी अधिक प्रभावी नहीं होता है।
क्या होता है प्रभाव
- प्रथम भाव में बना योग शारीरिक और मानसिक रूप से जातक को अत्यंत परेशान करता है। जातक रोगी होता है।
- द्वितीय भाव में बना योग धन तो खूब देता है किंतु वह ध्यान भोग विलास और गलत कार्यो में व्यय होता है।
- तृतीय भाव में बना योग जातक को अपराधी और शातिर बनाता है। ऐसा जातक बाहुबली होता है।
- चतुर्थ भाव में बना योग भौतिक सुख-सुविधाएं छीन लेता है। माता को हमेशा कष्ट रहता है।
- पंचम भाव में बना योग जातक को शिक्षा से वंचित रखता है। जातक प्रेम संबंधों के मामलों में भी असफल रहता है।
- छठे भाव में बना योग जातक को रोगी बनाता है। शत्रुओं से पराजित होता रहता है।
- सप्तम भाव में बना योग वैवाहिक जीवन कष्टमय करता है। जातक साझेदारी के कार्यो में बड़ा धोखा खाता है।
- अष्टम भाव में बना योग आकस्मिक रूप से बड़ी घटना-दुर्घटनाएं करवाता है।
- नवम भाव का योग भाग्य में कमी लाता है। कड़ी मेहनत करने के बाद भी जातक को सफलता नहीं मिलती।
- दशम भाव का योग कार्य में हमेशा अस्थिर रखता है। आजीविका का संकट बना रहता है।
- एकादश का योग आय में कमी दर्शाता है। कमाई होने के बावजूद जातक बचत नहीं कर पाता।
- द्वादश का योग मुकदमों में फंसा देता है। खर्च अत्यधिक करवाता है।
उपाय क्या है
गुरु चांडाल योग का प्रभाव कम करने के लिए राहु और गुरु दोनों की शांति करवाना आवश्यक है। दोनों ग्रहों के निमित्त वस्तुओं का दान किया जाता है। दोनों ग्रहों के मंत्रों का जाप किसी पंडित से करवाएं। बुजुर्गो की सेवा करें।












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