Chandra Grahan 2023: क्यों कुवारों के लिए अच्छा नहीं होता चंद्र ग्रहण?

Chandra Grahan 2023: चंद्र ग्रहण का असर ग्रहों पर पड़ता है और ग्रहों की चाल लोगों के जीवन को प्रभावित करती है।

Chandra Grahan 2023:

Chandra Grahan 2023 & Bachelors: साल 2023 का पहला चंद्र ग्रहण आज रात 08: 45 PM पर लगने जा रहा है। 4 घंटे 15 मिनट का ये ग्रहण देर रात 6 मई को 1.00 बजे समाप्त होगा। हालांकि इंडिया में ये प्रभावी नहीं है।

भारत के कुछ हिस्सों में दिखेगा ग्रहण

लेकिन TimeandDate.com के मुताबिक ये ग्रहण भारत के कुछ हिस्सों में जरूर नजर आएगा। वैसे तो ये खगोलीय घटना है जो हर साल घटती है लेकिन वैदिक धर्म में ग्रहण को अच्छा नहीं मानते हैं इसलिए बड़े बुजुर्ग अक्सर ग्रहण के दौरान गर्भवती स्त्रियों और अविवाहितों को चांद का दीदार करने से रोकते हैं।

नकारात्मक शक्तियां ब्रह्मांड में विचरण करती हैं

उनका मानना है कि इस दौरान बहुत सारी नकारात्मक शक्तियां ब्रह्मांड में विचरण करती हैं जिसका असर गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है इसलिए वो ग्रहण काल में गर्भवती महिलाओं को बाहर से जाने से रोकते हैं।

कुवारे लोगों को चांद का दर्शन करने से रोका जाता है

तो वहीं अविवाहितों को ग्रहण काल के दिन चांद का दीदार करने से रोकने के लिए बड़ा ही रोचक प्रसंग बताया जाता है। कहते हैं इसके पीछे कारण चांद को भगवान गणेश से मिला एक श्राप है, जिसकी वजह से चांद का वैवाहिक जीवन प्रभावित हुआ था, उसे अपने पत्नियों से दूर होना पड़ा था इसलिए कुवारे लोगों को चांद का दर्शन करने से रोका जाता है, माना जाता है चंद्र दर्शन से उनकी शादी में बाधा आएगी और अगर शादी हो भी जाए तो भी वैवाहिक संबंध अच्छा नहीं रहेगा।

क्या है कथा?

कहते हैं कि एक बार गणेश जी मूष की सवारी कर रहे थे लेकिन मूष उस दिन उनसे अठखेलियां करने के मूड में था और इसलिए वो बार-बार भाग जा रहा था इसी दौड़ भाग में गणेश जी मूष की पीठ से नीचे गिर पड़े। लेकिन 'कोई देख ना ले,ये सोचकर वो झट से जमीन से उठे लेकिन इसी बीच उन्हें किसी के जोर-जोर से हंसने की आवाज सुनाई पड़ी। उन्होंने इधर -उधर देखा तो पाया चंद्रमा उनका मजाक उड़ा रहा है।

'आज के बाद तू घटता-बढ़ता रहेगा...'

इस पर गणपति जी को गुस्सा आ गया, उन्होंने उसे श्राप दिया कि 'तुझे अपने ऊपर बहुत घमंड है ना, जा मैं तुझे श्राप देता हूं कि आज के बाद तू घटता-बढ़ता रहेगा और तुझसे प्यार करने वाले सब दूर हो जाएंगे और जो कोई भी तुझे देखेगा, वो भी कलंक का भागीदार बनेगा।' भगवान के इस श्राप के बाद चांद का आकार घटने-बढ़ने लगा, उसकी सारी पत्नियां उससे दूर हो गई, उसका सारा घमंड चकनाचूर हो गया, उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और फिर उसने गणेश जी से माफी मांगी और उनकी लंबे वक्त तक पूजा की।

पूर्णिमा के दिन पूरे आकार में दिखोगे

जिस पर विघ्नहर्ता प्रसन्ना हुए और उन्होंने चांद से वरदान मांगने को कहा, जिस पर चांद ने कहा कि 'प्रभु आप मुझे पहले जैसे कर दीजिए, मैं आज के बाद किसी का मजाक नहीं उड़ाऊंगा। इस पर गणेश जी ने कहा कि मैं अपना श्राप तो वापस नहीं ले सकता हूं लेकिन वरदान देता हूं कि पूर्णिमा के दिन पूरे आकार में और बहुत सुंदर दिखोगे और लोग तुम्हारी पूजा करेंगे लेकिन उन्हें तुम्हारी परछाई की पूजा करनी होगी। तुम्हारे सभी प्रेम करने वाले तुम्हारे निकट आ जाएंगे।'

वैवाहिक जीवन प्रभावित होता है

इसी के बाद से पूर्णिमा के दिन चांद की पूजा होने लग गई। वो इस दिन काफी चमकीले और पूरे आकार में होते हैं। लोग उनकी पूजा जल में परछाई देखकर या छन्नी के जरिए करते हैं। अब चूंकि चंद्रमा का वैवाहिक जीवन गणपति के श्राप के कारण प्रभावित हुआ था इसलिए अविवाहितों को भी चांद के दीदार से रोका जाता है।

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