अखिलेश सरकार पर कब तक रहेगा परिवार के झगड़े का असर.. क्या कहते हैं सितारे?

लखनऊ। किसानों के हमदर्द व जमीनी नेता मुलायम सिंह यादव मझधार में फंसे हुये नजर आ रहें है। पार्टी में बगावत के सुर का शंखनाद हो चुका है। यह बगावत कोई दूसरा नहीं अपने ही कर रहें है। इस वर्चस्व की लड़ाई को शान्त करने के लिए मुलायम पिता और बड़े भाई दोनों की भूमिका में सन्तुलन बनायें रखने की पूरी कोशिश कर रहे है किन्तु हालात दिन पर दिन खराब होते नजर आ रहे है। इसी के चलते यूपी सरकार पर इस समय संकट के बादल छाये हुये है।

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आइये जानते है इस संकट के बादलों से कब राहत मिलेगी?

यूपी की नाम राशि धनु है, जिसका स्वामी गुरू राज्य के संकेतक भाव दशम में नीच के शुक्र के साथ बैठा है। शुक्र षष्ठेश व लाभेश होकर नीच भाव में स्थित है। षष्ठम भाव शत्रु का कारक होता है, इसलिए अपने ही विरोधी बनकर राज्य के मुखिया को पीडि़त कर रहें है। दशम भाव में कन्या राशि है, जिसका स्वामी बुध 29 अगस्त से अस्त व वक्री होकर शुक्र के नक्षत्र पूर्वाफाल्गुनी में भ्रमण कर रहा है। बुध युवा ग्रह है और यूपी के मुख्यमन्त्री भी युवा ही है। जिस कारण मुख्यमन्त्री को षडयन्त्र का शिकार बनाया जा रहा है।

अशुभ संकेत

न्याय का अधिष्ठाता व राजनीति में मुख्य भूमिका निभाने वाला शनि और सेनापति मंगल दोनों ही जहरीली राशि वृश्चिक में है। यूपी की कुण्डली में यह स्थिति 12वें भाव में बन रही है। जो अशुभ संकेत है। साथ में मंगल अपने ही नक्षत्र चित्रा में 13 सितम्बर से 21 सितम्बर तक रहेगा। मंगल सेनापति है और आज की भाषा में इसे मुख्य सचिव कहा जायेगा। 13 सितम्बर को ही पाट्री में विवाद शुरू हुआ और जिसका सबसे पहले दुष्प्रभाव मुख्य सचिव पर पड़ा।

बुध युवा है और दशम भाव का मालिक

बुध 29 अगस्त से 19 सितम्बर तक अस्त रहेगा एंव 22 सितम्बर तक वक्री रहेगा। बुध युवा है और दशम भाव का मालिक भी है। दशम भाव राज्य का कारक होता है। शनि द्वितीयेश व तृतीयेश होकर द्वादश भाव में बैठा है। 17 सितम्बर को शनि बुध के नक्षत्र ज्येष्ठा में प्रवेश करेगा। सूर्य 16 सितम्बर को कन्या राशि में आ जायेगा और लग्नेश व चतुर्थेश गुरू अष्टमेश चन्द्रमा के नक्षत्र हस्त में गोचर कर रहा है।

अखिलेश यादव का पलड़ा भारी रहेगा

इन सभी संकेतो के आधार पर निष्कर्ष यह निकलता है कि सपा पार्टी में घमासान की स्थिति बनी रहेगी। अन्त में अखिलेश यादव का पलड़ा भारी रहेगा और शिवपाल यादव को हथियार डालकर सन्तोष ही करना पड़ेगा। 21 सितम्बर तक यूपी की सरकार में उथल-पुथल मची रह सकती है।

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