India AI Mission: मोदी सरकार का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में बंपर निवेश, ₹1,500 करोड़ खर्च करने की तैयारी
India AI Mission: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी को पूरी दुनिया अब तेजी से अपना रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दशक में यह तकनीक पब्लिक हेल्थ, ट्रांसपोर्ट से लेकर पढ़ाई और दूसरे सेक्टर में हावी हो जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई बार कह चुके हैं कि भारत का आने वाला समय टेक्नोलॉजी और रिसर्च का है। भारत सरकार अगले हफ्ते इंडिया एआई मिशन (India AI Mission) के तहत ₹1,500 करोड़ की राशि के दूसरे राउंड के लाभार्थियों की घोषणा करने जा रही है। यह मिशन देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास और उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, इस राउंड में कई बड़ी और उभरती कंपनियां शामिल हो सकती हैं। AI बेस्ड मॉडल्स और एप्लिकेशन तैयार कर रही हैं। इन संभावित लाभार्थियों में अवतार एआई (Avataar.ai), टेक महिंद्रा (Tech Mahindra), फ्रेक्टर एनालिटिक्स (Fractal Analytics), जेनलूप (Genloop), इंटेलिहेल्थ (IntelliHealth), शोध एआई (Shodha AI) और जेनेटिक एआईटेक इनोवेशन (Zenteiq Aitech Innovations) जैसी कंपनियों के नाम सामने आ रहे हैं।

India AI Mission: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पहल
भारत सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में एआई आधारित तकनीकें देश की अर्थव्यवस्था और उद्योगों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती हैं। India AI Mission के जरिए AI रिसर्च और नए प्रयोगों (innovation) को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, देश में AI स्टार्टअप्स को भी बड़ा सहारा मिलेगा। इस मिशन के लाभार्थियों में कई नामचीन कंपनियों के साथ ही स्टार्टअप भी शामिल हैं। इस टेक्नोलॉजी के जरिए भारत की कोशिश तकनीक की दुनिया में खुद को साबित करना है।
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Artificial Intelligence का इन सेक्टर में होगा इस्तेमाल
विशेषज्ञों का कहना है कि इस पहल से आने वाले समय में हेल्थकेयर, शिक्षा, डेटा एनालिटिक्स, ई-गवर्नेंस और टेक्नोलॉजी सेक्टर को सबसे ज्यादा लाभ मिलेगा। खास तौर पर हेल्थकेयर में AI डायग्नोस्टिक मॉडल्स और डिजिटल हेल्थ टूल्स को तेजी से अपनाया जा सकेगा। भारत पहले से ही डिजिटल टेक्नोलॉजी में तेजी से आगे बढ़ रहा है। अब सरकार के इस कदम को देश को AI सुपरपावर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि AI मिशन से देश की वैश्विक स्तर पर पहचान मजबूत होगी और भारत अगले दशक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हब बन सकता है। सरकार अगले हफ्ते इस सूची की घोषणा करेगी और इसके बाद चुनी गई कंपनियों को अपने प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू करने की अनुमति दी जाएगी।
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