Illegal Bangladeshi: अवैध बांग्लादेशियों को भगाना शुरू! बिना वारंट गिरफ्तारी का अधिकार, अब तक कितने पकड़े?
Illegal Bangladeshi: भारत में सालों से अवैध तरीके से रह रहे बांग्लादेशियों के लिए अब एक-एक दिन मुश्किल हो गया है। सत्ता परिवर्तन के साथ ही उनकी पहचान सामने लाने और उन्हें बांग्लादेश डिपोर्ट करने का सिलसिला बड़े पैमाने पर शुरू हो गया है। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना और मालदा से सामने आई तस्वीरें बताती हैं कि भारत सरकार अब इस मामले पर सख्ती के साथ काम कर रही है।
बॉर्डर पार लौटने पहुंचे 100 से ज्यादा लोग
उत्तर 24 परगना जिले के बशीरहाट स्थित हाकिमपुर चेकपोस्ट पर 100 से ज्यादा बांग्लादेशी पुरुष और महिलाएं अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर अपने देश लौटने के लिए पहुंच गए। बताया जा रहा है कि इनमें से कई लोग लंबे समय से पश्चिम बंगाल के अलग-अलग इलाकों में अवैध रूप से रह रहे थे।

सरकार की सख्ती और वापसी
हाल ही में सरकार द्वारा विदेशी नागरिकों के लिए डिटेंशन सेंटर यानी हिरासत केंद्र बनाने और अवैध प्रवासियों के निर्वासन को लेकर की गई घोषणाओं के बाद सीमा क्षेत्रों में हलचल बढ़ गई है। यह भीड़ तब देखने को मिली जब भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने "पहचानो, हटाओ और निर्वासित करो" नीति लागू करने की बात कही।
सुवेंदु अधिकारी ने क्या कहा?
बीएसएफ अधिकारियों के साथ हुई एक बैठक में सुवेंदु अधिकारी ने कहा था कि जो लोग नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के दायरे में नहीं आते, उन्हें अवैध घुसपैठिया माना जाएगा। उन्होंने साफ कहा, "जो लोग CAA के तहत नहीं आते, वे घुसपैठिए हैं। उन्हें राज्य पुलिस गिरफ्तार कर BSF को सौंपेगी।"
जिलों में बनाए जा रहे हैं होल्डिंग सेंटर
राज्य सरकार ने संदिग्ध अवैध प्रवासियों को अस्थायी रूप से रखने के लिए अलग-अलग जिलों में होल्डिंग सेंटर बनाने शुरू कर दिए हैं। इन सेंटरों में उन विदेशी नागरिकों को रखा जाएगा, जिनके निर्वासन या एक्स्ट्राडीशन की प्रक्रिया चल रही होगी। यह पूरा कदम गृहमंत्रालय की विदेशी शाखा द्वारा जारी केंद्र सरकार की गाइडलाइंस के आधार पर उठाया गया है।
मालदा बना पहला जिला जहां सेंटर शुरू
मालदा ऐसा पहला जिला बन गया है जहां यह होल्डिंग सेंटर पूरी तरह काम करना शुरू कर चुका है। इंग्लिश बाजार शहर के चंदन पार्क इलाके में बने इस सेंटर में अब तक नौ संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को रखा गया है। इनमें तीन महिलाएं और छह नाबालिग शामिल हैं।
कैसे पकड़े गए ये लोग?
इन लोगों को गाजोल पुलिस स्टेशन क्षेत्र के पंडुआ इलाके से पकड़ा गया था। इसके बाद रविवार को इन्हें होल्डिंग सेंटर में ट्रांसफर कर दिया गया। सेंटर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। यहां CCTV निगरानी के साथ 12 पुलिसकर्मी और अन्य कर्मचारी 24 घंटे तैनात हैं।
30 दिन तक हिरासत में रखा जा सकेगा
अधिकारियों के मुताबिक, ये सेंटर अस्थायी ट्रांजिट सुविधाएं हैं जहां लोगों के दस्तावेजों की जांच कर उनकी राष्ट्रीयता तय की जाएगी। नए नियमों के तहत संदिग्ध अवैध प्रवासियों को अधिकतम 30 दिनों तक हिरासत में रखा जा सकता है।
बायोमेट्रिक डेटा भी होगा रिकॉर्ड
जिला मजिस्ट्रेट और अन्य नियुक्त अधिकारी सत्यापन प्रक्रिया पूरी करेंगे। इसके तहत बायोमेट्रिक डिटेल्स इकट्ठा की जाएंगी और डेटा को केंद्रीय डेटाबेस में अपलोड किया जाएगा। इसके बाद ही निर्वासन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
नए Immigration Law से जुड़ा मामला
इस कार्रवाई को Immigration and Foreigners Act 2025 से भी जोड़ा जा रहा है। इस नए कानून ने पुराने कई इमिग्रेशन कानूनों की जगह ली है। इसके तहत निगरानी, हिरासत और निर्वासन के लिए टेक्नोलॉजी आधारित सिस्टम लागू किया गया है।
बिना वारंट गिरफ्तारी का अधिकार
नए कानून के अनुसार हेड कांस्टेबल रैंक या उससे ऊपर के पुलिस अधिकारियों को बिना वारंट संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार करने का अधिकार दिया गया है। इसके बाद बंगाल में घुसपैठ और नागरिकता को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
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