TMC सिर्फ इन्हीं पांच सीटों पर 'भले उम्मीदवारों' को वोट देने की अपील क्यों कर रही है ?

नॉर्थ 24 परगना, 16 अप्रैल: बंगाल में आधे दौर के चुनाव हो चुके हैं और पांचवें दौर का प्रचार खत्म हो चुका है। इस दौरान विपक्षी बीजेपी ने सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस पर लगातार भाई-भतीजावाद और उसके कार्यकर्ताओं पर गुंडागर्दी के आरोप लगाए हैं। लेकिन, अब छठे दौर के लिए जो प्रचार हो रहा है, उसमें कम से कम पांच सीटें ऐसी हैं, जहां कहानी बदल गई है। इन सीटों पर तृणमूल कांग्रेस बीजेपी पर वही तमाम आरोप लगा रही है, जो अबतक भाजपा वाले उसपर लगाते रहे हैं। ये सारी सीटें नॉर्थ 24 परगना की हैं, जहां ममता बनर्जी की पार्टी 'भले और अच्छे' उम्मीदवारों को वोट देने की अपील कर रही है। इसे टीएमसी की इस बदली हुई रणनीति कहिए या चुनावी मजबूरी, लेकिन इसने बंगाल चुनाव का रंग ही निराला बना दिया है।

बदले-बदले रंग में नजर आ रही है तृणमूल

बदले-बदले रंग में नजर आ रही है तृणमूल

नॉर्थ 24 परगना में हिंदी-भाषी मतदाताओं की बड़ी आबादी है। इसे बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह का गढ़ माना जाता है। खासकर यहां कि उन पांचों विधानसभा सीटों पर उनका अच्छा-खासा दबदबा है। ये सीटें हैं- भटपाड़ा, कांचरापाड़ा, कांकिनारा, जगदल और नैहाटी। इन सीटों पर टीएमसी के प्रचार का सुर ही बदला हुआ है। यहां पर पार्टी वोटरों से कह रही है कि वह वंशवाद की राजनीति का खात्मा करे और ऐसे उम्मीदवार को वोट दे जिसपर कोई 'आपराधिक मामले' नहीं हैं। जबकि, टीएमसी पूरे प्रदेश में विपक्ष की ओर से इन्हीं आरोपों से घिरी हुई है। इनमें से कई सीटों पर टीएमसी की ओर से बड़े-बड़े पोस्टर लगाए गए हैं, जिसपर वोटरों से अपील की गई है कि 'सिर्फ भले और अच्छे उम्मीदवारों को ही वोट दें।' यहां पार्टी के नेता भाजपा पर सारे 'गुंडा तत्वों' को पार्टी में भर लेने का आरोप लगा रहे हैं।

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    टीएमसी से भाजपा में आए हैं अर्जुन सिंह

    टीएमसी से भाजपा में आए हैं अर्जुन सिंह

    दरअसल, चार बार के विधायक अर्जुन सिंह 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी से इसलिए नाराज होकर टीएमसी से निकल गए थे, क्योंकि उन्होंने बैरकपुर लोकसभा सीट से वरिष्ठ नेता और पूर्व रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी को टिकट दे दिया था। आज ये दोनों नेता भाजपा में हैं और अर्जुन सिंह इस लोकसभा सीट से सांसद हैं। सिंह ने भाजपा को सिर्फ बैरकपुर संसदीय सीट ही नहीं दिलाई है, उनके दम पर पार्टी भटपाड़ा स्थानीय निकाय पर भी काबिज हो गई है, जो कि राज्य में ऐसी संस्था पर पार्टी की पहली जीत है। इस चुनाव में भी बीजेपी ने भटपाड़ा सीट से इनके बेटे पवन सिंह को टिकट दिया है, जिनके खिलाफ टीएमसी से जीतेंद्र शाव मैदान में हैं। भाजपा उम्मीदवार की हैसियत के सामने तृणमूल प्रत्याशी खुद को बिल्कुल मामूली व्यक्ति के तौर पर पेश कर रहे हैं, जो अपने पिचा को 'पुचका बेचने वाला' बताकर सहानुभूति वोट की जुगत लगाने की कोशिश कर रहे हैं।

    लोकसभा चुनाव के बाद बिगड़ा था माहौल

    लोकसभा चुनाव के बाद बिगड़ा था माहौल

    कांकिनारा इलाके में 2019 के चुनाव के बाद छिटपुट हिंसा देखने को भी मिली थी, जिसके चलते करीब महीने भर तक तनाव का माहौल बन गया था। इस इलाके में बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश से आए प्रवासी कामगारों की बड़ी जनसंख्या है। स्थानीय लोगों का दावा है कि उस समय स्थानीय सांसद के समर्थकों और पुलिस में हिंसक भिड़त भी हो गई थी, जिसमें कम से कम दो लोगों की मौत हुई थी और कई जख्मी भी हो गए थे। इस घटना को लेकर अर्जुन सिंह ने पुलिस पर गंभीर आरोप भी लगाए थे। स्थानीय लोगों के मुताबिक यह तनाव भाजपा और टीएमसी के हिंदू-मुस्लिम समर्थकों की वजह से हुआ था और वह माहौल अभी भी महसूस किया जा सकता है। छोटी-मोटी खाने की चीजें बेचकर अपना गुजारा चलाने वाले श्यामलाल पासवान का कहना है- 'लोगों के बीच विभाजन साफ है। मुसलमान टीएमसी को वोट देंगे। हिंदू मोदी के लिए वोट करेंगे, क्योंकि वो हमारी सेना को बाहुबली बना रहे हैं और हमारी रक्षा कर रहे हैं। '

    अर्जुन सिंह से बदला ले पाएंगी ममता ?

    अर्जुन सिंह से बदला ले पाएंगी ममता ?

    जानकारी के मुताबिक अर्जुन सिंह का जूट मिल में काम करने वाले कामगारों और कंस्ट्रक्शन मैटरियल के कारोबार में जुड़े लोगों पर बहुत ज्यादा प्रभाव है। जुट मिल में काम करने वाले प्रलय दास बताते हैं, 'लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और व्यवसाय में उनका बहुत ही ज्यादा प्रभाव है। उनकी वजह से आज ये पूरा इलाका बीजेपी की ओर हो चुका है। हमारे लिए वह भगवान की तरह हैं। बीमारी के संकट के दौरान उन्होंने हमें पैसे दिए थे, जबकि हमारे पास सर्टिफिकेट भी नहीं थे।' उनके प्रभाव का ही असर है कि जगदल जाइए या भटपाड़ा, लाउडस्पिकर पर इस तरह के नारे सुनाई पड़ेंगे- 'अयोध्या तो सिर्फ झांकी है, काशी-मथुरा बाकी है।'

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