Prateek Yadav Funeral: ससुर अरविंद बिष्ट ने क्यों दी प्रतीक को मुखाग्नि? अखिलेश-अपर्णा कर्तव्य से चूके?

Prateek Yadav Funeral: मुलायम सिंह यादव के सबसे छोटे बेटे प्रतीक यादव का अचानक निधन पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति और यादव परिवार को झकझोर गया। मात्र 38 साल की उम्र में 13 मई को प्रतीक का दुनिया से जाना यादव परिवार के लिए व्यक्तिगत क्षति है।

14 मई की सुबह 2 बजे के करीब बैकुंड धाम पर हुए अंतिम संस्कार हुआ। इसमें सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात थी 'मुखाग्नि'। प्रतीक की पत्नी अपर्णा यादव (भाजपा नेता) के पिता अरविंद सिंह बिष्ट ने चिता को मुखाग्नि दी। इस क्रिया-कर्म ने सभी को चौंका दिया। सवाल उठे कि भाई सपा प्रमुख अखिलेश, प्रतीक की पत्नी अपर्णा और दो बेटियों के होते हुए, ससुर ने क्यों चिता को अग्नि दी? उन्होंने यह कर्तव्य क्यों नहीं निभाया? आइए विस्तार से समझते हैं...

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Prateek Yadav Last Rites: प्रतीक यादव की अंतिम विदाई

प्रतीक यादव का निधन 13 मई 2026 की सुबह हुआ। वे घर में अचानक बीमार पड़े और सिविल अस्पताल ले जाए गए, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कार्डियोरेस्पिरेटरी कोलैप्स फेफड़ों में बड़े ब्लड क्लॉट को मौत का कारण बताया गया।

14 मई की सुबह 11 बजे अंतिम यात्रा में हजारों समर्थक और शुभचिंतक शामिल हुए। 'प्रतीक यादव अमर रहें' के नारे गूंजे। शिवपाल यादव के बेटे आदित्य ने कंधा दिया। परंपरा के अनुसार, शव को पांच बार जमीन पर रखा गया। सपा कार्यालय के पास भी। प्रतीक की दोनों बेटियां, सौतेले भाई अखिलेश यादव, चाचा शिवपाल यादव और अन्य परिजन बैकुंड धाम श्मशान पहुंचे। अंतिम संस्कार में अरविंद सिंह बिष्ट ने चिता की परिक्रमा की, लकड़ियां रखीं और मुखाग्नि दी। लेकिन अखिलेश, उनके बेटे और प्रतीक की बेटियों ने भी चिता पर सिर्फ लकड़ी चढ़ाई। यह दृश्य भावुकता और सवालों से भरा था।

Who Is Who is Arvind Bisht: अरविंद बिष्ट कौन हैं?

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अरविंद सिंह बिष्ट उत्तराखंड से जुड़े एक सम्मानित व्यक्ति हैं। वे पूर्व पत्रकार रह चुके हैं। सपा सरकार में राज्य सूचना आयुक्त का पद संभाला। उत्तरकाशी के गढ़वाल विश्वविद्यालय से विज्ञान स्नातक और बुल्गारिया के सोफिया स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ जर्नलिज्म से पत्रकारिता का कोर्स किया। उनकी पत्नी अंबी बिष्ट नगर निगम में जोनल अधिकारी के पद से रिटायर हुईं। परिवार में अपर्णा यादव (भाजपा की राज्य महिला आयोग उपाध्यक्ष) उनकी बेटी हैं। अरविंद बिष्ट ने प्रतीक की मौत पर भावुक नोट लिखा, जिसमें उन्हें 'रहस्य' कहा और उनके फिटनेस जर्नी, विनम्र स्वभाव को याद किया।

अब बड़ा सवाल: अखिलेश-अपर्णा ने क्यों नहीं दी चिता को आग?

धर्मशास्त्रों (गरुड़ पुराण, मनुस्मृति आदि) के अनुसार, मुखाग्नि (अग्नि प्रदान करना) मुख्य रूप से पुरुष वंश से जुड़ा माना जाता है, क्योंकि यह पितरों को मोक्ष दिलाने का माध्यम है। पत्नी को भी कई आधुनिक व्याख्याओं में अधिकार दिया जाता है, खासकर पुत्र न होने पर। बेटी द्वारा मुखाग्नि भी आज कई जगह स्वीकार्य हो चुकी है। लेकिन, पारंपरिक क्रम के मुताबिक,

  • 1. ज्येष्ठ पुत्र को सबसे पहला अधिकार।
  • 2. पौत्र (पोता) को दूसरा।
  • 3. भाई (बड़ा या छोटा)।
  • 4. भतीजा या निकट पुरुष रिश्तेदार।
  • 5. दत्तक पुत्र।

क्या ससुर दे सकता है चिता को आग?

ससुर (पत्नी का पिता) पारंपरिक रूप से 'पैतृक कुल' का सदस्य नहीं माना जाता। फिर भी, अगर मृतक का कोई निकट पुरुष रिश्तेदार उपलब्ध न हो, परिवार स्वयं इच्छा व्यक्त करे, पत्नी और बेटियां चाहें...तो ससुर यह कर्तव्य निभा सकता है। आधुनिक भारत में ऐसे उदाहरण बढ़ रहे हैं, जहां व्यावहारिकता और भावनात्मक निकटता को प्राथमिकता दी जाती है।

प्रतीक यादव मामले में फैसला क्यों ससुर को? 5 Point में समझें...

  • प्रतीक के पुत्र नहीं थे, केवल दो बेटियां हैं।
  • अखिलेश यादव बड़े भाई हैं, लेकिन सौतेले भाई (मुलायम सिंह की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता से प्रतीक का जन्म)। आशंका है कि यादव परिवार में पहले से ही गुटबाजी और दूरी इसकी वजह हो सकती है।
  • परिवार की आपसी सहमति से यह फैसला लिया गया लगता है। अपर्णा यादव (पत्नी) और बेटियों की भावनाओं को महत्व दिया गया।
  • अखिलेश यादव ने खुद को शोक में रखा और बड़े भाई का स्नेह दिखाया, लेकिन मुखाग्नि का पारंपरिक दायित्व ससुर को सौंपा गया।
  • यह फैसला परिवारिक एकता का प्रतीक भी हो सकता है, क्योंकि प्रतीक-अपर्णा का रिश्ता राजनीतिक रूप से संवेदनशील था (अपर्णा भाजपा में)।

Yadav Family Politics: यादव परिवार की जटिल वंशावली

मुलायम सिंह यादव की दो शादियां हुईं। सौतेले भाई होने के बावजूद अखिलेश और प्रतीक के संबंध बचपन में सुगम रहे। प्रतीक सक्रिय राजनीति से दूर रहे, इसलिए मुलायम ने उन्हें रियल एस्टेट से संबंधित बिजनेस की जिम्मेदारी दी। वहीं, बडा बेटा होने के नाते अखिलेश को सत्ता की कुर्सी मिली। प्रतीक का सारा वक्त रियल एस्टेट, फिटनेस प्लैनेट जिम और पशु कल्याण (Jeev Ashray) में व्यस्त रहा।

सियासी गलियारों में चर्चा है कि प्रतीक की लव मैरिज अपर्णा बिष्ट (अब यादव) से होने के बाद परिवार में खटास नजर आने लगी। 2026 की शुरुआत में प्रतीक-अपर्णा के बीच विवाद सार्वजनिक हुआ था (तलाक की खबरें), लेकिन बाद में सुलह हो गई। यह घटना यादव परिवार की आंतरिक कलह को फिर उजागर करती है।

अंतिम संस्कार के बाद अब 13 दिन के क्रिया-कर्म की बारी है। परिवार शोक में है। प्रतीक यादव की दोनों बेटियां, अपर्णा और पूरे यादव परिवार को इस घड़ी में संबल मिले।

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