Iran Vs America: ईरान के पीछे चट्टान बनकर खड़ा हुआ चीन, दोनों देशों के विदेश मंत्री के बीच डील, टेंशन में ट्रंप
China Support to Iran: वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए एक बड़ी कूटनीतिक कोशिश शुरू हुई है। खबर है कि दोनों पक्ष 14-पॉइंट के समझौते (MoU) पर विचार कर रहे हैं, ताकि युद्ध का खतरा टल सके। इसी बीच, चीन के विदेश मंत्री वांग यी और ईरान के विदेश मंत्री की बीजिंग में हुई मुलाकात ने इस मामले में नया मोड़ ला दिया है।
एक तरफ अमेरिका से समझौते की सुगबुगाहट है, तो दूसरी तरफ चीन का मजबूत समर्थन। ईरान इस समय 'धमकी और समर्थन' के बीच अपनी सुरक्षा और कूटनीति का नया संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।

Iran Vs America: अमेरिका के साथ 14-पॉइंट का प्लान
ईरान और अमेरिका के बीच चल रही दुश्मनी को थामने के लिए एक संभावित समझौते की बात सामने आ रही है। इस 14-पॉइंट के फॉर्मूले का मुख्य उद्देश्य फिलहाल युद्ध जैसी स्थिति को रोकना है। इसमें परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय संघर्षों पर बातचीत के रास्ते खोलने की तैयारी है। यह समझौता ईरान के लिए एक बड़ी राहत हो सकता है, क्योंकि इससे उस पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों में ढील मिल सकती है और क्षेत्र में शांति की उम्मीद जग सकती है।
🚨⚡️ China’s foreign minister affirmed support for Iran’s sovereignty and rejected U.S. pressure over Iranian oil, stressing that a lasting ceasefire is inevitable. pic.twitter.com/0yALpdLkqx
— RussiaNews 🇷🇺 (@mog_russEN) May 6, 2026
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चीन का साथ: ईरान की ढाल
अमेरिका से बातचीत के बीच, चीन ने ईरान को खुलकर समर्थन देकर अपनी स्थिति साफ कर दी है। चीनी विदेश मंत्री ने कहा कि वे ईरान की संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा में उसके साथ हैं। यह मुलाकात दिखाती है कि ईरान केवल अमेरिका के भरोसे नहीं है, बल्कि उसके पास चीन जैसा शक्तिशाली विकल्प भी मौजूद है। चीन का यह 'सपोर्ट एंगल' ईरान को बातचीत की मेज पर मजबूती से बैठने की ताकत देता है, ताकि वह दबाव में न आए।
मध्य-पूर्व में शांति की नई उम्मीद
इस समय पूरा इलाका बारूद के ढेर पर खड़ा है, जहां जरा सी चूक युद्ध भड़का सकती है। चीन ने साफ किया है कि अब और हिंसा बर्दाश्त नहीं की जा सकती। चीन खुद को एक 'मध्यस्थ' के रूप में देख रहा है, जो ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। बीजिंग की कोशिश है कि युद्ध रुके और बातचीत के जरिए शांति बहाल हो, जिससे न केवल ईरान बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट में स्थिरता आ सके।
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डिप्लोमेसी की बिसात और ईरान का दांव
ईरान इस समय बड़ी चतुराई से अपनी चालें चल रहा है। एक तरफ वह अमेरिका के साथ समझौते की संभावनाओं को तलाश रहा है, ताकि सीधे टकराव से बचा जा सके। दूसरी तरफ, चीन के साथ अपने रिश्तों को और गहरा कर रहा है ताकि अमेरिका उसे अलग-थलग न कर पाए। यह 'डबल गेम' ईरान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सुरक्षा देता है। चीन का साथ और अमेरिका से समझौते की बातचीत, दोनों मिलकर इस क्षेत्र की राजनीति को एक नई दिशा दे रहे हैं।












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