Bengal में क्या था BJP की जीत का फॉर्मूला? कपिल सिब्बल ने आंकड़े दिखाकर पूछा- संयोग है या साजिश?
West Bengal: पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही राज्य में एक नए सियासी युग का आगाज हो गया है। लेकिन इस ऐतिहासिक बदलाव के बीच, कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और दिग्गज वकील कपिल सिब्बल ने चुनाव के नतीजों पर एक 'विस्फोटक' दावा कर नई बहस छेड़ दी है। सिब्बल ने एक चुनावी ट्रिब्यूनल के आंकड़ों के जरिए सीधे चुनाव आयोग (EC) पर निशाना साधा है और आरोप लगाया है कि बंगाल में भाजपा की जीत के पीछे 'वोटर लिस्ट' में हुई बड़ी धांधली एक मुख्य वजह हो सकती है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद अब सियासी गलियारों में 'वोटर लिस्ट' को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग (EC) को सीधे कटघरे में खड़ा करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।

सिब्बल ने दिया चुनावी ट्रिब्यूनल के आंकड़ों का हवाला
सिब्बल ने एक चुनावी ट्रिब्यूनल के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया है कि बंगाल में भारी संख्या में मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए, जो भाजपा की जीत का आधार बना। आइए जानते हैं सिब्बल ने क्या खुलासे किए हैं और क्या है पूरा मामला?
Justice T S Shivagnanum
One of 19 Tribunals hearing appeals in West Bengal Elections
Disposed 1777 appeals
Cleared 1717
what this means :
More than 96% of names wrongly deleted
CEC zindabad
This is how BJP won !
— Kapil Sibal (@KapilSibal) May 9, 2026
वोटर लिस्ट को लेकर क्या है सिब्बल का दावा?
कपिल सिब्बल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट के जरिए पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया (Special Intensive Revision - SIR) पर सवाल उठाए। उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणनम के नेतृत्व वाले ट्रिब्यूनल के आंकड़ों का हवाला दिया।
सिब्बल ने अपने पोस्ट में आंकड़ों को स्पष्ट करते हुए लिखा, 'जस्टिस टीएस शिवगणनम, पश्चिम बंगाल चुनाव में अपीलों की सुनवाई करने वाले 19 ट्रिब्यूनल में से एक। 1777 अपीलों का निपटारा किया। 1717 को मंजूरी दी।' इन आंकड़ों की व्याख्या करते हुए सिब्बल ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से हटाए गए 96 प्रतिशत से अधिक नाम "गलत तरीके से डिलीट" किए गए थे।
चुनाव आयोग पर तीखा तंज
इन आंकड़ों को साझा करने के बाद कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग और भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि, 'इसका मतलब क्या है: 96 प्रतिशत से अधिक नाम गलत तरीके से हटाए गए। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) जिंदाबाद। भाजपा इसी तरह जीती!' गौरतलब है कि यह टिप्पणी जस्टिस टीएस शिवगणनम द्वारा गुरुवार को अपीलीय ट्रिब्यूनल से इस्तीफा देने के बाद आई है।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप और 'SIR' विवाद
इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) अभ्यास के दौरान मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों के मामलों की तत्काल सुनवाई करने का निर्देश दिया था। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपीलीय ट्रिब्यूनल को निर्देश दिया था कि वे उन व्यक्तियों की अपीलों को प्राथमिकता दें, जिन्हें मतदाता सूची से बाहर रखा गया है।
कोर्ट ने प्रभावित लोगों को अपनी शिकायतों के साथ कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पास जाने की भी स्वतंत्रता दी थी। अदालत ने नोट किया था कि जो नाम SIR में हटाए गए हैं और जिनके मामले ट्रिब्यूनल के पास लंबित हैं, उन्हें जल्द से जल्द सुना जाना चाहिए, खासकर यदि अपीलकर्ता अपनी तात्कालिकता (Urgency) साबित कर सकें। सिब्बल के इन आरोपों ने अब बंगाल चुनाव की निष्पक्षता और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर एक नई बहस छेड़ दी है।















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