Monsoon : बारिश का पानी बहने से रोकें किसान भाई, फसल से होगी बंपर कमाई, जानिए तरीका
आम तौर से बारिश के मौसम में किसानों को फसलों की सिंचाई की चिंता से मुक्ति मिल जाती है। हालांकि, इसके अलावा रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसी तकनीक का इस्तेमाल भी किया जाना चाहिए, जिससे आने वाले समय में भी पानी कि किल्लत न हो।
नई दिल्ली, 09 जून : मॉनसून की शुरुआत हो चुकी है। खेती के लिए किसान अपने खेतों में जरूरी तैयारियों में जुटे हैं। कुछ इलाकों से छिटपुट बारिश की भी खबरें आ रही हैं। इसी बीच मॉनसून (monsoon) में कैसी बारिश होगी इस पर भी लोगों के बीच चर्चाएं हो रही हैं। आशंकाओं से बचने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग यानी बारिश के पानी को बचाने की पहल करने पर किसान सिंचाई की दिक्कतों से मुक्त हो सकते हैं। बारिश के पानी को बचाने का उपाय करने के लिए सरकार भी किसानों की मदद कर रही है। जानिए खेती में शानदार फसल पैदा करने के लिए सिंचाई के क्या विकल्प हो सकते हैं ? ये भी समझिए कि बारिश के पानी को बचाने पर सरकार कैसे किसानों की मदद कर रही है ?

अच्छी बारिश का अनुमान
दरअसल 2022 के मॉनसून के बारे में भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अनुमान लगाया है कि इस बार बंपर बारिश हो सकती है। आईएमडी के पूर्वानुमान के आधार पर वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर किसान भाई वर्षा जल संचयन यानी रेन वाटर हार्वेस्टिंग करें तो उनके खेतों के साथ-साथ शहरों में रहने वाली बड़ी आबादी को भी फायदा मिलेगा।
पानी की किल्लत
गौरतलब है कि लगातार बढ़ती आबादी और पर्यावरण के साथ हो रहे खिलवाड़ के कारण ग्लोबल वार्मिंग से जुड़ी चिंताएं गहरा रही हैं। बहुत बड़ी आबादी पानी की समस्या से जूझ रही है। यहां तक कि पीने का पानी भी मीलों दूर पैदल चल कर लाना पड़ता है। ऐसे में गांवों और शहरों में पानी की किल्लत ना हो इसके उपाय किए जाने की तत्काल जरूरत है।
बारिश का पानी बचाना जरूरी
गर्मी में वैसे भी पानी की खपत बढ़ जाती है, लेकिन जहां पानी ही मयस्सर ना हो वैसे इलाकों में बारिश के पानी को बचाने के उपाय कारगर हो सकते हैं। यानी रेन वाटर हार्वेस्टिंग किसानों के साथ साथ बड़ी संख्या में आम लोगों की समस्या का भी निदान कर सकता है। ये किसी से छिपा हुआ नहीं है कि लगातार फैल रहे कंक्रीट के जंगलों के कारण भूगर्भ जलस्तर गिरता जा रहा है। ग्राउंडवाटर रिचार्ज नहीं हो रहा है। डीप बोरिंग के कारण वाटर लेवल रसातल में जा रहा है। 300-400 फीट की बोरिंग के बाद भी कई इलाकों में पानी का नामोनिशान नहीं मिल रहा। ऐसी विकट स्थिति में वर्षा जल संचयन की तकनीक काफी बेहतरीन साबित हो सकती है।
पंजाब में कम पानी में धान की खेती
सरकार की ओर से भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग तकनीक को अपनाने पर मदद की जा रही है। जागरूकता कार्यक्रम चलाकर लोगों को बारिश का पानी बचाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में मॉनसून की शुरुआत के बाद खरीफ सीजन के फसलों की रोपाई की तैयारियां हो रही हैं। जून के दूसरे हफ्ते की शुरुआत हो चुकी है। ऐसे में आने वाले समय में फसलों की सिंचाई का सवाल किसानों के माथे पर बल लाने के लिए काफी है। हालांकि, पंजाब जैसे राज्य में डीएसआर तकनीक के साथ धान की खेती करने पर जोर दिया जा रहा है, जिसमें पानी की जरूरत कम पड़ती है, लेकिन भविष्य को देखते हुए किसान भाइयों को रेन वाटर हार्वेस्टिंग की तकनीक के साथ पानी की खपत कम करने के अलावा बारिश के पानी से ही सिंचाई का इंतजाम करने का इंतजाम करना चाहिए।
किसानों को सरकार से कैसे मिलेगी मदद
भारत सरकार का जल शक्ति मंत्रालय बारिश का पानी बचाने के लिए लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रहा है। इसके लिए 'कैच द रेन अभियान' भी चलाया जा रहा है। इस कैंपेन का मकसद बारिश के पानी को तालाब या अन्य जलाशयों में जमा करना है। पानी जमा करने के बाद इसका इस्तेमाल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट या भवन निर्माण जैसी जगहों पर किया जा सकता है। इसके अलावा जिन इलाकों में तालाब या जलाशय नहीं है वहां चेक डैम या जलाशय की खुदाई, तालाब जैसे दूसरे जल निकाय बनवाने की कवायद भी हो रही है। इसका एकमात्र मकसद बारिश के पानी का अधिकतम बचाव करना है।
'कैच द रेन' और MGNREGA का कनेक्शन
बता दें कि कोविड-19 महामारी की से उपजी चुनौतियों के बीच 'कैच द रेन' कैंपेन सुर्खियों में रहा। कई इलाकों में इस अभियान से उल्लेखनीय कामयाबी भी मिली है। ग्रामीण विकास मंत्रालय की महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम यानी मनरेगा (MGNREGA) के तहत ग्रामीणों को रोजगार दिया जा रहा है। गांवों में बारिश के पानी को जमा करने से जुड़े प्रोजेक्ट चलाए जा रहे हैं। बारिश के पानी का संचय करने के लिए तालाब और चेक डैम बनाने के अलावा किसान भाइयों को फसलों के डायवर्सिफिकेशन यानी पारंपरिक फसलों के अलावा दूसरी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन फसलों में तुलनात्मक रूप से थोड़ी कम सिंचाई की जरूरत पड़ती है। बाजार में मुनाफा भी अच्छा मिलता है। लगभग उतना ही पैसा मिलता है जितना धान, मक्का या बाजरा जैसी फसलों से आमदनी होती है।
मॉनसून में कैसी बारिश होगी ?
बता दें कि मौसम विभाग ने 2022 के मॉनसून में मूसलाधार बारिश होने का पूर्वानुमान लगाया है। ऐसे में अगर किसान भाइयों के साथ आम लोग भी बारिश का पानी बचाने की तकनीक- रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर काम करें तो ग्रामीण आबादी के अलावा शहरी इलाकों में भी फायदा हो सकता है। साथ ही खेती किसानी में सिंचाई की समस्या से निजात यानी स्थायी समाधान निकाला जा सकता है। फसलों के चुनाव पर दोबारा विचार करने से खेती में होने वाली पानी की खपत भी कम की जा सकती है। यानी बहते पानी को बचा कर किसान पैसों का बहना रोक सकेंगे और इस तरह उनकी आमदनी और मुनाफा दोनों बढ़ेंगे।












Click it and Unblock the Notifications