pomegranate farming : कम सिंचाई में भी 25 साल तक फलता है अनार, सालाना 8-10 लाख रुपये की कमाई
पारंपरिक खेती के अलावा हॉर्टिकल्चर किसानों के बीच पैठ बना रहा है। बागवानी में कई तरह की फसल से किसान अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। ऐसी ही एक फसल है अनार यानी पोमेग्रेनेट। पोमेग्रेनेट फार्मिंग से किसान मोटी कमाई कर सकते हैं।
नई दिल्ली, 12 जून : अनार की खेती (pomegranate farming) किसानों के लिए मुनाफे का सौदा है। भारत से बड़ी मात्रा में अनार एक्सपोर्ट भी किया जाता है। ऐसे में अनार की खेती करना किसानों के लिए अच्छा विकल्प है। वनइंडिया हिंदी अनार पर एक अन्य रिपोर्ट में पहले भी बता चुका है कि किस तरह राजस्थान के किसानों ने अनार की खेती कर अपनी किस्मत बदल डाली। इस रिपोर्ट के मुताबिक किसानों और विशेषज्ञों का मानना है कि अनार की सफल खेती से 20 लाख रुपये तक कमाए जा सकते हैं। खेती की शुरुआत में तो अनार का पौधा महज 40 रुपये में मिल जाता है, लेकिन पौधों की देखभाल के बाद तैयार होने वाली फसल ही अच्छी मार्केट डिमांड और मुनाफा दिलाती है। पढ़िए रिपोर्ट

25 साल तक मिलेंगे फल
पोमेग्रेनेट की खेती करने से जुड़ी सबसे खास बात है कि एक पौधे से 25 साल तक फल हासिल किए जा सकते हैं। ऐसे में जितने पौधे लगाए जाएंगे उसकी देखरेख करने पर कई वर्षों तक फसल हासिल की जा सकती है। अनार की खेती भारत में मुख्य रूप से महाराष्ट्र में होती है। अब उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और गुजरात के किसान की खेती कर रहे हैं।

इन राज्यों में अनार की खेती
महाराष्ट्र के अलावा दूसरे राज्यों में बगीचे छोटे स्तर के होते हैं। एक अनुमान के मुताबिक अनार की खेती करने पर सालाना 8-10 लाख रुपये कमाए जा सकते हैं। कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखा जाए तो किसानों को बंपर कमाई हो सकती है। दरअसल, गर्मी के मौसम में सबसे ज्यादा असर फलों पर पड़ता है। बढ़ती गर्मी के साथ फसलों की सिंचाई अधिक करनी पड़ती है। नतीजतन खेती की लागत बढ़ जाती है। हालांकि, अनार के पेड़ अपवाद हैं।

कम सिंचाई में उपजता है अनार
अनार की खेती कम सिंचाई वाली फसल है। भारत में कई राज्यों में अनार की खेती हो रही है। पोषक तत्वों से भरपूर ये फसल किसी ने किसी तरह आपकी बॉडी ऑर्गन को फायदा पहुंचाते हैं, लेकिन अनार वजन घटाने में मदद करता है यह काफी दिलचस्प बात है। फूड साइंस से जुड़े लोगों का मानना है कि अनार को डाइट प्लान में जरूर शामिल करना चाहिए।

अनार के बाग में पानी न जमा हो
अनार की खेती 38 डिग्री सेल्सियस तापमान मैं अच्छे से होती है। फलों के विकसित होने और पकने के समय गर्म और शुष्क जलवायु की जरूरत होती है। ऐसे में अनार की खेती बढ़िया तरीके से करने के लिए मिट्टी का भी ध्यान रखना पड़ता है। अनार की खेती ऐसे बगीचे में की जाती है जहां पानी का जमाव न होता हो।

अनार की वेराइटी
अनार की खेती के लिए जमीन तैयार करते समय जल निकास के पर्याप्त इंतजाम करने चाहिए। अनार की फसल के लिए रेतीली दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है। फलों की गुणवत्ता और रंग भारी मिट्टी की तुलना में हल्की मिट्टी में अच्छा होता है। भारत में अनार की कई किस्में पैदा की जाती हैं इसमें सुपर भगवा, ज्योति, मृदुला, अरक्ता और कंधारी प्रमुख वेरायटी हैं।

ऐसे होती है अनार की रोपाई
अनार की रोपाई कब करें यह भी एक बड़ा प्रश्न है। वैज्ञानिकों की राय के मुताबिक अनार के पौधों की रोपाई का उपयुक्त समय अगस्त या फरवरी से मार्च के बीच का होता है। अनार के पौधे की रोपाई कैसे होती है ? इस सवाल पर विशेषज्ञों का मानना है कि अनार के पौधों की रोपाई कलम से तैयार किए गए छोटे पौधों से की जाती है। एक साल पुरानी टहनियों से 20 से 30 सेंटीमीटर लंबी कलम काटकर पौधशाला में नए पौधों को तैयार किया जाता है।

8-10 लाख रुपये सालाना कमाई
रोपाई के 3 साल के बाद अनार में फल लगना शुरू हो जाता है। व्यावसायिक खेती करने वाले किसान रोपाई के 5 साल बाद अनार की तुड़ाई करते हैं। अच्छी तरह से विकसित अनार का पौधा 25 से 30 साल तक फल देता है। एक पौधे पर 60 से 80 फल हर साल फलते हैं। एक हेक्टेयर खेत में अनार के बाग लगाने पर लगभग 480 टन फल मिलता है। इसे बेच कर 8-10 लाख रुपये सालाना कमाई हो सकती है।












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